पीएम सर योग ओर विकास अपनी जगह ठीक पर सवाल यही की ये शहादते कब तक ?

बोलत है उत्तराखंड कि भारत के होम मिनिस्टर मंत्री राजनाथ सिंह जी जून माह पूरे उत्तराखंड पर भारी पड़ रहा है। उत्तराखंड 4 लाल पी पिछले आठ दिनों मैं उग्रवादियों और नक्सिलियों से लड़ते हुए शहीद हो गए। हम जानते है कि देवभूमि के लिए शहादत का इतिहास बहुत पुराना है। अगर बात करे प्रथम द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर देश की स्वतंत्रता के बाद 1948 के पहले पाक युद्ध से लेकर 1999 के कारगिल युद्ध और देश के आंतरिक तथा सीमा पर होने वाली शहादतों मैं उत्तराखंड के सैनिक तथा अर्द्धसैनिक बलों के जवान हमेशा आगे रहे हैं। होम मिनिस्टर जी देश परअपनी जान कुर्बान कर देने वाली इन शहादतों का देश में कोई दूसरा उदाहरण ना है और नहीं मिलेगा

आपको बता दे कि 14 जून को बांदीपुरा में उग्रवादियों से लड़ते हुए रुद्रप्रयाग जिले के कविल्ठा गांव निवासी सेना के जवान मानवेंद्र सिंह ने शहादत दी थी। सिर 16 जून को ऋषिकेश निवासी विकास गुरुंग नौशेरा सैक्टर में उग्रवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। 18 जून को रुद्रप्रयाग जिले के बाड़व गांव निवासी असम राइफल्स के जवान फतेह सिंह नागालैंड में नगा उग्रवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। ओर अब
अब 4 कुमाऊं के जवान योगेश परगाई के नागालैंड में नक्सलियों से मुकाबला करते हुए शहीद होने की खबर आई है। इस तरह जून माह में आठ दिन के अंदर उत्तराखंड के चार जवानों के शहीद होने की खबर आई है।
हम जानते है कि ये पहली बार नहीं हो रहा है। भारत के साथ हर लड़ाई में देवभूमि
के वीर सैनिकों ने सीमा पर अपना सर्वोच्च बलिदान कर देश रक्षा की है, बल्कि हर आंतरिक घटना में भी उत्तराखंड के जवान आगे रहे हैं ओर आज भी है आप कारगिल युद्ध का ही उदाहरण ले लीजिए मगर तब तक उत्तराखंड अलग राज्य नहीं बना था, लेकिन आज की उत्तराखंड की सीमाओं पर गौर करें तो इस युद्ध में उत्तराखंड के सबसे अधिक 75 सैनिकों ने शहादत दी थी, दूसरे स्थान पर सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश था, जिसने 74 शहादत दी थी।
ये जावनो की शहादतें बाहर से देखने में कितना भी गर्भ की अनुभूति देते हों, शहादत देने वाले परिवार के लिए यह कितनी बड़ी त्रासदी लेकर आती है, यह उनके हालात देखकर पता चलता है। इन हालिया शहादतों में 21 वर्षीय ऋषिकेश निवासी विकास गुरुंग और 22 वर्षीय हल्द्वानी निवासी योगेश परगाई की शहादत बताती है कि इन युवाओं ने अभी दुनिया देखी ही कहां थी, उससे पहले शहादत के नाम पर उनके जीवन को छीन लिया गया। शहीद तो शहीद हो गया, उनके परिवार के लिए यह कितना बड़ा दंश दे गए, यह तो सिर्फ और सिर्फ उनका परिवार ही समझ सकता है।
जवानों की इस शहादतों के दौर में यह भी गौर करने वाली बात है कि शहादत का यह क्रम इसी तरह क्या बढ़ता चला जाएगा? ओर उठाता है सवाल की क्या केवल परिवार को मुआवजा देने भर से किसी भी सरकार की जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है? एक सवाल और क्या देश के आंतरिक तथा सीमाओं के हालात इस कदर भयावह हो गए हैं कि शहादतों के रिकार्ड बनने लगे हैं? होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह जी आज उत्तराखंड की मातृशक्ति बोल रही है , शहीद जवानों का परिवार बोल रहा है कि आखिर ये शहादत कब तक सर जी का योग भी जरूरी है और विकास भी पर ये जवानो की शहादत कब तक क्यो केंद्र सरकार एक्शन नही लेती आज हम उत्तराखंड की मातृशक्ति बोल रही है कल पूरे भारत की मात्र शक़्ति यही बोलेगी की केंद्र सरकार कर क्या रही है, क्या कर रहै है होम मिनिस्टर जी , ओर क्या कर रहे है पीएम मोदी जी क्योकि जवानी की आये दिन की बढ़ती शाहदतो ने अब मन को झंझोर दिया है दिल मे अपनो को खोने का दर्द है तो दिमाग मे क्रोध अब आप ही न्याय करे कि आखिर ओर कब तक ये शहादत होती रहेगी

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