पथराव का मन बनाकर आए थे कुछ उपद्रवी

_ मुख्यमंत्री ने तत्काल दिए दीवालीखाल लाठीचार्ज की घटना के मजिस्टीरियल जांच के आदेश

गैरसैंण।

जायज मांग को लेकर चल रहा आन्दोलन जरा सी चूक पर कैसे कमजोर पड़ सकता है, इसकी बानगी नन्दप्रयाग-घाट मोटर मार्ग के चौड़ीकरण की मांग को लेकर चल रहे जनान्दोलन में देखने को मिल रही है। इस आन्देलन में कुछ उपद्रवी घुस आए हैं। जिस तरह से बीती शाम दीवालीखाल में पुलिस कर्मियों पर पथराव किया गया, उससे साफ है कि उपद्रवी मन बनाकर आए थे। ऐसे लोग न सिर्फ आन्दोलन को कमजोर कर रहे हैं बल्कि प्रदेश में अस्थिरता फैलाना भी उनका मकसद है।
आमतौर पर पुलिस बेवजह प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करने से बचती है। दीवालीखाल में हुई घटना में ऐसा ही हुआ। पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता चल ही रही थी कि इसी बीच कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव कर दिया। पुलिस के जवानों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया। कई जवान चोटिल हो गए। हालात संभालने के लिए पुलिस को भी लाठीचार्ज करना पड़ा। मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। वीडियो फुटेज से साफ है कि पुलिस की कार्रवाई ‘लाठीचार्ज’ नहीं बल्कि ‘लाठियों की फटकार’ तक सीमित रही। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने के बजाए जमीन पर लाठियां फटकारीं ताकि भीड़ को खदेड़ा जा सके। हालांकि इस भगदड़ में कुछ महिलाएं भी घायल हो गईं। घटना के बाद सोशल मीडिया में सुनियोजित तरीके से जनभावनाओं को भड़काने की कोशिशें हुईं। किसी ने सरकार पर तो किसी ने प्रदर्शनकारियों पर इस तरह की अराजक टिप्पणियां करीं कि आगे स्थिति और बिगड़े। कोशिश एकतरफा परसेप्शन बनाने की हो रही है कि हर हाल में त्रिवेन्द्र सरकार को घेरा जाए। इधर, मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत साफ कह चुके हैं कि घाट ही नहीं बल्कि प्रदेश के हर विकास खण्ड को जोड़ने वाली सड़क को डेढ़ या डबल लेन किया जाएगा। मुख्यमंत्री लाठीचार्ज की घटना के भी तत्काल मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे चुके हैं। जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।


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