पौड़ी गढ़वाल के नेताओ ने ही पौड़ी गढ़वाल को छला!

भगवान सिंह संवाददाता चौबटाखाल
क्या नही दिया पूरे पौड़ी गढ़वाल ने? पौड़ी गढ़वाल ने ही राज्य को लगातार मुख्यमंत्री दिए और आज भी पौड़ी वाले ही मुख्यमंत्री है ,पौड़ी गढ़वाल ने कर्नल जर्नल दिए, पौड़ी गढ़वाल के जवान आज भी देश की रक्षा के शहीद हो रहे है ,ओर ये वही पौड़ी गढ़वाल है जिसका नाम अदब के साथ लिया जाता है क्योकि यही से निकले है हमारी देश की सुरक्षा के सलाहाकार अजीत डोभाल ओर सेना अध्यक्ष जरनल विपिन रावत पर सोचो क्या मिला इस पौड़ी गढ़वाल को अगर कुमाऊँ गढ़वाल से तुलना करु तो विकास के लिहाज से आज भी पौड़ी गढ़वाल बहुत पीछे है सतपाल महाराज भी पौड़ी वाले है ,जरनल खडूडी, रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेन्द्र रावत , ये वो नाम है जिन उम्मीद थी पूरे पौड़ी गढ़वाल को ओर कुछ पर आज भी है पर जब ये कुछ कर ही नही पा रहे है तो कोई क्या बोले फिर कहुगा क्यो कुमाऊँ गढ़वाल से कम विकास पूरे पौड़ी गढ़वाल का हो रहा है क्या हमारे नेता कुछ करना ही नही चाहते या आज पूरा पौड़ी गढ़वाल यही बोले कि हमहे तो अपनो ने ही लुटा गेरो मे कहा दम था यहा पर लेखक पौड़ी ओर कुमाऊँ गढ़वाल का जिक्र इसलिए कर रहा है कि राज्य के विकास मे गढ़वाल ओर कुमाऊँ का बराबर का योगदान हर काम मे रहता है लेकिन फिर भी कुमाऊँ गढ़वाल हर मामले में आगे निकल जाता है और पौड़ी मूलभूत सुविधाओं के लिए ही रोता रहता है।       आज बोलता उत्तराखण्ड आपको एक उदाहरण देगा ख़बर जनपद पौडीं गढवाल चौबट्टाखाल विधान सभा से है जो सतपाल महाराज जी विधानसभा है ओर मामला है बीरौंखाल का आपको जानकर ताजुब होगा कि बयालीस वर्ष से लंबित नौलापुर केदारगली नागरजाखाल मोटर मार्ग आज तक भी पत्थर के ऊपर ही सीमित है।     यह एक ऐसा रोड है जिसकी नींव स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष स्व श्री हरि दत्त शर्मा जी ने सन् 1970 के दशक में एक तहसील को दूसरी तहसील को मिलान करने के लिए रखी थी। इस रोड ने तहसील लैंसडाउन को तहसील थलीसैंण तक जोड़ना था। जिसका वाया रूट रिखणीखाल दुनाव बीरोंखाल केदारगली कालिका जोगीमढी ढौंढ गबनी होतो हुए थलीसैंण मिलना था। सन् 1976 में बीरोंखाल की सीमा तक इस रोड की खुदाई हो चुकी थी और उसके बाद बीरोंखाल से केदारगली होते हुए कालिंका तक दुफुटी बना दी गई थी।     बीरोंखाल से केदारगली तक टैंडर लग चुके थे तथा एक जौब पर कटिंग आरंभ हो चुकी थी परंतु कुछ विकास विरोधी तत्वौं ने इस रोड को न बीरोंखाल में मिलने दिया न इससे आगे केदारगली की ओर जाने दिया। रोड की खुदाई करने वाले मजदूरों के हथियार छीन लिए, फलस्वरूप रोड का काम बन्द हो गया।
