उत्तराखंड :प्यारी बेटी फाँसी लगाते समय हमारे बारे मे जरा सा भी ख्याल नही आया , हम कैसे जियेगे अब तेरे बिन, कोहराम के सिवा घर पर कुछ नही

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उत्तराखंड

काशिपुर

जानकारी जो मिली उसके अनुसार परिजनों ने गणित विषय का ट्यूशन लेने के लिए बार-बार दबाव बनाया जिससे तनाव में आई एक छात्रा ने घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। जब छात्रा की मां घर लौटी तो बेटी को फंदे पर लटका देखा।
बता दे कि खड़कपुर देवीपुरा निवासी पीआरडी कर्मी नंदाराम की ड्यूटी तहसील कार्यालय में हैं। उनकी सबसे छोटी बेटी प्रीती महज 16 साल तारावती सरोजनी देवी सरस्वती इंटर कॉलेज में कक्षा 11 की छात्रा थी। वह भौतिक और रसायन विज्ञान का ट्यूशन ले रही थी। परिजन गणित विषय का ट्यूशन लेने के लिए भी कह रहे थे। सोमवार सुबह पिता ड्यूटी पर चले गए, भाई आनंद अपनी आटा चक्की पर चला गया।
ओर दोनों बड़ी बहनें रूबी और स्वाति भी कोचिंग चली गईं, जबकि मां कमलेश रेलवे पटरी के किनारे कंडे पाथने चली गई।उस दौरान घर में प्रीती अकेली थी।ख़बर है कि उस दौरान प्रीती ने अपने कमरे में छत पर लगे कुंडे पर फंदा लगाकर फांसी लगा ली। फिर जब एक घंटे बाद उसकी मां कमलेश घर लौटी तो बेटी को फंदे पर लटका देख घर पर कोहराम मच गया वही कमलेश के रोने चिल्लाने की आवाज सुनकर वहां पहुंचे कॉलोनी के लोगों ने प्रीती के शव को नीचे उतारा। सूचना पर पहुंचे आईटीआई थाने के दरोगा ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। अब 16 साल की मासूम ने ये आत्महत्या जैसा कदम क्यो उठाया ये तो जांच का विषय है ।

पर जो भी बात रही हो बीटिया रानी आपको आत्महत्या करते समय अपने ममी पापा के नाम का भी ख्याल नही आया कि अब आपके बिन कैसे गुजरेगी उनकी ज़िंदगी।
आप जिंदगी भर का दर्द देकर चली गई उनको,
क्या क्या अरमान नही देखे होंगे उन्होंने आपको लेकर। बहुत कुछ है कहने के लिए बस
बोलता उत्तराखंड आजकल की नोजवान पीढ़ी से अनुरोध करता है कि कोई भी गलत कदम आप ना उठाये।
ओर आपके मन मैं जो भी चल रहा है उसे परिवार से साझा करें
तो परिवार जन भी अभिभावकों को भी जरूरत है कि वे अपने बच्चों के मित्र बने हिटलर नही।
आप जो भी कहते है उनके भले के लिए पर उस बात को समझाने ओर बताने का वो रास्ता निकाले जो आजकल के बच्चे अच्छी तरह से समझ जाएं।

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