20 साल के उत्तराखंड में कांग्रेस और बीजेपी बारी-बारी दोनों दलों ने प्रदेश में राज किया।
एक ही सरकार के कार्यकाल में कई मुख्यमंत्री के चेहरे भी बदले लेकिन कांग्रेस के एनडी तिवारी ही अभी तक एक मात्र ऐसे मुख्यमंत्री रहे जिन्होंने अपना मुख्यमंत्री का कार्यकाल 5 साल पूरा किया।
वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह को प्रदेश में मुख्यमंत्री के तौर पर मार्च में 4 साल से होने वाले है
ऐसा माना जा रहा है कि तिवारी के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत ही ये रिकॉर्ड बनाएंगे


लेकिन उत्तराखंड की राजनीति
ओर राजनताओ की अधिक से अधिक महत्वाकांक्षी होने के चलते यहा मुख्यमंत्री हटाओ ओर दूसरा बनाओ का खेल चलता रहता है
ओर यही खेल त्रिवेंद्र के कुर्सी पर बैठने के साथ भी  आरम्भ हो चुका था जो शायद आज भी जारी है …
सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत को सख्त और ईमानदार छवि का प्रदेश मे माना जाता है ( तो दिल से नरम)
ओर त्रिवेंद्र की इस छवि को ख़राब करने के कही नापाक प्रयत्न हुए और हो भी रहै है
पर त्रिवेंद्र को इससे फर्क नही पड़ता !

त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जब से राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली है तबसे लगातार नेतृत्व परिवर्तन की खबरें हवा के झोंके की तरह आती जाती रही है। लेकिन खबरों में बिल्कुल भी दम नहीं रहा। बल्कि खुद मुख्यमंत्री और आलाकमान ने सामने आकर ऐसी अफवाहों का खंडन समय समय पर किया है।

लेकिन एक बार फिर विधायकों की नौकरशाही से नाराजगी को मुख्यमंत्री से नाराजगी से जोड़कर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। जो सरासर गलत है
ओर जबर्दस्ती नाराज़ विधायकों का नेतृत्व डीडीहाट ओर भाजपा के सादगी से भरे विधायक व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल के सर उलट दिया
अरे भाई जब मीडिया में चुफाल चिल्ला चिल्ला कर बोल रहे है कि मेरी राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात एक मात्र औपचारिक मुलाकात है
ओर जब उन्होंने पूछा तो मैने बता दिया कि में नोकरशाही से परेशान हूँ और मैने ये बात मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र जी से भी कही जिस पर उन्होंने मुझे कहा कि सब ठीक होगा आप बेफिक्र रहे  ओर में कहना चाहता हूँ  दावे के साथ कि हम त्रिवेंद्र जी के नेतृत्व मैं  फिर सरकार बनाने  जा रहे है पर मेरी राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात की फ़ोटो को ऐसे
वायरल किया जा रहा है
जैसे मे उत्तराखंड में 7 खून कर
दिल्ली मुलाकात के लिए आ गया ।
मीडिया वाले भी बात का ताड़ बनाते है मै फिर कह रहा हूँ कि मेरी मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र जी ओर
सरकार से कोई नाराजगी नही है
जो मे नाराज था वो अफसरों से था उस पर मुख्यमंत्री जी से पहले ही बात हो गई थी
इसलिये भगवान के लिए अफवाह मत उड़ाओ ना यहा बगावत है ना कोई मुख्यमंत्री से नाराज है

बहराल उत्तराखंड की राजनीति में ये सब अफवाह ओर कारनामें या फिर हक़ीक़त मैं कल क्या हो जाये ये कोई नही जानता!
पर चुनाव से पहले विधायकों और नेताओं का ऐसा कुछ करना बोलना, ये साबित करता है कि
उन्हें फिर अब जनता के बीच जाना है और अब हमारी बादशाह जनता ही है
इसलिए फिर से विकास के नाम पर चर्चाओं मैं नही रहेगे तो वोट मिलेगा कैसे
ओर चुनाव में टिकट भी नहीं कटता और अपने क्षेत्र में वोट की फसल भी आसानी से कट जाती है।
वैसे ये भी सच है कि बीजेपी विधायकों की पूरी क्रिकेट टीम
सरकारी मशीनरी से जरूर त्रस्त है। जिसकी नाराजगी उन्होंने मुख्यमंत्री से की है जिस पर मुख्यमंत्री ने अफसरों को सख़्त से सख़्त लिहाजे मे साफ़ कह दिया है कि अगली बार शिकायत आने पर आप समझ ले की माफ़ी की कोई जगह नही होगी और नियमानुसार कार्यवाही होगी
तो उधर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के विशेष कार्य अधिकारी धीरेंद्र पवार ने लगभग सभी जिन विधायको के नाम नाराजगी से जोड़कर लिए जा रहे थे उन से मुलाकत कर उनकी बातों को सुना और समझा ओर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र से फोन पर बात करवाकर
उनकी जो थोड़ी बहुत नाराजगी अफसरों से थी उसे दूर करने का आस्वासन भी दिलवाया
ओर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के विशेष कार्य अधिकारी धीरेंद्र पवार ने जिसके बाद
नाराजगी जैसी खबरों का खंडन किया है।
उन्होंने कहा कि ये बगावत जैसी खबरे फैलाने वाले भाजपा सरकार विरोधी है
हा अफसरों से हमारे माननीय विधायक जी नाराज थे जिनकी नाराजगी अब दूर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र जी ने कर दी है
इसके इलावा बाकी सभी परोसी खबरें कोरी अफवाह के सिवा कुछ नही ।


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