पहाड़ की उम्मीदों का कत्ल करने वाला दल !अब फिर कैसे पहाड़ की जनता का दिल जीते?

बोलता है उत्तराखण्ड कि राज्य के पहाड़ी जिलो के हालत के लिए क्या आज आप उत्तराखण्ड क्रांति दल को जिमेदार मानते हो या नही क्योकि इस दल के नेता सत्ता     मे आते ही बिखर गए पार्टी तो फिर इनकी बला से ….. लगातार ये दल टूटता रहा ,बिगड़ता रहा , ओर दल कम बदनाम ज्यादा हो गया क्योकि यहा स्वार्थ की राजनीति ने जन्म जो ले लिया था वरना इस दल पर विस्वास करने वाला पहाड़ अब क्यो आंखे फेरता ये दल कही गुटों में ,धड़ो मैं अलग थलग पढ़ गया     
आज भले ही उत्तराखंड क्रांति दल अपनी राजनीति की जमीन को बचाने के लिए सड़क पर हो पर दल के इन हालतों के लिये इनके नेता खुद जिमेदार है आज प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर इस दल के कार्यकर्ता दून अस्पताल तक डंडी-कंडी मार्च करते दिखे प्रदेश सरकार के साथ स्वास्थ्य मंत्री के विरोध में जोरदार नारेबाजी कर रहे थे युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय महामंत्री सुशील कुमार और महानगर अध्यक्ष संजय क्षेत्री के नेतृत्व में कार्यकर्ता केंद्रीय कार्यालय में एकत्रित होकर पर्वतीय क्षेत्रों में मरीजों को अस्पताल ले जाने के तरीके का प्रदर्शन करते हुए डंडी कंडी तैयार की गई तथा उसमें एक प्रतीकात्मक मरीज बिठाया गया। इसके बाद सभी कार्यकर्ता डंडी कंडी के साथ पदयात्रा करते हुए दून अस्पताल पहुंचे तथा दून अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के माध्यम से महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन प्रेषित किया ज्ञापन में कहा गया कि स्वास्थ्य जीवन का आधार है और प्रदेश की प्रत्येक जन मानुष तक स्वास्थ सेवाओं को पहुँचाना सरकार का दायित्व भी है और नैतिक जिम्मेदारी भी। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश निर्माण के बाद से अब तक प्रदेश सरकारों ने तक स्वास्थ को दुरुस्त करने के बजाय केवल चुनावी मुद्दा बना कर रख दिया। 
सत्ता धारी सरकार पलायन को रोकने पर आयोग बनाकर खाना पूर्ति करती दिखाई देती है। पलायन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार लगभग ७०० गांव खाली हो चुके है , यह संख्या वास्तव में कई हजार के आसपास है।पलायन का मुख्य कारण प्रदेश में दम तोड़ती स्वास्थ सेवाएं , लचर शिक्षा तथा रोज़गार , सड़क तथा पानी की कमी है किन्तु सरकार केवल कारण जानने तक सीमित है।समस्याओं के उचित समाधान निकालने में प्रचंड बहुमत की सरकार अब तक फेल रही है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भर्ती के नाम पर भी हाल में 19 स्वास्थ्य अधिकारियों की अवैध नियुक्ति का भ्रष्टाचार सभी के समक्ष आया।
पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों के अभाव में उत्तराखंड की आपातकालीन एम्बुलेंस डंडी कंडी के द्वारा मौसम की मार को झेलते हुए मरीजों को 4 से 5 घंटे पैदल लेकर हॉस्पिटल पहुँचते हैं ,अगर मरीज की हालत ज्यादा ख़राब हैं तो रास्ते में दम तोड़ देते है और यदि समय सही रहे तो ही हॉस्पिटल तक पहुंच पाते हैं। लेेकिन जीवन का संघर्ष वहां भी समाप्त नहीं होता ,वहां डॉक्टरों , दवाइयों और जीवन रक्षक मशीनों के ना होने के कारण हालत बेकार है।
मसूरी जिसको पर्यटन का आधार बनाकर प्रदेश में पर्यटन व्यस्थाओं का खाका खींचने की तैयारी है , वहां भी12 बेड के हॉस्पिटल के सहारे स्वास्थ व्यस्थाएं हांफ रहीं हैं ।
