नरभक्षी बाघ के आतंक मे जीते है पहाड़ के लोग,पहले मानव की जान जाती है फिर मारा जाता है नरभक्षी बाघ

ख़बर बागेश्वर जिले के गरुड़ विकासखंड के अंतर्गत हरिनगरी ग्राम से है जहा नरभक्षी बाघ ने पिछले 6 महीने से अपनी दहशत का आतंक फैला रखा था। पूरे गाँव वाले दहशत में जी रहे थे आलम ये था कि दहशत कि वजह से ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकलने से पहले सोचने को मजबूर हो जा रहे थे और तो ओर उन्होंने अपने छोटे बच्चों का स्कूल जाना तक बन्द कर दिया था।
लेकिन अब फिलहाल इस दहशत का अंत हो गया है लेकिन इससे पहले इस नरभक्षी बाघ ने हरिनगरी गाँव मे 6 महीने के अंदर 2 मासूमो की जान ले ली थी।
अभी कुछ दिनों पहले एक 7 वर्षीय बालक दीपक कुमार को जब बाघ ने उसको उसके आँगन से उठाया तो पूरे गाँव मे कोहराम मच गया था। और जब सुबह बालक का शव मिला तो पूरा गांव दुख के साथ आक्रोशित हो गया था और फिर ग्रामीणों ने बाघ को मारने का आदेश मिलने तक शासन प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था जब बागेश्वर डी एफ ओ आर के सिंह ने मशहूर शिकारी लखपत सिंह को नरभक्षी बाघ को मारने के लिए नियुक्त किया तो लखपत सिंह ने 3 दिन पहले गाँव मे मोर्चा सम्भाल लिया था और वे बाघ पर बराबर नजर जमाये हुए थे । परसो रात बाघ उनकी गोली का शिकार होते 2 बचा कर भाग निकला था उन्होंने बताया कि शायद गोली उसके बदन को छूती हुई निकल गई थी।                          

लेकिन उसके बाद नरभक्षी बाघ का राज़ ज्यादा दिन चलने वाला नही था कल रात 10 बजे जब लखपत सिंह उसकी रेकी करने अपनी टीम के साथ निकले तो उन्हें बाघ कि आहत महसूस हो गई थी और उन्होंने ने तुरन्त मोर्चा लेते हुए नरभक्षी पर गोली दाग दी जो कि नरभक्षी के सीने को चीरते हुए पार हो गई। इस तरह गाँव के लोगों को नरभक्षी के आतंक से राहत मिली उधर
नरभक्षी के मारे जाने की सूचना मिलते ही हरिनगरी व उसके आसपास के ग्रामीणों ने अब थोड़ा राहत की सांस ली है।
लेकिन ग्राम प्रधान लक्ष्मण आर्या सहित गाँव के लोगो का मानना है कि क्षेत्र में अनेक बाघ अभी भी मौजूद है। उन्होंने मांग की है विभाग से की वो आगामी खतरों को टालने हेतु कोई ठोस कार्यवाही अभी से शुरू कर दे
प्रभागीय वनाधिकारी बागेश्वर आर के सिंह ने बताया कि बाघ को मारने के बाद उसे व्ज्युला रेंज ले आया गया है जहाँ उसका पोस्टमार्टम किया जाएगा।
बोलता उत्तराखंड आपको बता रहा है कि ये नरभक्षी बाघ उत्तराखंड के नामचीन शिकारी लखपत सिंह का 50वा शिकार था। यह भी एक सोचनीय प्रश्न है कि आजतक वन विभाग के पास अपना कोई शिकारी ही नही है और वन विभाग हमेशा से शिक्षा विभाग पर ही इस मामले में निर्भर है। क्योंकि लखपत शिक्षा विभाग में एक शिक्षक के पद पर कार्य करते है। ओर जरूरत पड़ने पर उनको याद किया जाता है पर बोलता है उत्तराखंड कि पूरे पहाड़ में बाघ का आतंक आये दिन बढ़ रहा है अब पूरे पहाड़ मैं सेकड़ो बाघ नरभक्षी हो चुके है पौड़ी गढ़वाल की अगर बात करे तो हर महीने किसी भी गाँव से ख़बर आ जाती है कि नरभक्षी बाघ ने गांव के लोगो को अपना शिकार बना दिया है एक तो पहले से ही पूरे पहाड़ में आये दिन पलयान बढ़ रहा है ऊपर से जो लोग गाँव मे रह रहे है उनको नरभक्षी बाघ का खतरा आये दिन रहता है तो उन्हें तो ये भी नही मालूम होता कि ये। बाघ उनका शिकार करने आया है या उनके जानवरो का आये दिन बाघ ओर मानव के बीच स्ट्रगल देखने को मिलता है कभी कोई भाग्यवान बच जाता है तो कोई दुनिया को अलविदा कह जाता है बहराल राज्य सरकार को इस पूरे मामले मे एक मजबूत कार्य योजना बनानी होगी और इस योजना मैं गाँव वालों की भूमिका भी तय करनी होगी तब स्याद अगर ठीक से कार्ययोजना बनाकर धरातल पर उतरे तो कुछ राहत मिले

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