जानो उत्तराखंड: 36 हजार करोड़ कम हो गई प्रदेश की जीडीपी लॉकडाउन में,
तो ग्रामीण क्षेत्र पर दिख रहा है असर।

महत्वपूर्ण जानकारी

एसबीआई की शोध शाखा की हाल की रिपोर्ट में किया गया दावा
लगभग

12 प्रतिशत कम हो गया अर्थव्यवस्था का आकार

 

जी हा लॉकडाउन की वजह से उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को लगभग 36 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
ओर यह नुकसान ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है शहरी क्षेत्रों के हिसाब से
अपने उत्तराखंड में 15 मार्च को पहला कोरोना केस आया था और फिर उत्तराखंड मे 22 मार्च से लॉकडाउन आरम्भ हुआ था,
जो जून तक जारी रहा। इस दौर में उद्योगों से लेकर अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के ठप होने का नुकसान राज्य को उठाना पड़ा है।
ख़बर है कि
एसबीआई की शोध शाखा एसबीआई इको की ओर से जारी आंकड़े बता रहे हैं कि इस नुकसान के कारण प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 36 हजार करोड़ रुपये कम हो गया है।
शहरी क्षेत्रों में यह प्रभाव 21 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में करीब 79 प्रतिशत आंका गया है।
जानकरीं अनुसार
प्रदेश की जीडीपी लगभग ढाई लाख करोड़ मानी जाती है।

वही नियोजन विभाग का अनुमान था कि कोविड काल से पहले प्रदेश की विकास दर भी घटकर करीब 5.1 प्रतिशत रह गई थी।
अब यह विकास दर शून्य से नीचे मानी जा रही है। 

ऐसे में त्रिवेंद्र सरकार की परेशानी बढ़नी जायज है।
ओर अर्थव्यवस्था के आकार में यह कमी त्रिवेन्द्र सरकार को चिंतित भी कर सकती है।
कारण यह भी है कि अर्थव्यवस्था में गिरावट ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है।
वही उत्तराखंड में खेती किसानी या प्रारंभिक क्षेत्र की विकास दर पहले से ही चार प्रतिशत से कम थी।
अब त्रिवेंद्र सरकार के सामने अब प्रवासियों को स्वरोजगार से जोड़ने वाली योजनाओं को बेहतर तरीके से धरातल पर उतारने का अधिक दबाव रहेगा।
क्योकि सरकार के पास यही विकल्प है अभी जैसे (मुख्यमंत्री स्वरोजागर योजना)
इस प्रकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सकता है
शहरी क्षेत्रों में अर्थव्यवस्था का आकार कम होने को रोजगार से भी जोड़ा का रहा है।


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