बोले महेंद्र राणा पंचायत प्रतिनिधियों का गुस्सा सातवें आसमान पर , विधायक-सांसद जैसे वेतन भत्ते दे सरकार या फिर पंचायती राज अधिनियम में संशोधन करे सरकार ।

महेंद्र सिंह राणा ब्लाक प्रमुख द्वारीखाल प्रमुख सगठन अध्यक्ष उत्तराखंड ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से गुहार लगाई है

उन्होंने कहा कि
पंचायतीराज अधिनियम 2016 की धारा 30 प्रधान धारा 69 क्षेत्र पंचायत एवं धारा 107 में जिला पंचायतों को लोक सेवक माना है
ओर सांसद एवं विधायक भी पंचायत प्रतिनिधियों की भांति लोक सेवक हैं किंतु सुविधाओं और वेतन के मामले में जमीन आसमान का अंतर है।

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महेंद्र सिंह राणा ब्लाक प्रमुख द्वारीखाल प्रमुख सगठन अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से गुहार लगाते हुए
उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम 2016 में संशोधन की मांग की
उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह निवेदन किया है
ओर कहा कि ग्राम प्रधान को 1500 मासिक,
उप प्रधान को 500 मासिक,
जिला पंचायत अध्यक्ष को 10000 मासिक,
जिला पंचायत उपाध्यक्ष को 5000 मासिक
जिला पंचायत सदस्य को 1000 प्रति बैठक
ब्लॉक प्रमुख को 6000 मासिक
उप प्रमुख को पंद्रह सौ मासिक
और क्षेत्र पंचायत सदस्य को प्रति बैठक 500 रूपये मानदेय के रूप में दिया जाता है
जबकि सांसद एवं विधायकों को लाखों रुपए वेतन भत्ते दिए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि त्रिवेंद्र सरकार या तो पंचायत प्रतिनिधियों को माननीय सांसदों एवं माननीय विधायकों के जैसे ही वेतन भत्ते प्रदान करे अन्यथा पंचायती राज अधिनियम में संशोधन कर पंचायत प्रतिनिधियों को अपना व्यवसाय करने हेतु आवश्यक कानूनी प्राविधान करे उन्होंने राज्य के विधायकों एवं सांसदों से भी पंचायत प्रतिनिधियों के सहयोग की अपील की है
बहराल जो भी कहा है सच ही कहा है क्योंकि गांव की छोटी सरकार को विधायिका आगे बढ़ने ही नही देती
ओर नियम सिर्फ कागजों में ही दफन हो जाते है उनके
क्योंकि छोटी सरकार को मजबूत करने की मंशा बड़ी सरकारों की नही रहती है।
सूत्र बोल रहे है कि पंचायत प्रतिनिधियों की नारजगी इतनी बढ़ गई है कि वे जल्द गाँव गाँव से लेकर जिले तक ओर जिले से देहरादून तक धरना प्रदर्शन करते नज़र आएंगे
यदि उनकी बात पर जल्द ही सरकार ने अमल नही किया तो 


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