पहाड़ी से गिरी मात्रशक्ति एक कि मौत एक घायल

दुःख दर्द के सिवा पहाड़ वालो किस्मत मे कुछ नही लिखा है जन्होंने इस पहाड़ को बचाये रखा है वही मात्रशक्ति आये दिन अपनी जान गांव रही है आपको बता दे कि भारत के अंतिम सीमावर्ती गांव माणा की दो महिलाएं बीते दिनों लापता हो गयी थी. गांव की ये दोनों ही महिलाएं 30 अगस्त को जंगल में घास लेने के लिये गई थी, जो की देर रात तक घर नहीं लौटी जब ये महिलाएं जब घर नहीं पहुंची तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन वे उन तक नहीं पहुंच पाये. जिसके बाद परिजनों ने कोतवाली बदरीनाथ में भी महिलाओं के घर ना पहुंचने की सूचना दी.थी 

आपको बता दे कि परिजनों ने पुलिस को बताया कि आनंदी देवी पत्नी हयात सिंह, उम्र 55 वर्ष और शिवि देवी पत्नी पुरण सिंह, उम्र 66 वर्ष बीते दो दिनों से लापता हैं. दोनों महिलाएं माणा गांव के ऊपर जंगल में घास लेने गई थी, जो वापस नहीं लौटी. जिसके बाद कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार जोशी ने एसआई शशि भूषण जोशी और एसआई सुमित कुमार के नेतृत्व में एसडीआरएफ व पुलिस बल के साथ टीमों को जंगल में खोजबीन अभियान में लगा दिया था

फिर तलाशी अभियान ने बृहस्पतिवार की रात को रेस्क्यू टीम ने आनंदी देवी को जंगल से सकुशल बरामद कर लिया. आनंदी देवी ने बताया की दोनों का पैर फिसल गया था और वे खाई में गिर गई थी. दूसरी महिला शिवी देवी भी आनंदी के साथ ही खाई में गिरी थी लेकिन, अंधेरा होने के कारण पुलिस उन तक नहीं पहुंच पायी.

फिर बीते शुक्रवार की सुबह होते ही खोजबीन अभियान फिर से शुरू किया गया. जिस जगह महिलाएं खाई में गिरी थी वहीं से थोड़ी दूरी पर शिवी देवी मृत हालत में मिली. शिवी देवी के शव को भी बदरीनाथ कोतवाली पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल गोपेश्वर भेज दिया है। वहीं, घायल महिला आनन्दी देवी को भी उपचार के लिए बदरीनाथ लाया गया. तो देखा एक महिला ने दम तोड़ दिया तो दूसरी घयाल है हिमालय को बचाने वाली पलायान को रोकने वाली ये मात्रशक्ति अपने दुख दर्द को भूल कर पहाड़ को ज़िंदा रखने मे लगी रहती है। बोलता उत्तराखंड़ को इन मात्रशक्ति पर नाज़ है और वो सरकार से अपील करता है कि राज्य की सरकार कम से कम मूलभुत सुविधाओं को इन तक पहुचा दे जिसमे सबसे बडी बात स्वास्थ्य सेवाओं की है ।

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