क्या अब ये मान लिया जाए कि उत्तराखंड में लंबे समय से चल रहे संघर्ष का अंत हो गया है
क्योंकि
आपके , हमारे
भराड़ीसैंण (गैरसैंण) को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा दे दिया गया. सोमबार को राज्यपाल की अनुमति मिलने के बाद इसे एक आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है.
बता दे कि सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने साल 2020-21 के बजट सत्र के दौरान ही गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा कर दी थी. 4 मार्च (2020)
ओर आज इसे आधिकारिक स्वरूप दे दिया गया.

अब उत्तराखंड में दो-दो राजधानी

जब सीएम त्रिवेंद्र रावत ने गैरसैंण को राजधानी बनाने की घोषणा की थी तो तारीख 4 मार्च 2020 को
उन्होंने भावुक होकर कहा था कि ये फैसला काफी सोच-समझकर लिया गया है.
फिर 8 जून को यानी कि आज कोरोना काल मै आधिकारिक स्वीकृति के बाद उत्तराखंड की दो राजधानियां बन गई हैं


. सीएम त्रिवेंद्र रावत ने कहा है कि इससे दूरस्थ क्षेत्रों के अंतिम व्यक्ति तक विकास के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी.
हामरा गैरसैंण उत्तराखंड के पहाड़ी जिले चमोली में पड़ता है, ऐसे में उम्मीद है कि अब पर्वतीय क्षेत्रों का विकास तेजी से होगा.

गैरसैंण को राजधानी बनाने की लंबी लड़ाई ये भी जाने

गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग आज से नहीं, साठ के दशक से हो रही थी ओर (आगे भी होगी स्थायी राजधानी की मांग ).
जब उत्तराखंड उत्तर प्रदेश का हिस्सा था, तब भी गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग उठी थी. इस मांग को उठाने वाले पेशावर कांड के महानायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली थे. उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने के लिए आंदोलन करने वालों ने भी गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग उठाई थी. साल 2000 में उत्तराखंड तो राज्य बना लेकिन इसकी राजधानी देहरादून बन गई. ऐसे में आंदोलनकारियों ने एक बार फिर पहाड़ी प्रदेश की राजधानी पहाड़ पर होने के लिए आंदोलन तेज हो गया
फिर सरकारें आईं-गईं लेकिन गैरसैंण वही रहा

उत्तराखंड की कई सरकारों ने गैरसैंण को राजधानी बनाने का सपना दिखाया और इसे राजनैतिक मुद्दा बनाए रखा. कांग्रेस सराकार में सीएम रहे विजय बहुगुणा ने यहां कई अहम भवनों का शिलान्यास भी किया. हरीश रावत की सरकार में ये बनकर भी तैयार हो गए, लेकिन गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने का काम त्रिवेंद्र सरकार ने ही किया.

अब हाई टेक होगी गैरसैंण की विधानसभा

गैरसैंण में ई-विधानसभा बनेगी. सचिवालय के 17 अनुभाग ई-ऑफिस में बदले जा चुके हैं. सीएम त्रिवेंद्र ने कहा है कि ब्लॉक स्तर तक जितने भी दफ्तर हैं, इन्हें ई-ऑफिस बनाने का प्रयास जारी है, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे

वही मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भराड़ीसैण को आदर्श पर्वतीय राजधानी का रूप दिया जाएगा।
आने वाले समय में भराड़ीसैण सबसे सुन्दर राजधानी के रूप में अपनी पहचान बनाएगी। भराड़ीसैण (गैरसैण) को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के लिए 4 मार्च 2020 को की गई घोषणा सवा करोड़ उत्तराखंडवासियों की भावनाओं का सम्मान है।

अब अधिसूचना लागू करने से भराड़ीसैण, गैरसैण आधिकारिक रूप से ग्रीष्मकालीन राजधानी हो गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के विजन डाक्यूमेंट में गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की बात कही गई थी। क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसमें प्लानर और विशेषज्ञों की राय भी ली जा रही है। भराड़ीसैण (गैरसैण) में राजधानी के अनुरूप वहां आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जा रहा है। बड़े स्तर पर फाइलें न ले जानी पड़ी, इसके लिए ई-विधानसभा पर कार्य किया जा रहा है। इससे पेपरलैस कार्यसंस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। पेयजल की सुचारू आपूर्ति के लिए रामगंगा पर चैरड़ा झील का निर्माण किया जा रहा है। इसके बनने के बाद भराड़ीसैण, गैरसैण और आसपास के क्षेत्र में ग्रेविटी पर जल उपलब्ध हो सकेगा।
गैरसैण की कनेक्टीवीटी पर भी काम किया जा रहा है। भराड़ीसैण, गैरसैण को जोड़ने वाली सड़कों को आवश्यकतानुसार चैड़ा किया जाएगा। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। इसके पूरा होने पर रेल गैरसैण के काफी निकट तक पहुंच जाएगी।

इस बात मै कोई दो राय नही की जो काम पिछले 17 साल ओर
अभी तक के समय समय के मुख्यमंत्री नही कर पाए
वो फैसला मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसी साल 4 मार्च को ले लिया था जिस पर आज मुहर भी लग गई ।
ओर इसी के साथ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ओर उनकी पूरी टीम के आगे अब लगभग 2 सालो मैं पहाड़ का विकास, विकास का रोड मैप , ग्राउंड जीरो पर पहुँचकर पहाड़ के विकास की नीतियां बनाना,
ओर अमलीजामा पहना कर उन्हें जल्द धरातल पर उतरना
चुनोती से कम नही।
साथ ही
अब विपक्ष की नज़र भी पहाड़ के विकास पर रहेगी कि त्रिवेंद्र सरकार क्या कर रही है और जरा सा मौका मिलने पर भी विपक्ष त्रिवेंद्र सरकार पर प्रहार करने को तैयार बैठा होगा।
इसके साथ ही ये आवाज भी उठने लगी है कि सरकार बताये प्रदेश की स्थायी राजधानी
कहा बनेगी, ओर कब बनेगी।

 

खैरासैंण के लाल तूने कर दिया कमाल


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