कुछ समय पहले घटित टिहरी की घटना जहाँ 108 के देर से पहुँचने के कारण सड़क पर प्रसव की घटना हो या फिर उत्तरकाशी में साधन ना मिल पाने के कारण त्यूणी के निकट पूल पर प्रसव की घटना,जहाँ महिला को 10 किलोमीटर पैदल लेकर जाने की लिए बाध्य होना पड़ा था,आज भी प्रत्येक उत्तराखंडी को विकास के नाम पर शर्मसार करती हैं। ये किस्सा अदृश्य विकास है जो केवल कागजो तक सीमित है और धरातल पर कहीं दिखाई नहीं देता।
अस्थाई राजधानी देहरादून जहाँ समस्त जनप्रति निधिओं का निवास है ,वहां का दून हॉस्पिटल भी डॉक्टर ,दवाइयों एवं टेक्निकल स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। जीवन रक्षक मशीन पुरानी होने के कारण काम करना बंद कर चुकी है।महिला वार्ड में आधे से ज्यादा वार्मर खराब है तथा तीन वेंटिलेटर में से २ बंद पड़े हैं। हाल में स्ट्रेचर की कमी के चलते एक व्यक्ति के द्वारा अपने भाई के शव को कन्धों पर उठाकर लेकर जाने की अमानवीय घटना सरकार को आईना दिखाने के लिए काफी है। हर साल चिकित्सा शुल्क में १०% की वृद्धि तो होती है ,पर सेवाओं में सुधार केवल मजाक बन कर रह गया है।
इस पत्र के माध्यम से दल के युवा नेताओ ने अपील करी कि जीवन हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। बिना सशक्त स्वास्थ सेवाओं के ,स्वस्थ समाज की कल्पना करना अतिश्योक्ति मात्र है।
इससे पहले भी कई बार पत्र एवं संवाद के माध्यम से सरकार को चेताने का प्रयत्न किया । लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। क्या प्रदेश के युवाओं को अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना ही अंतिम विकल्प शेष बचा है?
क्या सरकार इतनी संवाद तथा संवेदना हीन हो चुकी है?
इस पत्र के माध्यम से आपसे आग्रह है की इन अव्यस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए प्रदेश हित में शासन को आवश्यक निर्देश जारी करने की कृपा करें। प्रदेश की जनता एवं युवा सदैव आपके आभारी रहेंगें। प्रदर्शन करने वालों मे युवा महामंत्री सुशील कुमार महानगर अध्यक्ष संजय क्षेत्री लताफत हुसैन राजेंद्र प्रधान सौरभ आहूजा केंद्र पाल तोपवाल राजेंद्र बिष्ट सुरेंद्र बुटोला भगत रावत प्रमोद डोभाल आशीष बिजल्वाण धर्मेंद्र पटेल ललित कुमार मनोज ममगई आशीष बडोनी, तुषार घिल्डियाल श्रीमती माला थापा अंजना थापा शबनम रुकमणी पाल भारती अधिकारी नाजमा राजेश्वरी रावत ज्योति त्रिपाठी सीमा कलूडा आदि शामिल रहे। अब बोलता है उत्तराखण्ड की राज्य के पहाड़ी जिलो मे स्वस्थ्य सेवाओ के जो बदतर हालात है वो कोई एक सरकार की देन नही बल्कि पिछले निकल गए 12 सालो की आने और जाने वाली सरकारों के कारनामो की वजह से ये हाल पहाड़ के है और इन हालतों के समय समय पर सरकार में भागेदारी करने वाली उत्तराखण्ड क्रांति दल के वो सभी नेता भी जिमेदार है जिन्होंने अपने समय मे सिर्फ सत्ता की चासनी चाटने के सिवा कुछ ना किया इसिलए हम तो यही कहेंगे कि सत्ता मै आते ही हर कोई जनता के दर्द को भूल जाता है और अगर आज एक बार फिर राज्य का अपना ये पहाड़ी दल जनता को विस्वास दिला दे कि हम अपनी गलतियों से सबक ले चुके है तो एक दिन जनता इन पर फिर से विस्वास करे पर ये सब हो तब जब ये दल एकजुटता के सही मायनो को समझे ओर अब पहाड़ की आवज़ को उठाकर सही जगह तक पहुचाये क्योकि इस बात से इनकार नही किया जा सकता कि इस दल के कुछ नेताओं ने पहाड़ को सिर्फ दर्द देने का काम किया ओर यही वजह है कि आज इस दल पर कोई विस्वास जल्द से करने को तैयार नही

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