देहरादून जिले के पुरकुल गांव में आज सैन्यधाम के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की वह संकल्पना साकार होने की दिशा में बढ़ गई है जो सेना और सैनिकों के सम्मान के लिए की गई थी। सैन्यधाम का यह विजन देश भर में एकलौता तो है ही यह संवेदनाओं के साथ दृढ़संकल्प और नई संभावनाओं का भी समागम होगा। इसके लिए देश की नई पीढ़ियां पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम त्रिवेंद्र की कृतज्ञ रहेंगी।

पूर्व में उत्तराखंड आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश में सैन्यधाम बनाने की घोषणा की थी। जिसका खाका सीएम त्रिवेंद्र ने पहले से ही तैयार कर लिया था। चार धाम वाली देवभूमि में पांचवें धाम की संकल्पना साकार होती गई। धाम का बेहद संवेदनशील पहलू देखिए! शहीदों के गांव की मिट्टी भी इस धाम पर खुशबू बिखेरेगी। यहां शहीदों के स्मृति चिन्हों का संग्रहित और सुरक्षित किया जायेगा। कोशिश की जा रही है कि यहां शाहादत देने वालों की हरेक स्मृतियां जीवंत हो। शहीद के गांव से आए पत्थर भी इस निर्माण में लगेंगे। यहां 1947 के युद्ध से लेकर कारगिल युद्ध तक की वीरगाथाएं जीवंत होंगी।

मुख्यमंत्री के दिमाग में चल रही योजना के अनुरूप छह हैक्टेअर तक फैले पांचवें धाम सैन्यधाम की भूमि पर युवा पीढ़ी को सैन्य सेवा के लिए जागरूक करने और प्रेरणा देने के प्रयास होंगे साथ ही इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए कोचिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। धाम में साहसिक खेलों का भी विकल्प होगा ताकि युवा पीढ़ियों में जोश भरा जा सके और सेना को ज्वाइन करने के लिए वह अधिक से अधिक संख्या में आगे आएं। सैन्य धाम के निर्माण से समाज के हर वर्ग को प्रेरणा मिले।

सैन्यबहुल प्रदेश होने के नाते सैनिकों के सम्मान में एक सैनिक का बेटा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत चाहते हें कि भविष्य में प्रदेश में जो सरकार बने उस का शपथ ग्रहण कार्यक्रम भी सैन्यधाम में हो। जाहिर तौर पर सीएम त्रिवेंद्र की यह सोच और देश भक्ति उनके कद को और भी उंचा कर देती है। सैन्यधाम संवेदनाएं तो होंगी ही इसमें संकल्प और नई संभावनाओं का समागम होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की इस सोच के लिए नई पीढ़ियां उनकी कृतज्ञ रहेेंगी।


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