लगातार
बढ़ते कोरोना के मरीज की सख्या से
चिंतित लोग व सरकार को अब एक नई दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है!
बता दे कि ये मामला चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल से जुड़ा हुआ है।
ख़बर है कि स्वास्थ्य विभाग के यह कोरोनावारियर्स अब अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल की चेतावनी दे रहे हैं.
ओर इसके लिए बकायदा चिकित्सकों ने विरोध कार्यक्रम की रूपरेखा भी तैयार कर ली है।
कोविड-19 के इस मुश्किल क्षण में स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ ने विरोध का बिगुल फूक दिया है।
राज्य में चिकित्सकों-नर्सों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध करने की बात कही है।
वही चिकित्सकों ने तो आने वाले दिनों में विरोध के कार्यक्रम की रूपरेखा भी जारी कर दी है।
आपको बता दें कि चिकित्सक मुख्य रूप से अपनी तीन मांगो को लेकर विरोध का बिगुल फूंक रहे हैं..
इसमें चिकित्सकों का 1 दिन का वेतन काटे जाने,
पीजी करने वाले डॉक्टर को पूरी तनख्वाह देने के मुख्यमंत्री की घोषणा को पूरा करने और विभिन्न मामलों में डॉक्टर्स को जिम्मेदार ठहराने और जिलाधिकारी से नीचे के अधिकारियों द्वारा भी अस्पतालों पर हस्तक्षेप करने के मामले शामिल है।
चिकित्सकों के मुताबिक सरकार जल्द से जल्द चिकित्सकों का 1 दिन का वेतन काटने के फैसले को वापस ले साथ ही मुख्यमंत्री की घोषणा को पूरा करते हुए उस पर आदेश जारी किए जाएं जबकि जिलाधिकारी से नीचे के अधिकारियों का अस्पतालों पर कोई हस्तक्षेप ना हो जैसी मांगों को जल्द पूरा किया जाए।
बहराल डॉक्टरों की माने तो ऐसा नहीं होने पर 1 सितंबर से सभी डॉक्टर 1 हफ्ते के लिए काली पट्टी बांधकर काम करेंगे फिर उसके बाद चिकित्सक बीआरएस भी लेंगे..
इसके बाद भी मांग पूरी ना होने पर सामूहिक इस्तीफा भी चिकित्सक देने को तैयार है
इस मामले को लेकर जहां चिकित्सक लामबंद है तो स्वास्थ्य महानिदेशक इसकी जानकारी मीडिया से ही लगने की बात कह रही है। स्वास्थ्य महानिदेशक अमिता उप्रेती कहती है कि उनकी स्वास्थ्य सेवा संघ के पदाधिकारियों से मुलाकात है जिसमें वे इस मामले में चिकित्सकों की मांगों को जानने की कोशिश करेंगी।


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