ना मंत्री जी को कुछ बोलो ना सरकार को आप लोग खुद ही रहो सतर्क ओर सावधान !

आपको बोलता उत्तराखंण्ड  बता  रहा है कि आये दिन  पहाड़ से लेकर मैदान तक सड़क हादसों की घटनाएं लगातार बढ़ रही है और अगर सुत्रो की माने तो अब तक पिछले 17 सालो मे 25 हज़ार से अधिक लोग अकाल मौत के काल मे समा चुके है                                    यही नही बात सिर्फ अगर देहरादून की ही करे तो
इस साल यानी जून तक 158 हादसों में 57 लोगो की मौत हो चुकी है । देहरादून में जहा बढ़ते अपराध ने यहा की शांत वादियों ने ग्रहण लगाया है वही दूसरी ओर सड़क हादसों में लगातार इजाफा हो रहा है तो यहा दून पुलिस सड़क हादसों को रोकने में लगातार नाकाम साबित हो रही है

. इस साल जनवरी से लेकर जून तक 158 सड़क हादसों में 57 लोगों की मौत हो चुकी है. 
ओर अगर पहाड़ की बात करे तो वहा तो आये दिन सड़क हादसे होते है जो थमने का नाम नही लेते फिर चाहे पौड़ी के धुमाकोट बस हादसा हो या फिर टिहरी बस हादसा. जिसमें कई लोगों की जान चली गई ओर छोटी गाड़िया गिरने ओर पलटने की दुःखद ख़बर हर हफ्ते पहाड़ से आती रहती है । 

लेकिन सिर्फ देहरादून की सड़क पर हादसों की बात करे तो ये हादसे बढ़ रहे हैं।
मीडिया मे दून के एसपी ट्रैफिक लोकेश्वर सिंह की सुने तो बीते वर्षो के मुकाबले इस वर्ष सड़क हादसों में काफी कमी आयी है. ओर इन सड़क हादसों को और कम करने का प्रयास किया जा रहा है. वे कहते है कि सड़क हादसों की एक मुख्य वजह सडकों की खस्ता हालत भी है,जिसको इंजीनियर्स की टीम लगतार मॉनिटर कर रही है ।  
एसपी ट्रैफिक लोकेश्वर सिंह ने कहा कि सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या में कमी भी रही है लेकिन भविष्य में कोई भी सड़क हादसा न हो इसके लिए पूरे प्रयास किया जा रहे हैं. बहराल जो बात निकलकर आई है उसकी सबसे बड़ी वजह है सड़को का खराब होना  हैै।

पुलिस वाले भाई जी    अब  ये सड़के किमीशन खा कर बनती है पैसा नीचे से ऊपर तक  तो  जाता ही  होगा तभी जरा सी बरसात मे ये सड़के जवाब दे देती है ओर अगर सड़कें टूटेगी नही तो फिर दोबारा इन पर काम कैसे होगा और फिर किमीशन का मीट भात कैसे खाया जाएगा ? ये तो फितरत मे है इनकी । 

दूसरी बात पहाड़ो मे होते अधिक हादसों के लिए लोकनिर्माण विभाग से लेकर परिवहन विभाग दोषी है जो अपने काम और जवाबदेही को भूल गया है और भूले भी क्यो ना उनको मालूम है ना कि ज्यादा से ज्यादा उनका तबादला यह से वहां तो ही होगा राज्य के 13 जिलो से दूर थोड़े ही जाने वाले है ।फिर जनता जाए इनकी बला से इनको क्या ? ये तो माल कमा रहे है भरपूर अपना अपना हिसा ले रहे है और ऊपर तक पहुचा रहे है बस जय राम जी की । ओर अगर बात सरकार की करे तो उनके पास पहले घायलों को या फिर दुघर्टना मे मारे जाने वाले परिजनो के लिए मुआवजा है देने के लिए दूसरा अधिकारी  से  कर्मचारी का तबादला ओर बात खत्म फिर कुछ दिन बाद सब ठंडे बस्ते में।         

इसलिए आप रहे सतर्क ना पहाड़ की सड़कें बेहतर होगी ना ये किमीशन खोरी बंद होगी और ना दून की सड़क पर गड्ढे पढ़ने बंद होंगे सावधान रहें पहाड़ से लेकर मैदान तक गाड़ी ठीक ओर धीरे चलाये। चालक को परखे ,ओर चालक चलाने वाली गाड़ी को पहले जांच परख ले तब उसे चलाये ।शराब से रहे दूर ओर यातायात के नियमो का पालन करे। दो पहिया वाले हेलमेट खुद भी पहने ओर पीछे बैठने वाले को भी पहनाए । तब जाकर कुछ कमी होगी इन सड़क हादसों पर ओर हा ओवर लोड से बचें फिर वो माल हो या सवारी । घर पर कोई आपका इंतज़ार कर रहा है । धीरे चले भले ही चार मिनट देर से पहुचे ।
बहराल बोलता उत्तराखंड़ तो कहता है कि परिवहन मंत्री जी खुद ही परेशान है कोई भी अधिकारी उनकी सुनने को तैयार नही ओर उनके द्वारा लिए जाने वाले निर्णय पर भी कोई दूसरा ही कुंडली मार के बैठा है ईमानदार ओर कुशल मन्त्री जी की उपेक्षा  हो  रही है बल इसलिए तो बोलता उत्तराखंड़ आप से कह रहा है ना परिवहन विभाग को कोसो ना लोकनिर्माण विभाग को आप स्वयं रहे सावधान तब ही लगेगा इन दुर्घटनाओं  पर विराम ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here