मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र जी की टेंशन कम होने का रास्ता!

ख़बर घनसाली से है जहा
बालगंगा लाटा तहसील के पास बाइक मै सवार दो लोग सड़क हादसे मे घायल हो गये

 

आपको बता दे कि जानकारी अनुसार एक की हालात नाजुक बनी हुई है जिनका नाम गब्बर सिंह निवासी सुनारगांव है तो
दूसरे दिनेश रतूड़ी को आयी है हाथ ओर पैरों में चोट।
आपको बता दे कि बालगंगा तहसीलदार मोहनलाल आर्य , घायलों को लेकर पहुँचे थे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलेश्वर

जिसके बाद नाजुक हालत मे। गब्बर सिंह को एम्स ऋषिकेश के लिए रेफेर किया गया है

आपको बता दे कि सबसे बड़ी बात ये रही कि घायल को वहां एम्बुलेंस ही नही मिल पाई

जिसके बाद निजी वाहन से घायल को ले जाया गया एम्स अस्पताल ऋषिकेश
आपको बता दे कि हर बार स्वास्थ्य सेवाओ के लिहाज से सारी व्यवस्थाओं की पोल खुल जाती है।

ओर पूरे पहाड़ से हर रोज कोई ना कोई ख़बर  स्वास्थ्य  महकमे की   कमी  को बया करती रहती है
बोलता है उत्तराखंड की है जीरो टालरेश की सरकार इसमे आपका दोष नही क्योकि ये पहाड़ पिछले 17 सालों से ही बीमार है तो भला आप इसे कहा 18 महीनों मे ठीक कर पायेगे। आप से तो बस ये निवेदन है कि स्वास्थ्य महकमे का सिर्फ एक अलग मन्त्री हो उनके पास ओर विभाग ना हो वो सिर्फ अपने विभाग पर ही फ़ोकस करे तो बहुत कुछ अच्छा रिजल्ट आएगा ये बोलता उत्तराखंड़ को विस्वास है । क्योंकि वो मंन्त्री जी सिर्फ और सिर्फ स्वास्थ्य विभाग के लिए जवाब देही जनता की नज़र मे होंगे और ठीक उसी प्रकार कुछ अधिकारी भी । अब फैसला जीरो टालरेश के मुखिया को लेना है क्योकि यही विभाग मुख्यमंत्री पर दाग लगा रहा है क्योकि अभी तक स्वास्थ्य विभाग खुद मुख्यमंत्री के पास है ओर फिर बोल रहा है बोलता उत्तराखंड की ये सब पिछले 16 सालो का परिणाम है जो सिर्फ 18 महीने मे ठीक नही हो सकता हा जो हो सकता है वो ये है कि राज्य के हित के लिए सिर्फ एक ही विभाग वाला स्वास्थ्य मंन्त्री हो, कहने कम मतलब है कि उन मन्त्री जी के पास सिर्फ एक विभाग हो ।और एक ही विभाग वाला शिक्षा मंन्त्री हो, अगर ये हो जाये तो जीरो टॉलरेश वाली सरकार की बहुत बडी जीत होगी । क्योकि ये दोनों ही वो विभाग है ( शिक्षा , स्वास्थ्य) जहा से आये दिन शिकायत का पिटारा निकलता रहता है ओर जो सही भी है भले ही डबल इज़न की सरकार अपनी तरफ से प्रयास कर रही हो पर  इन महत्वपूर्ण विभाग पर अभी बहुत महत्वपूर्ण तरीके से फ़ोकस किया जाना बाकी है ।

 

हमने देखा है पिछले 17 सालों से की शिक्षा और  स्वास्थ्य  महकमे  को लेकर अब तक कि सभी सरकारों पर लगातार आरोप लगते  है पर हालात नही सुधरे प्रयास सब ने किए  पर सफलता नही मिली। इसलिए  फिलहाल इन दो महत्वपूर्ण विभाग के लिए सिर्फ अलग अलग दो मंन्त्री होने  चाइये जो सिर्फ मुख्यमंत्री   के आगे इन ही महत्वपूर्ण महकमे के लिए जवाब देही हो  ।यकीन ये काम हो गा तो काफी हद तक आपको  सुधार नज़र आएगा  ।और तब जाकर मुख्यमंत्री की टेंशन कम  होगी ।

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