पंचायत राज एक्ट में संशोधन की गुंजाइश नहीं

उत्तराखंड सरकार पंचायत राज एक्ट में दो बच्चों और शैक्षिक योग्यता की व्यवस्था में संशोधन की गुंजाइश को नहीं देखती है आजकल विपक्ष भले ही इससे जुड़े कही मुद्दों पर हल्ला मचा रहा हो। पर त्रिवेन्द्र सरकार हर बार पूरी ताकत से जहा मौका मिलता है वहा सामने रख देती है मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पहले से ही इन संशोधनों को पंचायतों में बेहतर व्यवस्था के लिए जरूरी बता रहे है तो पंचायत राज मंत्री अरविंद पांडेय ने साफ कहा कि इन दो अहम व्यवस्था पर अध्यादेश की कोई सूरत ही नहीं है। हम सभी जानते है कि पंचायत राज एक्ट 2016 में सरकार ने इस बार दो बच्चों की शर्त और विभिन्न पदों के लिए शैक्षिक योग्यता को लागू कर दिया है। इस बार पंचायत चुनाव भी सरकार नई व्यवस्था के तहत ही कराने जा रही है।
तो उधर पंचायत संगठन दो बच्चों की शर्त लागू करते हुए 300 दिन का ग्रेस पीरियड न देने पर एतराज जता रहे हैं। तो शैक्षिक योग्यता पर ओबीसी के लिए साफ साफ व्यवस्था न करने पर भी वह सवाल खड़ा कर रहै है ।
आपको बता दे कि जिस समय यह संशोधन हुआ, तब सरकार ने इशारा किया था कि वह जरूरी हुआ तो अध्यादेश के जरिये खामियों को दूर करेगी। मगर अब सरकार दो टूक कह रही है कि इन मामलों में अध्यादेश लाने की कोई गुंजाइश नहीं है।
वही आपको बता दे कि पंचायती राज संशोधन एक्ट 2019 में त्रुटिवश एक जगह पर सहकारिता कमेटियों के सदस्यों के चुनाव न लड़ने का जिक्र किया है, जबकि सरकार का आशय सहकारिता कमेटी के मैनेजमेंट बोर्ड के पदाधिकारियों से हैं। सरकार पंचायत चुनाव में उनके लड़ने पर पाबंदी चाहती है। लेकिन अब एक त्रुटि की वजह से सहकारिता समितियों से किसी भी रूप में जुडे़ सभी लोग चुनाव के अयोग्य हो रहे हैं। ख़बर है कि इसमें संशोधन किया जाना तय माना जा रहा है ! इसलिए संशोधन की बात आगे बढ़ती है, तो फिर अध्यादेश लाना ही पडे़गा।
वही मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत कहते है कि कांग्रेस को पंचायत के आरक्षण से कोई मतलब नहीं है। वह खुद उससे बाहर हो रहे हैं। जनसंख्या नियंत्रण एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है और इंदिरा जी के समय शुरू हुआ था। आज अगर हमने उसके लिए ठोस पहल की है और अगर जनप्रतिनिधि इसका पालन न करें, तो जनता भी उनका सहयोग नहीं करेगी। अगर हम जनसंख्या नियंत्रण करते हैं, तो उन्हें उसमें सहयोग करना चाहिए।
पंचायती राज मंत्री अरविंद पांडेय, कहते है कि कांग्रेस विपक्ष में है, इसलिए इस तरह की बातें कर रही है। अन्यथा, दो बच्चों और शैक्षिक योग्यता की व्यवस्था पंचायतों में बेहतरीन माहौल बनाने के लिहाज से ऐतिहासिक कदम है। इस पर अध्यादेश लाकर संशोधन की कोई सूरत नहीं है। सहकारिता सदस्यों के चुनाव लड़ने के संबंध में अभी कुछ तय नहीं है। हालांकि हम सोचते हैं कि सहकारिता सदस्य होने मात्र से चुनाव के अयोग्य किसी को नहीं किया जाना चाहिए।
बहराल त्रिवेन्द्र सरकार अपनी बात और इरादे साफ कर चुकी है।अब देखते है आगे आगे होता है क्या क्या।



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