बोला  उत्तराखंड : इलाज भी सही और जाॅच भी सही   पर अस्पताल के बारे में षड़यंत्र व   तथ्यहीन बातें लिखवाने  वाले की नीयत गलत ।

देहरादून
उत्तराखंड के नामचीन अस्पताल श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में आने वाले मरीजों को नियमानुसार उपचार मिलता है यह बात जगजाहिर है,
लेकिन यह बात उन लोगों को हज़म नहीं हो पाती जो अस्पताल की छवि को खराब करने व अस्पताल से कुछ न कुछ वसूलने की फिराक में घूमते रहते हैं। इस बात को बोलता उत्तराखंड लागातार डंके की चोट पर बोलता आया है और आगे भी बोलता रहेगा ।

बोलता है उत्तराखंड ऐसी शिकायतों से जुड़े मामलों पर यदि गौर करें तो यहां यह बताना भी जरूरी होगा कि जिन लोगों ने भी श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के उपचार व जाॅचों पर नाकाम साजिशन सवाल उठाये या उठवाए, अधिकृत मेडिकल बोर्ड की टीमों ने ऐसे मामलों की जाॅच करने के बाद सभी आरोप झूठे पाए। ओर पाते भी क्यो ना झूठे आरोप लगाने वाले लोगो की मंशा साफ उजागर समय समय पर होती आई है क्योंकि बिन सच के बिना जांच के अस्प्ताल को बदनाम करने के लिए भाई पैसा जो मिलता है ( और यहां भी दबाव बनाकर उगाई कर ली जाए तो सोने पे सुहागा हो जाये ) ये नीयत होती है उन लोगो की
पर हर बार देखने को मिला कि ऐसे आरोपियों के झूठे आरोप औंधे गिरे पड़े मिले और उन लोगों को मुँह की खानी पड़ी। (खेर ये बीते 3 महीने पहले समय समय की बात है क्योंकि ये देखने को मिलता है ! )
लेकिन अभी हाल ही मे अभी किसी न्यूज़ पोर्टल मैं कुछ गलत ख़बर छपी जिस पर अस्प्ताल ने अपनी बात रखी

बता दे कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के रेडियोलाॅजी विभाग के डाॅक्टरों ने जाॅच पड़ताल के बाद यह जानकारी दी है
कि 12 अगस्त को एक मरीज़ श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में उपचार के लिए आए। मरीज़ द्वारा बताई गई बीमारी के अनुसार डाॅक्टर ने उन्हें अल्ट्रासाउंड की सलाह दी।
मरीज़ का अल्ट्रासाउंड नियमानुसार किया गया।
डाॅक्टरी सलाह के बावजूद मरीज़ ने अल्ट्रासाउंड करवाने से पहले पेशाब का प्रेशर को नहीं रोका था (ब्लेडर फुल नहीं था।)

मरीज़ के बाईं ओर पेशाब की थैली के पास पेशाब की नलकी मे पथरी है।
जबकि अल्ट्रासाउंड मे दाईं ओर 2 एमएम की पथरी दिखाई दी।
डाॅक्टर ने अल्ट्रासाउंड जाॅच रिपोर्ट में ब्लेडर फुल कर दोबारा जाॅच के लिए लिखा है।
लेकिन मरीज़ दोबारा जाॅच करवाने के बजाय ड्यूटी डाॅक्टरों के साथ कहासुनी कर चला गया और अन्य अस्पताल में जाकर उन्होंने सीटी स्कैन करवाया जिसमें बाएं हिस्से में पथरी दिखाई दी।
यदि मरीज़ पेशाब का प्रेशर रोककर अल्टासाउंड या सीटी स्केन जाॅच के लिए श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के डाॅक्टरों का परामर्श मान लेता तो बाईं हिस्से की पथरी भी डायग्नोज़ हो जाती।

मेडिकल एक्सपर्ट के अनुसार इसमें असामान्य होने जैसी कोई भी बात नहीं है।
ये सब इसलिए कहा गया है कि हाल ही में मरीज़ के मार्फत किसी समाचार पोर्टल पर लिखी गई बातें अस्प्ताल ने सरासर गलत बताई है
क्योंकि उन्होंने सभी बात को गलत नीयत से उठाया गया है बताया

ये ख़बर अब आ रही है ।
इस घटना को यहां पर लिखने का यह कारण है कि उस दिन इस मरीज़ के साथ साथ खुद को पत्रकार बताने वाले भी साथ में आए थे। ओर उन्होंने अस्पताल मैनेजमेंट व यहां वहां फोन कर खुद के उपस्थित होने का अहसास भी करवाया।
अस्पताल से ख़बर ये आई कि ऐसे लोगों के साथ में होने से एक परेशानी यह आती है कि ऐसे लोगों के अहंकार को बात बात पर चोट पहुंच जाती है। ( बीना पूरी बात जाने )
सुना है उस दिन जब इनके मन की नहीं हुई तो तथ्यों को तोडमरोड़कर उन्होंने किसी एक पोर्टल पर अनाप शनाप खबर डालवा दी।
अस्प्ताल प्रबंधक ने कहा कि
यदि जाॅच रिपोर्ट पर मरीज़ या इन महानुभाव पत्रकार को कोई संशय है तो वह तीन सदस्यीय रेडियोलाॅजी के डाॅक्टरों के पैनल के सामने इस मामले पर जाॅच की मांग कर सकते हैं।

क्या अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट गलत है?
क्या अल्ट्रासाउंड गलत हुआ है ?
क्या मेडिकल लिटरेचर से अलग हटकर अलग ट्रैक पर डाॅक्टरों ने इलाज किया यह कौन तय करेगा ?
ओर किसी प्रतिष्ठित अस्पताल के बारे में तथ्यों की सही जाॅच पड़ताल किये बिना किसी भी पोर्टल पर लिखना किसी भी आप जैसे सीनियर पत्रकार को शोभा नहीं देता।


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