उत्तराखंड : अच्छी खबर, जल्द होने जा रही है 5000 पदों पर भर्ती बधाई हो ।

जी हा आपके उत्तराखंड में अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पांच हजार स्टाफ नर्सों की भर्ती की जाएगी। अब इसके लिए स्वास्थ्य निदेशालय जल्द ही प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजने जा रहा है
बता दे कि इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड मतलब आईपीएचएस के मानकों को पूरा करने के लिए प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में वर्तमान में कार्यरत स्टाफ नर्सों के अलावा पांच हजार नर्सों की और जरूरत है।जानकारी है कि
इन सभी पदों को भरने के लिए स्वास्थ्य विभाग को से चार से पांच भी लग सकते सूत्र बोल रहे है कि विभाग एक साल में एक हजार नर्सों की नियुक्ति करने को अब अभियान के तौर पर चलाने जा रहा है
उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधारने करने के लिए आईपीएचएस मानकों को लागू करने का निर्णय लिया है। ओर शासन की ओर से इस संबंध में शासनादेश भी जारी किया गया है।  ओर
इसी के तहत पहले चरण में जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन आईपीएचएस मानकों को पूरा करने में सबसे बड़ी अड़चन स्टाफ नर्सों कमी है। अभी वर्तमान में 1531 स्टाफ नर्सों के स्वीकृत पदों में से 1160 नर्स ही कार्यरत हैं। ओर 371 पद खाली पड़े हैं।
महकमे को आईपीएचएस मानकों के अनुसार पांच हजार स्टाफ नर्सों की जरूरत है।
इसके लिए विभाग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, उप जिला चिकित्सालय और जिला अस्पतालों में बेड क्षमता के आधार पर स्टाफ नर्सों का प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
बता दें कि सरकार ने आईपीएचएस के मानकों के अनुसार सरकारी अस्पतालों की श्रेणी निर्धारित कर चिकित्सकों व अन्य स्टाफ की संख्या तय की है। अस्पतालों का समायोजन कर पांच श्रेणी बनाई हैं। जिसमें पीएचसी टाइप-ए के 526, पीएचसी टाइप बी-52, सीएचसी 81, उप जिला चिकित्सालय 21 और जिला अस्पताल 13 हैं।
आईपीएचएस मानकों के अनुसार
100 बेड की क्षमता के जिला अस्पताल में 45 स्टाफ नर्स होनी चाहिए। इसी तरह 200 बेड पर 90 और 500 बेड पर 225 स्टाफ नर्स की नियुक्ति की जानी है। जबकि 31 से 50 बेड के उप जिला अस्पताल में 20 स्टाफ नर्स और 51 से 100 बेड के अस्पताल में 30 नर्स होने चाहिए। कुल मिलाकर हम कह सकते है कि उत्तराखंड के बीमार पहाड़ को ठीक करने के लिए त्रिवेंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है
अब तक लगभग तीन सालों मैं 1400 से अधिक भर्ती हुए नये डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे है ।
ओर काफी हद तक सरकारी अस्पतालों की बदहाल हालत को सुधारा गया है तो ये भी कह सकते है कि अभी पूरी तरह से गाड़ी के पटरी पर आने के लिए कम से कम 5 साल ओर चाइए।
शुभ कामनाएं सरकार को।


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