बड़ी ख़बर : पौड़ी लोकसभा सीट से भाजपा उसे टिकट देगी ! जिसने देश सेवा के लिए 2 गोलिया खाई, जिसने 7 आतंकियों को किया ढेर ! पूरी ख़बर यहां है

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उत्तराखंड मै भाजपा लगातार मंथन कर रही है की कैसे उत्तराखंड की पाँचो सीटो पर जीत दर्ज की जाए और भाजपा के लोकसभा चुनाव प्रभारी थावर चंद गहलोत से लेकर प्रदेश प्रभारी स्याम जाजू भी लगातार कह चुके है कि अबकी बार लोकसभा का टिकट सेटिंग गेटिंग के आधार पर नही बल्कि जिताऊ ओर टिकाऊ के आधार पर मिलेगा ।
बहराल जल्द ही नामो का एलान भी हो जाएगा।पर उत्तराखंड में वो एक सीट है जिसे पौड़ी लोकसभा सीट कहते है जहां के युवाओं का देश सेवा में महत्त्वपूर्ण योगदान है और ये पौड़ी लोकसभा की जनता का विस्वास भी सेना के रिटायर अफसरों पर खूब रहता है फिर चाहे पूर्व मुख्यमंत्री जर्नल खंडूड़ी का उदाहरण ले ले । जर्नल t.p s रावत का ।
पौड़ी लोकसभा सीट से माना जा रहा है कि अस्वस्थ होने के कारण जर्नल खडूडी चुनाव नहीं लड़ रहे ऐसे मे भाजपा के पास कही चेहरे है जो पौड़ी लोकसभा सीट से टिकट की माग कर रहे है ।और अभी अच्छे और बड़े नेता है पर ख़बर है कि भाजपा का हाई कमान उस को टिकट देने का मन बना रहा है जिसने देश सेवा के लिए 2 गोलिया खाई। जिस शख्स ने 7 आतंकियों को ढेर किया जी हां हम बात कर रहे है उस इंसान की जो कहते है
जिन्दगी में मां-बाप से बड़ा कोई रोल मॉडल नहीं होता और हमेशा ही अपनी सोच की समीक्षा कर उसी के आधार पर आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए ओर ये कहना है करोड़ो युवाओं के लिए स्वंय ‘रोल मॉडल’ बन चुके रिटायर कर्नल अजय कोठियाल का।


आपको बता दे कि देश की सीमाओं से लेकर और मुल्क के अंदर हर बड़ी चुनौती को बखूबी स्वीकार करने और उसे उसके अंजाम तक पहुंचाने का जुनून रखने वाले कर्नल अजय कोठियाल आज देश-दुनिया में किसी पहचान के मोहताज नहीं है साल .2013 की भीषण आपदा में तबाह केदारनाथ की चुनौती को स्वीकार ।पूरा देश से लेकर
प्रदेश में आई 2013 की भीषण आपदा को कोई भुला नहीं सकता. उस ‌समय उत्तराखण्ड देश-दुनिया की ओर मदद के लिए टकटकी लगाए बैठा था तब केदारनाथ धाम तबाही के मंजर का गवाही दे रहा था और सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी थी, लेकिन उस दौरान एनआईएम के प्रिसिंपल रहे कर्नल अजय कोठियाल ने बखूबी इस चुनौती को स्वीकार किया.चाहे बात देश की सीमाओं की हिफाजत की हो या फिर सामने खड़ी कुदरत की पहाड़ सी चुनौती, कशमीर से लेकर केदारनाथ जैसे दुर्गम और विषम भौगोलिक परिस्थितियों में कर्नल अजय कोठियाल ने अपनी हिम्मत का लोह मनवाया.केदारनाथ की प्रलयकारी सुनामी ने सब कुछ तबाह कर दिया था. ऐसे में जब राज्य सरकार के सामने केदारनाथ धाम को फिर से जीवत करने से साथ ही यात्रा को सुचारु करने की बड़ी चुनौती थी तो सरकारी एजेंसियों ने हाथ खड़े कर लिए थे

. उस दौरान एनआईएम ने बाबा केदारनाथ को फिर उसके मूल स्वरुप लौटाने का जिम्मा अपने कंधों पर लिया.हाड़ कंपाने वाली ठंड़ और तन जमा देने वाली सफेद मुसीबत के बावजूद एनआईएम ने बड़ी ही दिलेरी से वहां काम शुरु किया. कर्नल अजय कोठियाल ने भी केदारनाथ धाम में डेरा डाल और वहां काम करने वालों का हौसला बढ़ाते हुए फिर से बाबा केदार की यात्रा को सुचारु करवाया.प्राकृति चुनौतियों से निपटने के आधुनिक मशीनें केदारनाथ में उतारी गईं और देश के इतिहास में पहली बार मिग-26 जैसा विमान केदारपुरी में उतरा. आज राज्यवासी भी उनके इस हौसले को मानते हैं. क्योकि कर्नल कोठियाल ने सरहद से लेकर देश के अंदर हर मोर्चे पर अपना लोहा मनवाया