सन् 1976 से सन् 1995 तक इस रोड पर काम विल्कुल बन्द रहा। इस रोड को बीरोंखाल से आगे नहीं बढ़ने दिया जा रहा था। सन् 1995 के बाद स्थानीय निवासी ग्राम खेतू से डॉ बिहारीलाल जलन्धरी व केदारगली के श्री दलवीर सिंह रावत ने इस रोड पर काम करना आरम्भ किया। इस रोड पर एक अन्य मोटर मार्ग जो किनगोडीखाल से ललितपुर होते हुए कालिंका में इस रोड के साथ मिलना था उस रोड को बीरोंखाल मिलाने की कोशिश आरम्भ की गई।कई बैठकों के बाद ग्राम सभा नाकुरी, ग्राम सभा रगडीगाड तथा ग्राम सभा डुमैला ने अपने अनापत्ति प्रमाण पत्र दिए तथा इस मार्ग को नागरजाखाल में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 121 पर मिलाने की स्वीकृति के लिए सर्वे सम्पन्न हुआ। 
सन् 2000 में कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के तत्तकालीन विधायक डॉ रमेश पोखरियाल निशंक को बन्दरकोटू से केदारगली नागरजाखाल पोलीटेक्निक पर मिलान के लिए बीस किलोमीटर रोड का प्रस्ताव दिया गया। अलग उत्तराखण्ड राज्य स्थापना के बाद बीरोंखाल विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती अमृता रावत व सांसद मेजर जनरल भुवनचंद खंडूड़ी को भी प्रस्ताव दिये गये। बड़ी मेहनत मशक्कत करने के बाद बन्दरकोटू से नौलापुर तक रोड स्वीकृत हुई व रोड की खुदाई भी सम्पन्न हुई। सन् 2006 में इस रोड का शिलान्यास का पत्थर श्रीमती अमृता रावत व श्री सतपाल महाराज जी के हाथों बड़ी धूमधाम से बीरोंखाल में स्थापित कर दिया गया।
सन् 2006 और आज 2018 यानी अब तक हाल वही नही बन पाई ये सड़क आज तक अगर बन जाती तो 15 गाँव वालो को राहत मिलती पर कोन बनाएग ओर क्यो क्योकि काम छोटा है और ओर छोटे कामो मे माल जो नही मिलता ना हा अगर बन जाती तो 15 गाँव वालों की दुवा जरूर मिलती उनको जो ये सड़क बनाते ।                 
इस बीरोंखाल ब्लाक के क्षेत्र से उत्तराखण्ड के दो मुख्यमंत्री बन चुके हैं और तीसरे की दावेदारी बदस्तूर जारी है। पर इनकी फिक्र किसी को नही, आखिर क्या कारण है कि 1976 से सन् 2018 तक बयालीस वर्षों तक भी यह रोड केवल पत्थरों तक ही सीमित है। इसका जवाब क्या होगा किसी नेता के पास ?? अब आप समझ गए होंगे कि क्यो हम कहते है कि पूरे पौड़ी गढ़वाल को पौड़ी के नेताओ ने ही छला है वरना आज भी लोग एक सड़क के लिए खून के आंसू ना रोते ओर कही ऐसे उदाहरण है जिनको बोलता उत्तराखंड़ समय समय पर रखेगा की ये है पूरे पौड़ी की जनता का दर्द तकलीफ बहराल इस बार इस गाँव तक सड़क पहुचाने का शोभाग्य सतपाल महाराज जी को फिर से मिला है               अब देखते है ज़िस तरह से सतपाल महाराज जी कुमाऊँ गढ़वाल मैं पर्यटन के विकास के लिए केंद्र से 65 करोड़ लाये है ठीक उसी प्रकार पूरे पौड़ी गढ़वाल के पर्यटन विकास से लेकर खुद की विधानसभा की जनता का दर्द कब तक कम करते है

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