पहाड़ के जंगलो मे आग ,वन संपदा जल कर खाक, आदमी की भी चली गयी जान

उत्तराखंड मैं पहाड़ के जंगल लगातार जल र्है ओर ये कोई पहली बार नही हो रहा है हर साल दावाग्नि भयंकर रूप लेती जा रही है। जो हमारी जैविक सम्पदा ओर पशुपक्षियों के लिए तो एक कहर बनकर उभर ही रही है ओर अब इससे मानव जीवन भी खतरे में पड़ता जा रहा है।
हर वर्ष प्रदेश में इस आग को बुझाने में करोड़ों रुपयों को पानी की तरह बहाया जाता है पर नतीजा कुछ नही निकलता इसके अलावा अनेक ग्रामीण भी अपनी जान की आहुति देते जा रहे है। सूबे के मुखिया वन महकमे से लेकर जिले के जिला अधिकारी को भी दिशा निर्देश दे चुके है पर हालात ठाक के तीन पात है ग्रमीण आग भुझाने का प्रयास कर रहे है और इसी कारण अपनी जान भी गवा रहे है बात बागेश्वर
जनपद के जनोटी पालड़ी का है जहाँ वन पंचायात में लगी आग को बुझाने में एक ग्रामीण की जान चली गई है    
जानकारी के अनुसार वनखण्ड बन पंचायत में लगी आग को बुझाने गए बिसन सिंह जनोटी पुत्र देव सिंह जनोटी उम्र 52 वर्ष जब जंगल मे आग बुझा रहे थे तो उनका पैर फिसल जाने से वे एक पहाड़ी से गहरी खाई में गिर गए।
ग्रामवासियों द्वारा उन्हें शीघ्र जिला अस्पताल बागेश्वर। लाया गया लेकिन उनकी हालत अत्यंत खराब होने की वजह से डॉक्टरों ने उन्हें हल्द्वानी रेफर कर दिया।
108 से हल्द्वानी ले जाते समय खैरना के पास उन्होंने दम तोड़ दिया।
सूत्रों ने बताया कि उनके हाथ पैर व सिर में गहरी चोट थी जिस वजह से उनका अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था
क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने इस पर गहरा दुख प्रकट करते हुए उनके परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
प्रभागीय बनाधिकारी आर के सिंह से जब इस संवाददाता ने इस सम्बंध में सम्पर्क किया तो उन्होंने बताया कि अभी तक उन्हें इस बारे में कोई सूचना प्राप्त नही हो पाई है।
मुआवजे के बारे में पूछे जाने पर डी एफ ओ ने बताया कि वन विभाग में इस प्रकार के मुआवजे या उनके आसिरतो को नॉकरी दिए जाने का कोई प्रावधान नही है। विभाग केवल अनुकम्पा हेतू ही लिख सकता है।              अब बोलता है उत्तराखंड कि है सरकार कब तक जंगल जलते रहेगे? कब तक वन महकमा महज खाना पूर्ति करता रहेगा? कब तक वन संपदा को नुकसान होता रहेगा ,कब तक गांव के लोगो को जगलो से दूर रखा जाएगा? कब तक पेरुल कि बिजली बनेगी? कब तक सिर्फ बोलने के इलावा धरातल पर काम किया जयेगा? कब तक सिर्फ आस्वशन पर काम चेलेगा ,कब तक राज्य को ग्रीन बोन मिलेगा , कब तक ओर जाने जाती रहेगी ,कब तक प्रकतिक संतुलन बिगड़ता रहेगा, सरकार जवाब तो आपको ही देना है पर जो लोग जान कर कर जंगल मे आग लगा रहे है तो उनको भी अब ये सोचना होगा कि वो लोग वो पाप कर रहे हैं जिसका हल पूजा पाठ से भी ना निकलेगा ओर उन लोगो की भी बात कर रहा जो गाँव की सड़कों के जंगल की बात हूँ ये पहाड़ मैं सड़क किनारे जगलो की जहा कोई भी आने जाने वाला व्यक्ति माचिस की तीली को जालता है बीड़ी या सिगरेट पीने के लिए तो वो तकाल माचिस को भुझा दे ,पीने के बाद बीड़ी या सिगरेट को भी क्योंकि मेने देखा है इस गलती के कारण भी जंगल जल जाते है और फिर हम सिर्फ तामशा देखने के सिवा कुछ नही करते ये पहाड़ो के जंगल मे लगने वाली आग से सिर्फ जंगल ही नही जलते बल्कि जंगली जानवर ,पक्षी ,पशु , कीड़े ,मकोडे, चिड़िया ,ओर भी कही प्रजातियो का जल कर खाक होने से प्रकति का संतुलन बिगड़ जाता है। और जब संतुलन बिडता है तो सबसे पहले मानव को ही सब कुछ भुगतना पड़ता है लिहाज़ा चेत जाओ सरकार और आप भी समझो अपना कर्तव्य बोलता उत्तराखंड आप से पार्थना करता है कि बचाओ अपने जंगल ,जो आप से हो सके वो आप करो बाकी सरकार को इन्फॉर्म करो

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