पौड़ी गढ़वाल के इस शहीद को आज तक भी नही मिला इंसाफ ! ओर निकल गए 18 साल !

राज्य कि सरकार कितने भी दावे ओर वादे कर ले की वो शहीदों के परिवार का ध्यान रखेंगे उनकी शहादत के बाद उनके परिवार के दुख और सुख मे साथ खड़े रहेगे पर जनाब ये सब होता नही शहीद की अंतिम यात्रा में जन सैलाब तो उमडता है पर उसके बाद कोई ना उनके परिवार की सुध लेता ओर ना उस शहीद की याद म उसके गांव मे कुछ यादगार के तोर पर बनाता है क्या जनप्रतिनिधी, ग्राम प्रधान, जिला पंचायत और ब्लॉक प्रमुख. ओर क्या मंन्त्री से लेकर सांसद तक सभी ने अपनी आंखें बद कर ली है आज आपको बोलता उत्तराखण्ड उस अमर शहीद की बात आपके आगे रख रहा है जिसे इंसाफ आज तक  नही मिला है जो साल 2000 से पहले शहीद ही गए थे यानी राज्य गठन से पहले जी हां हम बात कर रहे है।                             अमर शहीद कैलाश चन्द देवरानी की पुत्र स्व० श्री केशवानन्द देवरानी जी (बैंड मास्टर PAC), ग्राम बमणगाँव, पानीसेन, पट्टी पैनो, रिखणीखाल ब्लॉक के वीर पुत्र की जिसकी याद में एक शहीद स्मारक या स्मृति द्वार 18 साल बाद भी नही बन पाया समय समय पर शहीद के पूरे परिवार ओर गाँव वालों ने क्षेत्र के ग्राम प्रधान से लेकर जिला पंचायत, ब्लॉक प्रमुख, BDO, MLA और MP तक इस बात को पहुँचाया की गाँव के लाल की याद मे अमर शहीद जवान के नाम से एक शहीद स्मारक या स्मृति द्वारा बनवा दीजिये पर ये हो ना सका जबकि असम राइफल्स ने भी 2012 में गढ़वाल राइफल्स के HQ लैंसडाउन से तत्कालीन MP-MLA को भी पत्र भेजे थे और 3 साल तक जवाब का इंतजार किया मगर हमारे MP-MLA ने न तो स्वयं कभी कोई पहल की और न ही असम राइफल्स से आये पत्र का कोई जवाब दिया।          न कभी शहीद के परिजनों से मिलने की कोशिश की ओर आज भी जब शहीद के परिजनों के बराबर पूछने पर हर बार यही जवाब मिलता रहा है कि हाँ जल्द ही बनवाते हैं! आपको ये भी बता दूं कि समय समय की सरकारों के आगे गिड़गढाने के बाद भी कुछ ना हुवा क्योकि
सरकार और जनप्रतिनिधियों के असंवेदनशील रवये के कारण भले ही बमणगाँव में शहीद की स्मृति में कुछ न बना हो मगर उत्तराखण्ड से हज़ारों किलोमीटर दूर असम में असम राइफल्स ने अपने इस वीर सिपाही की याद में अपने शहीद स्मारक स्थल पर अमर शहीद कैलाश चंद देवरानी जी के साथ उनके माता-पिता व उनकी जन्मभूमि बमणगाँव, रिखणीखाल, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड का नाम भी लिख रखा है ओर एक हम है जिसको सेना प्रदेश कहा जाता है वीरों का प्रदेश कहा जाता है हम कुछ ना कर सके समय समय के
जनप्रतिनिधियों के झूठे आश्वासनों पर ही विश्वास करते -करते शहीद जवान के माता-पिता भी अब इस दुनिया में नही रहे जरा सोचिए क्या गुजरी होगी उन माता पिता पर जिनको जूठे आस्वासन हमारे नेताओं ने दिए अब बोलता है उत्तराखंड की धिकार है उन राजनेताओ पर जिन्होंने शहीद के परिवार का अपमान किया और हम कोसते है उन राजनेताओ को जो शहीद जवान की याद मे एक स्मृति द्वारा तक ना बनवा सके राज्य गठन से लेकर आज तक क्या क्या हुवा ओर क्या नही ये सब जानते है पर स्याद ही बहुत से लोग ये जानते होंगे कि आज भी कही शहीद जवानों का परिवार लाचार सिस्टम की मार झेल रहा है जिससे उनको राहत दिलाने वाला कोई नही फिलहाल राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत जी से पूरे गाँव वाले अनुरोध कर रहे है कि वो वहां शहीद के नाम पर कुछ यादगार के तौर पर बनाये साथ ही विधायक दलीप रावत से भी कह रहे है कि बहुत देर हो चुकी है अब आप जाग जाइये.                                                       संतोष ध्यानी  जी की कलम से …..

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