लगभग 47 साल की उर्म के मजबूत इरादों वाले कर्नल अजय कोठियाल 1992 में चौथी गढ़वाल राइफल में बतौर सैन्य अधिकारी शामिल हुए. सीमाओं की हिफाजत में कर्नल अजय कोठियाल ने 7 आंतकियों को भी मार गिराया था और खुद भी 2 गोलियां सीने में झेलीं. वही उनको वीरता और साहस के लिए कीर्ती चक्र, शौर्य चक्र, विशिष्ट सेवा मेडल से भी नवाजा जा चुका है.
अब तक वह भारत और नेपाल की 18 चोटियों पर पर्वतारोहण कर चुके हैं और 2001 में भारतीय सेना के पहले दल के सफल एवरेस्ट सबमिट करने का खिताब भी उनके ही नाम है. इतना ही नहीं 2012 में 7 महिला सैन्य अधिकारियों के साथ एवरेस्ट सबमिट करने में भी कर्नल अजय कोठियाल की भूमिका सहारनीय रही है. केदानारथ पुनर्निमाण कार्य में लगना उनके लिए एक बड़े ऑपरेशन से कम नहीं है.

यही नही वो बेरोजगार युवाओं के लिए अपनी तनख्वाह से भी चला रहे है भर्ती कैंप।
उत्तराखंड के मूल रूप से टिहरी गढ़वाल के रहने वाले कर्नल अजय कोठियाल ने आज तक शादी नहीं की है. वह अपनी पूरी तनख्वाह से राज्य के बेरोजगार युवाओं के लिए भारतीय सेना में शामिल होने के उद्देश्य से कैंप चलाते हैं. मौजूदा समय में राज्य के लगभग 5 हज़ार से अधिक युवा उनके दर्जन भर स्थानों पर चलाए जा रहे कैंपों में प्रिशिक्षण हासिल कर रहे हैं.।


कुछ समय पहले कर्नल कोठियाल ने वीआरस लेकर सामज सेवा करने की ठानी।
ओर यही वजह है कि कर्नल अब राजनीति के मैदान मे उतरने जा रहे है।
वर्तमान समय मे भाजपा की सरकार जिस तरह से देश सेवा मै काम कर रही है वो सबने हाल ही मे हुई एयर स्टाइक मै देख लिया है।
ख़बर है कि भाजपा कर्नल कोठियाल को पौड़ी लोकसभा सीट से मैदान मे उतारने का लगभग मन बना चुकी है। अगर कोई समीकरण ना बिगड़ी तो।
बहराल अगर भाजपा हाई कमान कर्नल कोठियाल को पौड़ी लोकसभा सीट से टिकट देता है तो भाजपा की जीत तय मानी जाएगी। साथ ही पूरे देश मे एक संदेश भी जाएगा कि 7 आतंकियों को मारने वाले कर्नल अजय कोठियाल ने समाज सेवा मे कदम रखना चाह तो भाजपा ने उनका स्वागत किया और सासंद का टिकट दिया।

वही अभी हाल ही मे रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूथ फाउंडेशन के संस्थापक और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के पूर्व प्रिंसिपल कर्नल अजय कोठियाल की प्रशंसा किए बिना नहीं रह सकीं. सीतारमण ने कहा था कि कर्नल कोठियाल के सेल्फ मोटिवेशन के कॉन्सेप्ट को देशभर में फैलाना चाहिए कि कैसे वह उत्तराखंड के युवाओं को सेना में भर्ती करने का काम कर रहे हैं. कर्नल कोठियाल के इस बेहतरीन काम से हम सभी को प्रेरणा मिलती है.
यूथ फाउंडेशन की भूमिका
केदारनाथ आपदा के बाद पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले कर्नल कोठियाल ने जगह जगह ट्रेनिंग कैंप शुरू कर उत्तराखंड के सैकड़ों युवाओं को सेना की राह दिखाई है. पिछले 5 सालों में 5हज़ार से ज्यादा स्थानीय युवा गढ़वाल और कुमाऊं रेजिमेंट में भर्ती हो चुके हैं. अब वे देवभूमि की बेटियों और कश्मीर के युवाओं को देश प्रेम की नई राह दिखा रहे हैं
वही सेना में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है. लड़ाकू विमान उड़ाने से लेकर लड़कियां हर मोर्चे पर हाथ आजमा रही हैं. ऐसे में सेना में करियर बनाने का सपना देख रही पहाड़ की बेटियों को तीन महीने की ख़ास ट्रेनिंग दी जा रही है. ये सब कर्नल कोटियाल की बदौलत ही सम्भव हो पाया

क्या आपको मालूम है कि कर्नल कोठियाल सात आतंकियों को देश सेवा के दौरान ढेर कर चुके है ।
आपको बता दे कि रिटायर कर्नल अजय कोठियाल 1992 में चौथी गढ़वाल राइफल में बतौर सैन्य अधिकारी शामिल हुए. सीमाओं की हिफाजत में कर्नल अजय कोठियाल ने 7 आंतकियों को भी मार गिराया और खुद भी 2 गोलियां सीने में झेली. उनके वीरता और साहस के लिए उन्हें कीर्ती चक्र, शौर्य चक्र, विशिष्ट सेवा मेडल से भी नवाजा जा चुका है. अब तक वह भारत और नेपाल की 18 चोटियों पर पर्वतारोहण कर चुके हैं और 2001 में भारतीय सेना के पहले दल के सफल एवरेस्ट सबमिट करने का खिताब भी उनके ही नाम है. वह अपनी तनख्वाह से राज्य के बेरोजगार युवाओं के लिए भारतीय सेना में शामिल होने के उद्देश्य से यूथ फाउंडेशन के कैंप चलाते हैं।

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