नर्सरी की छात्रा के साथ दुष्कर्म !माता पिता फूट फूट कर रोये मासूम की बात सुनकर देवभूमि शर्मसार

उतराखंड मे क्या महिला क्या नाबालिग ओर क्या मासूम कोई भी हवस के भेड़ियों से सुरक्षित नही है देहरादून के बोर्डिंग स्कूल में छात्रा संग गैंगरेप का मामला अभी ठंडा भी नही हुवा था कि दिल दहलाने वाली ओर दुःखद ख़बर हल्द्वानी से आई थी जहा के एक स्कूल में नर्सरी में पढ़ने वाली बच्ची के साथ स्कूल वैन में दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ओर इस दुष्कर्म का आरोप किसी और पर नहीं बल्कि स्कूल वैन के चालक और परिचालक पर ही है। आपको बता दे कि दर्द उठने पर मां जब बच्ची को डॉक्टर के पास ले गई तब मामला सामाजिक कार्यकर्ताओं से होकर पुलिस तक पहुंचा।
ओर आरोप है कि स्कूल प्रबंधन इतना गंभीर मामला संज्ञान में आने पर भी कार्रवाई की बजाय इसे मैनेज करने में लगा रहा। गरीब मां-बाप को न जाने किसने क्या घुट्टी पिलाई कि वह सामाजिक कार्यकर्ताओं और पुलिस के समझाने पर भी रिपोर्ट दर्ज करने को तैयार नहीं हो रहे थे।
बहुत समझाने पर भी माता-पिता  केवल मारपीट की तहरीर देने की बात कह रहे थे। दुष्कर्म की शिकार बच्ची चार दिन से स्कूल नहीं गई थी । आपको बता दे कि इस मामले में एक सामाजिक कार्यकर्ता की तहरीर पर पुलिस ने चालक-परिचालक के खिलाफ धारा 354 और पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज कर कराया। ओर जिन पर आरोप लगे है उन्हें गिरफ्तार कर लिया पुलिस का कहना है कि बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट आने पर धाराएं बढ़ाई जाएंगी।
ख़बर है कि गौलापार इलाके में रहने वाली करीब साढ़े चार साल की मासूम के साथ स्कूल के वैन चालक-परिचालक यह घिनौनी हरकत पखवाड़े भर से कर रहे थे। बच्चों को छोड़ते हुए जब वैन अंतिम छोर पर मासूम के घर तक पहुंचती उस वक्त वह वैन में अकेली होती थी।
बस इसी बात का फायदा उठाकर चालक-परिचालक बच्ची के नाजुक अंगों से छेड़छाड़ करते थे। 17 सितंबर को बच्ची दर्द से छटपटाने लगी तो मां उसको डॉक्टर के पास ले गई। डॉक्टर बच्ची का परीक्षण करते ही मामला समझ गई। पूछताछ में बच्ची अपनी समझ से जो बता सकी, उससे भी साफ हुआ कि उसके नाजुक अंगों के साथ छेड़छाड़ की जाती थी। डॉक्टर ने इस बात की पुष्टि भी की है।

आपको बता दे कि डॉक्टर के जरिये यह बात एक सामाजिक कार्यकर्ता को पता चली तो उसने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने बच्ची से पूछताछ और वैन की शिनाख्त कराने के बाद उसके चालक-परिचालक को हिरासत में ले लिया।
आपको बता दे कि मासूम बच्ची के साथ लगभग कुछ समय से स्कूल वैन के चालक और परिचालक घिनौनी हरकत कर रहे थे। ओर। जब मामला सामने आया तो कही बड़े खुलासे हुए हैं।
जब माता पिता मासूम को डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे तो उसने जो बताया वह सुन बच्ची के माता-पिता फूट-फूट कर रोने लगे। बच्ची से ये सारी बात सीसीटीवी के सामने हुई। बच्ची ने बताया कि दोनों आरोपियों द्वारा उसके साथ कई बार वैन में गंदी हरकत की गई।
डॉक्टर ने माता-पिता को बच्ची का एसटीएच में इलाज कराने की सलाह दी थी।

आपको बता दे कि जानकारी अनुसार गौलापार इलाके में रहने वाली मासूम के साथ स्कूल वैन चालक-परिचालक यह घिनौनी हरकत करीब पखवाड़े भर से कर रहे थे।

