निशंक की बात सुनकर रो पड़ा पहाड़ ! क्यो पहाड़ को भूल गए निशंक पढ़े पूरी ख़बर

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशक अब लग रहा है कि वो पहाड़ को भूल गए है ।उस पहाड़ को जहा की  बात वो विदेशों में भी करते है पर वहा नही कुछ बोलते जहा बोलना चाइए था। आपको बता दे कि बीते दिन
लोकसभा में रमेश पोखरियाल निशंक ने रायवाला मे गुलदार के आतंक की धमक, की बात रखी उनकी पूरी बात पर हरिद्वार से ऋषिकेश पर समाप्त हो गई ।
आपको बता दे कि देहारादून के रायवाला क्षेत्र में गुलदार के आतंक का मुद्दा संसद मे हरिद्वार के सासंद और राज्य के पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल ने उठाया। रमेश पोखरियाल निशंक ने लोकसभा में कहा कि सरकार गुलदार के हमले में मारे गये लोगों के परिवार वालो को या प्रभावितों को नौकरी दे। 
पूर्व मुख्यमंत्री हरिद्वार के सासंद रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि अब तक इलाके में गुलदार दो दर्जन से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना चुका है। इसके साथ ही निशंक ने कहा कि यहां हाथियों के आतंक की भी लगातार खतरा बना रहता है। पोखरियाल ने कहा कि जंगली जानवरों के कारण यहां की फसलें बर्बाद हो जाती है, बरसात में नदी के जलस्तर बढ़ने लोगों को भी बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।   
निशंक ने कहा कि केंद्र सरकार भी प्रदेश की इन सब समस्याओं की ओर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि इलाके के लोगों के जंगली जानवरों से बचने के लिए तारबाड़ और सुरक्षा दिवार लगनी चाहिए। निशंक ने पूरे क्षेत्र में तारबाड़ और दीवार करवाने का भी प्रस्ताव संसद में रखा है।            अब बोलता है उत्तराखंड कि अगर रमेश पोखरियाल निशंक ये कहते कि पूरे पाहड़ मे बाघ का आतंक लोगो की जान लगातार जा रही , पहाड़ के लोग घास लेने भी डर के मारे जंगल नही जा पा रहे ।एक तो पहले ही पहाड़ो से पलायान हो रहा है और अब ऊपर से ये बाघ पहाड़ मे आये दिन लोगो को अपना निवाला बना रहा है । और उसके बाद अपने हरिद्वार क्षेत्र का जिक्र जोड़ देते तो क्या हो जाता? निशक पूरे राज्य के नेता है ओर अब ये सिर्फ हरिद्वार की ही बात करते है मतलब पहाड़ी ने पहाड़ छोड़ा उस मैदान मे आकर टिका जहा मदन कौशिक जैसे इनके परम मित्र है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मुआवजा जायदा मिले और जिनको गुलदार मार देता है उनके परिवार मे से किसी एक को नोकरी दी जाये ।अरे भाई जी क्या हरिद्वार ऋषिकेस के लिए अलग मानक होंगे? या बनाये जायेगे ? मानक तो पूरे राज्य के एक हो होंगे ना इस मुद्दे पर । पूर्व मुख्यमंत्री ने बात गलत नही की ओर सही बात उठाई पर वो अगर इस मुद्दे पर अपनी बात के 4 शब्द पहाड़ के लिए बोलकर हरिद्वार आजाते तो क्या हो जाता? अब समय कम रह गया है ओर लोकसभा का चुनाव है तो पूर्व मुख्यमंत्री को सिर्फ हरिद्वार ही याद आ राह है। ओर अब याद आ रही है तारबाड़ की ।बहराल बुरा मत मनाना निशंक जी पर आपको पाहड़ का नेता बोला जाता है राज्य का नेता बोला जाता है पर आपकी शब्दो की गाड़ी हरिद्वार ही अटक गई । क्योकि निशंक की बात सुनकर रो गया पाहड़ वो बोला की हमारे ये पहाड़ के नेता ये कहते आकड़ो के साथ कि अब तक गुलदार या बाघ ने पूरे राज्य मे इतने लोगो को मार डाला और हाथियों ने इतनी जान ले ली।या इतने हेक्टेयर खेत उजाड़ दिए तो बात मे वजन होता ! ओर बोलता उत्तराखंड़ कहता है कि ये ठीक है उन्हें अपनी लोकसभा क्षेत्र की बात रखनी थी और समय भी कम मिलता है पर दो शब्द इस मुद्दे पर पाहड़ के बोलकर हरिद्वार आ जाते तो निशंक छा जाते।

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