उत्तराखंड के पहाड़ी इलाको में बारिश से उफान पर आए गदेरों ने मचाई तबाही, कुछ एनएच समेत 158 सड़कें बंद ,खोलने का प्रयास जारी..

बता दे कि रविवार तड़के हुई मूसलाधार भारी बारिश के कारण चमोली जिले के बिजार गांव में दूना गदेरे के उफान पर आने से मलबा लोगों के घरों में जा घुसा। ग्रामीण घराें को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर भागे। गदेरा उफान पर आने से पैदल रास्ते नष्ट हो गए और पेयजल लाइनें भी बह गईं। गदेरे के कटान से कई मकानों को भी खतरा हो गया है। ग्रामीण डर के साए में घरों में रह रहे हैं।
मीडिया को ग्राम प्रधान मोनिका देवी और देवेंद्र जमालू ने बताया कि गदेरे में बोल्डर बहकर आने से ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। गांव का प्राकृतिक पेयजल स्रोत और स्नानघर भी मलबे में दब गया है। गदेरे के कारण खजान सिंह, खीम सिंह, राकेश, वीरेंद्र सिंह, खीम सिंह और कुंदन सिंह के मकानों को खतरा हो गया है। वहीं जिला आपदा प्रबंधन गांव में हुए नुकसान का आंकलन कर रहा है।
वहीं कर्णप्रयाग में अतिवृष्टि के कारण  टटासू गदेरा उफान पर आ गया, जिससे ग्राम पंचायत डिम्मर में सरकारी और निजी परिसंपत्तियां क्षतिग्रस्त हो गईं। पौराणिक सिद्धपीठ टटेश्वर महादेव मंदिर के पैदल पुल की दीवार क्षतिग्रस्त हो गई। खारीगाड़ गदेरे के उफान पर आने से डिम्मर-सिमली मोटर मार्ग धंस गया जिससे आवाजाही बंद हो गई।
डिम्मर, खोला, टटासू आदि तोकों में पैदल रास्ते टूट गए। ग्राम प्रधान राखी डिमरी, क्षेत्र पंचायत सदस्य संदीप डिमरी, मंदिर के महंत योगेशानंद महाराज, रविंद्र खंडूड़ी आदि ने परिसंपत्तियों की मरम्मत की मांग की। तहसीलदार कर्णप्रयाग एसएस रांगड़ ने बताया कि जल्द क्षतिग्रस्त मार्गों को दुरुस्त करा दिया जाएगा।
पुश्ता टूटने से शिव मंदिर को खतरा, पानी की लाइन बही
अतिवृष्टि से कपीरी पट्टी के ग्वाड़, फलोटा, सुपतोली, बिडोली, धारडुंग्री, खोला, द्यूडी, घाघूमोंणा, सुमल्टा, कोलाडुंग्री, नाकोट आदि गांवों में पेयजल लाइन बह गई। साथ ही लंगासू में वशिष्ठेश्वर शिव मंदिर के आगे का पुश्ता टूटने से मंदिर को खतरा हो गया है।
तो पेयजल चेंबर और लाइन बह गई जिससे गांवों में पानी की समस्या हो गई है।
वहीं लंगासू में बने शिव मंदिर का पुश्ता भी क्षतिग्रस्त हो गया है। बारिश के कारण लोग घरों के बाहर रहे। नायब तहसीलदार गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि लंगासू और टटेश्वर महादेव मंदिर में क्षतिग्रस्त पुश्तों का निरीक्षण कर दिया गया है।

बारिश के कारण देवाल-थराली सड़क नंदकेशरी व पूर्णा के बीच चट्टान गिरने से बंद हो गई। इस बीच हल्द्वानी, देहरादून व थराली जाने वाले कई वाहन फंसे रहे। लोनिवि ने जेसीबी से मलबा हटाकर यातायात बहाल कराया। वहीं हाटकल्याड़ी-जैनबिष्ट के पास भी मलबा आने से सवाड़ व घेस सड़क दिनभर बंद रही। घेस गांव के धन सिंह व कुंदन भंडारी ने सड़क पर नियमित जेसीबी रखने की मांग की। वहीं पीएमजीएसवाई के ईई प्रमोद गगाड़ी ने कहा कि जो सड़कें बंद है उन्हें खोलने के लिए जेसीबी भेज दी गई हैं।
उत्तराखंड में रविवार तक राष्ट्रीय राजमार्गों समेत 158 सड़कें अभी भी बंद हैं। इन सड़कों में मलबा आ जाने से यातायात पूरी तरह से बाधित हैं। इनमें प्रमुख मार्गों को तत्काल खोलने के लिए लोनिवि की मशीनरी युद्ध स्तर पर जुटी है। रविवार तक प्रदेश में बदरीनाथ और यमुनोत्री एनएच को छोड़कर बाकी सभी राष्ट्रीय राजमार्ग खुले हैं। इनके अलावा नौ स्टेट हाईवे भी बाधित हैं, जिन्हें खोलने के लिए 20 मशीनें तैनात की गई हैं। मौसम ने साथ दिया तो अधिकांश मार्गों को आज दोपहर तक खोल दिया जाएगा


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