पहाड़ की नारी के पहाड़ जैसे दर्द को क्या समझ पायेगी ये सरकारे !

 

बोलता उत्तराखंड़ ( जो कहूंगा सच कहूंगा)

उत्तराखंड़ राज्य के पहाड़ी जिलो मे स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल है ओर ये लगातार पिछले 10 सालों से बढ़ती ही जा रही है समय समय पर उत्तराखंड की सरकारो ने चाहे लांख दावे किए हो पर हालात ना के बराबर सुलझे है लगातार पहाड़ से ख़बर लगातार आती है कि गर्भ वती महिला को तमाम परेशानियों का अकसर सामना करना पड़ता है कभी पूल पर नवजात को जन्म देने की ख़बर । कभी अस्पताल पर लापरवाही का आरोप ओर नवजात की मौत की ख़बर , कभी सड़क ना होने के कारण समय पर अस्पताल न पहुचने के कारण गर्भवती की हालत बहुत खराब या दम तोड़ तक देने की ख़बर । सुनकर ही दुःख होता है लेकिन सोचो जो ये सब कुछ शह रहे है उन पर क्या गुजरती होगी । ये वही मात्रशक्ति है जो सरकारे बनाती है और इन्ही मात्र शक़्ति ने पहाड़ को जिंदा रखा है पर स्याद इनकी सुध लेने वाला कोई नही क्योंकि यह सिस्टम जो लाचार है व्यवस्था करने वाले सिर्फ कहते है कर नही पाते । आपको बता दू की
जानकारी के अनुसार,उत्तरकाशी के एक दूरस्थ गांव से ख़बर आई है जहां गुरुवार को एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान दर्द में कराहते हुए लगभग 6 किलोमीटर जोखिम भरा पैदल रास्ता पार करना पड़ा। उसके बाद महिला को सड़क पर एम्बुलेंस की सेवा उपलब्ध हुई। एंबुलेंस मिलने पर महिला को नौगांव के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इसके बाद अस्पताल में महिला का सुरक्षित प्रसव करवाया गया। महिला और बच्चे के सुरक्षित होने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली। 
आपको बता दे कि ये बात सिर्फ आजकल की ही नही है क्योकि आजकल सब जानते है कि बरसात होने पर सड़के टूट जाती है रास्ते खराब हो जाते है तो आजकल जायदा परेशानी हो रही है । दरसल मे बात ये है कि बहुत से दुर्गम क्षेत्रो मे आज तक भी गाँव गाँव तक सड़क नही है या गाँव के नज़दीक सड़क नही है , ओर रास्ते ज्यादा खराब है जहाँ के नेता इस ओर ध्यान ही नही देते और जो देते है वो अपनी कमीशन के चलते निर्माण उस प्रकार कराते है कि पहली या दूसरी बरसात के बाद उनके लाखो रकमो का काम पानी मे बहने लगता है जिस पर सरकार को ध्यान देना चाइये । दूसरी बात हम जानते है कि पूरे पहाड़ो मे आप जल्द महिला डॉक्टर नही तैनात कर सकते है पर ये हम जानते है कि सरकार चाहे तो वो सब कुछ कर सकती है जिससे पहाड़ की मात्रशक्ति को राहत मिले मुख्यमंत्री खुद स्वास्थ्य मंत्री है लिहाज़ा उम्मीद करते है कोई बेहतर रास्ता या विकल्प वो तालशेगे

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