तो वही स्कूल प्रबंधन इतना गंभीर मामला संज्ञान में आने पर कार्रवाई की बजाय इसे मैनेज करने में लगा रहा।

पब्लिक स्कूल की वैन में मासूम छात्रा के साथ दुष्कर्म की घटना ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों की कलई खोल दी है। सीबीएसई के साथ ही राज्य सरकार की स्पष्ट गाइड लाइन के बावजूद स्कूल वैन में महिला गार्ड की तैनाती नहीं की गई। यही हाल कमोवेश अधिकांश पब्लिक स्कूलों का है। बच्चों को स्कूल बस और वैन के चालक-परिचालकों के सहारे छोड़ दिया जाता है।
आपको बता दे कि सीबीएसई ने पिछले वर्ष स्कूली बच्चों के साथ हुई घटनाओं के बाद 23 फरवरी 2017 को सीबीएसई से संबद्ध सभी पब्लिक स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर गाइड लाइन जारी की थी। स्कूल बस हो या फिर वैन,  चालक और परिचालक के साथ एक महिला गार्ड भी होनी चाहिए या फिर महिला अध्यापक की व्यवस्था होनी चाहिए।

सीबीएसई ने यह भी निर्देश दिए थे कि स्कूल बस में बच्चों के सवार होने के दौरान चालक के मोबाइल पर प्रतिबंध रहेगा। चालक के शराब पीकर बस चलाने के संशय पर तत्काल रूप से मेडिकल कराया जाएगा। हाल यह है कि शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित सीबीएसई मान्यता प्राप्त पब्लिक स्कूलों में गिनती के स्कूलों को छोड़कर बच्चों की सुरक्षा के मानकों का पालन ही नहीं किया गया है।
हल्द्वानी में पब्लिक स्कूल की वैन में मासूम छात्रा के साथ दुष्कर्म की घटना ने अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। अभिभावकों को डर सताने लगा है कि अब उनके बच्चे क्या स्कूलों में भी सुरक्षित नहीं हैं।

घर के बाद यदि बच्चों के लिए कोई सुरक्षित स्थान समझते हैं तो वह है उसका स्कूल। लेकिन बच्चों के लिए  सुरक्षा की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी पब्लिक स्कूल संचालक शायद पैसा कमाने की अंधी होड़ में भूल चुके हैं। कुछ लोगों ने तो  पब्लिक स्कूलों को केवल नोट छापने का जरिया बना रखा है, जहां न तो शिक्षा का स्तर है और न ही सुरक्षा और मूलभूत सुविधाएं। केवल है तो तीन से पांच मंजिला भवन और भारी भरकम फीस लेने के काउंटर।
आपको बता दे कि पिछले साल एक पब्लिक स्कूल में इस तरह की घटना का आरोप लगाकर बवाल होने पर प्रशासन और शिक्षा विभाग नींद से अवश्य जागा था लेकिन समय बीतने के साथ ही बच्चों की सुरक्षा के मानकों की जांच पड़ताल करने वाला जिला प्रशासन और पुलिस एवं परिवहन विभाग बेपरवाह हो गया।

जब कोई घटना होती है तो प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूलों की चेकिंग करने का ढोंग करने के साथ ही केवल नोटिस भेज कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। मासूम बच्चों की सुरक्षा की जांच कौन परखेगा, यह बड़ा सवाल बन गया है। प्रतिमाह बच्चों से लाखों रुपये फीस वसूलने के बावजूद कई स्कूल प्रबंधन बच्चों को सुरक्षा, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ शौचालय और एक स्वस्थ वातावरण उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।
आखिर सवाल उठता है कि स्कूल में आने वाली इतनी फीस का इस्तेमाल प्रबंधन कहां कर रहे हैं, इसकी भी जांच होनी चाहिए। इतना ही नहीं ड्रेस और किताबों के नाम पर मोटा कमीशन ऐंठा जा रहा है सो अलग। कहीं न कहीं शासन – प्रशासन को स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करनी पड़ेगी।
अब सवाल ये उठता है किज़िज़ प्रकार की दुःखद घटनाये सामने आ रही है उसके बाद त्रिवेन्द्र सरकार क्या बड़ा कदम उठाती है ये देखने का इंतज़ार पूरे राज्य को है।

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