प्रसाद योजना से महिलाओ को मिल रहा है रोजगार

  • रिपोर्ट कुलदीप राणा /रुद्रप्रयाग
    : प्रसाद योजना पहाड़ों में स्वावलम्ब की तरफ बढ़ने का अवसर प्रदान करने जा रही है खासतौर पर महिला शक्तिकरण में यह मील का पत्थर साबित होनी जा रही है। जबकि स्थानीय उत्पादों को एक बाजार उपलब्ध हो रहा है तो किसानों को फसलों के अच्छे दाम मिलने आरम्भ हो जायेगे जी हां
    केदारनाथ मंदिर समेत उत्तराखण्ड के 6 सौ से अधिक मंदिरों में स्थानीय उत्पादों से बना प्रसाद ही अब देश-विदेश के श्रद्धालुओं को दिया जायेगा। खासतौर पर इसमें चैलाई के लड्डू शामिल किए जा रहे हैं। अब तक 40 हजार पैकेट तैयार हो चुके हैं और महिलाये लगातार इस कार्य में जुटी हुई हैं।  29 अप्रैल से आरम्भ होने जा रही केदारनाथ यात्रा से इस प्रसाद का शुभारम्भ किया जायेगा। एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना समेत जनपद की विभिन्न महिलाओं के समूहों को यह जिम्मेदारी दी गई है।
    वही महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रसाद का कार्य मिलने से वे काफी उत्साहित हैं। उनका साफ तौर पर कहना है कि जहां पहले चोलाई बहुत कम दाम पर बिकता था या उसे नमक के बदले देते थे किन्तु आज उसे अच्छी कीमत मिलने लगी है। इससे किसानों को काफी फायदा होगा और अब इसके पैदावार में बढ़ोत्तरी भी होगी। जबकि इसके लड्डू बनाने के लिए महिलाओं के ही समूह को जिम्मेदारी देकर महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलम्बी बनाने की पहल है जो महिलाशक्तिकरण में मील का पत्थर साबित होगी।
    अगर प्रसाद योजना अपने उद्देश्यों को पाने में सफल रहती है तो इस योजना से पहाड़ में रोजगार की दिशा में एक क्रान्तिकारी बदलाव आ सकता है। बंजर का रूप् धारण कर चुकी खेती पुर्नजीर्वित होगी। जिससे किसानों को फायदा तो मिलेगा ही देश विदेश तक पहाड़ के उत्पादों की मिठास जायेगी। बहराल पहल अछी हैं स्वागत होना चाइए पर ये सिर्फ एक पहल हैं इसी प्रकार अभी डबल इज़न की सरकार को हज़ारो पहल करनी होगी तब जाकर हम कह सकेंगे कि अब पहाड़ की नारी कि आर्थिक स्थिति ठीक हो रही हैं

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