पीएम सर जी अब मत कहना कि फिर लोकसभा चुनाव में इन सांसदों को संसद पहुँचाओं!

निधि खर्च करने में फिसड्डी बने सांसद, आरटीआइ में हुआ खुलासा

बस अब कुछ महीनों बाद आपकी चौखट पर बीजेपी और कांग्रेस के कार्यकर्ता से लेकर नेताओ की लाइन लगने वाली है , भाई लोकसभा चुनाव जो होने वाले है, फिर ये राजनीतिक दल के उम्मीद वार कहेंगे कि मुझे पहुचाओ लोकसभा मे बनुगा आपका रहनुमा। मगर इन मे से आज के वर्तमान सांसदों मे से कोई आया वोट मांगने या उससे पहले के पूर्व सांसद आये तो उनसे सवाल बनता है क्योंकि अपनी
निधि खर्च करने में फिसड्डी बने है अब तक कुछ सांसद, ओर ये खुलास आरटीआइ में हुआ 

आपको बता दे कि आरटीआइ की जानकारी के अनुसार सांसदों को अब तक मिलने योग्य करीब 112 करोड़ रुपये में से सिर्फ 67.5 करोड़ रुपये ही मिल पाए हैं।
अब जल्द ही लोकसभा सांसदों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है और कुछ ही माह शेष हैं ओर अब तक लगभग 40 फीसद सांसद निधि जारी होना बाकी रह गया है । जानते है कारण क्या है इसकी सबसे बड़ी वजह ये बताई जा रही है कि पूर्व में जारी निधि के खर्च का उपयोगिकता प्रमाण पत्र जारी करने के बाद ही आगे की निधि जारी की जाती है। आपको बता दे कि सांसद निधि के खर्च की यह स्थिति आरटीआइ कार्यकर्ता व अधिवक्ता नदीमउद्दीन की ओर से मांगी गई जानकारी में खुलकर सामने आगयी।

आपको बता दे कि आरटीआइ की जानकारी के मुताबिक, सांसदों को अब तक मिलने योग्य करीब 112 करोड़ रुपये में से सिर्फ 67.5 करोड़ रुपये ही मिल पाए हैं। वहीं, खर्च की बात करें तो प्राप्त बजट में से भी 21 करोड़ रुपये से अधिक शेष हैं।ओर खर्च के हिसाब से उपलब्ध राशि की बात करें तो सर्वाधिक निधि नैनीताल लोकसभा क्षेत्र के सांसद भगत सिंह कोश्यारी को 20 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं। 
जबकि दूसरे स्थान पर हरिद्वार क्षेत्र के सांसद रमेश पोखरियाल निशंक को करीब 15 करोड़ रुपये, तीसरे स्थान पर टिहरी सांसद राज्य लक्ष्मी शाह को 12.5 करोड़, अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा व पौड़ी सांसद भुवन चंद्र खंडूड़ी को 10-10 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। दूसरी तरफ, खर्च की बात करें तो 30 फीसद बजट अभी भी बचा है। उधर, इससे पहले के लोकसभा सांसदों के 5.33 करोड़ रुपये खर्च होने को शेष हैं।


बहराल अब आप को ही तय करना है , सवाल भी आपका ही है, ओर चुनाव मे वोट भी आपके ही होते है, किसी भी राजनीतिक पार्टियां का कोई भी उमीदवार जब संसद तक जाता है और सासंद बनने के बाद वो पूरे पांच साल के बीच मे मिलने वाली निधि को भी ठीक से पूरा जन हित के लिए विकास के लिए खर्च नही करता । या कर पाता तो ऐसे सांसदों के बारे मे लोकतंत्र क्या सोचता है इसके लिए अब बोलता उत्तराखंड जनता की राय लेने जनता के बीच जल्द होगा।

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