मुख्यमंत्री जी यहा कारगिल युद्ध मे शहीद जवान के माता पिता रोते है खून के आँसू!

बोलता है उत्तराखंड़ कि राज्य की अब तक कि सरकारो ने शहीदों के नाम पर सिर्फ कोरी घोषणाओ के सिवा क्या किया जब जब देव भूमि लाल भारत माता की रक्षा के लिए शहीद हुवा तब तब राज्य के नेता और मुख्यमंत्री शहीद की अंतिम यात्रा मे शामिल होते है और बडी बडी बाते करते है कि हम रखेगे उनके परिवार का ख्याल पर सिर्फ बोलते है करते कुछ नही जिसका उदहारण बोलता उत्तराखंड़ आज आपको विजय दिवस के  दिन देगा                 आपको बता दे कि
आज यानी 26 जुलाई को कारगिल युद्ध में भारत की विजय के 19 साल पूरे हो गए हैं। ओर 1999 में ऑपरेशन विजय के तहत करीब 18000 फीट की ऊंचाई पर कारगिल में पाकिस्तानियों के साथ लड़ाई लड़ी गई। आपको बता दे कि इस जंग में 527 भारतीय जवान शहीद हुए थे, जिनमें से 6 जाबांज नैनीताल जिले के बिंदुखत्ता गांव के थे। ओर एक ही गांव के इन 6 जाबांजों ने वीरता की गाथा लिखी। ओर दुःख इस बात का है कि आज भी उनके परिवार को सरकार की हर संभव मदद की घोषणा का पूरा होने के इंतजार है। सरकारे आई और चली गई। मुख्यमंत्री बदलते रहे पर शहीद जवानों के परिवार का दर्द किसी ने कम नही किया क्योकि ये तो सिर्फ देहरादून के गाधी पार्क मे आज के दिन जाकर दो फूल चढाकर बडी बडी बाते कर ओर जिंदाबाद के नारे लगा कर बस चल देते है उसके आगे कुछ नही दुर्भाग्य तो इस बात का है कि आज उत्तराखंड़ के पूर्व सैन्य अधिकारी बीजेपी, कांग्रेस मे बट गए है वो भी सब एक साथ आने को तैयार नही होते और चुपी साध लेते है


किसी ने कहा था की ( शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशा होगी ) अब ये सिर्फ सुनने में ही अछी लगती है क्योंकि अब वो मेले लगते दिखाई नही देते । जरा याद करो साल 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना को मुंहतोड़ जवाब देने के लिये नैनीताल जिले के बिंदुखत्ता गांव के 6 जांबाज सैनिकों ने अपनी जान की कुर्बानी देकर भारत माता के लिये शाहिद हो गए थे।
कारगिल युद्ध में शहीद हुए बिंदुखत्ता के जवान जो
शहीद देवीदत्त खोलिया
शहीद नंदबालभ देवराड़ी
शहीद गोविंद सिंह पपोला
शहीद राम सिंह धामी
शहीद महेश सिंह भैसोड़ा
शहीद जीवन सिंह खोलिया  
आज तक इन जवानों के परिवार वाले खून के आंसू रो रहे है क्योंकि। ना केंद्र और ना राज्य सरकार ने इन शहीदों के परिवार वालो की कोई मदद की हा परिजनों को हर संभव मदद देने का दावा किया लेकिन, कारगिल युद्ध के 19 साल बाद भी शहीदों के परिवार अपनी माली हालत पर आंसु बहा रहे हैं।
क्योकि राजनेता ओर राजनीतिक फल दल तो सिर्फ शहीदों की शहादत पर बडी बडी बाते करते है उसके सिवा कुछ नही बॉर्डर पर शहीद होने पर सरकार की तरफ से लंबी चौड़ी घोषणाएं की जाती हैं। सरकारें परिवार को हर संभव मदद देने का वादा तो करती हैं लेकिन, जमीनी हकीकत कुछ और निकलकर आ जाती है 

आपको बता दे कि बिंदुखत्ता क्षेत्र के कई ऐसे शहीदों के परिवार है, जिनके घर तक आज भी सड़क नहीं पहुंची और न ही इनके परिवारों को कोई सरकारी मदद दी जा रही है। सरकार शहीदों के नाम पर सड़क, स्कूल, मेडिकल कालेज खोलने की बात करती है, शहीदों के परिवारों को अर्थिक मदद की घोषणा भी हर बार होती है लेकिन, सिर्फ क्या जनता के दिखावा के लिये। यहां तक की शहीदों को बच्चों को सरकारी नौकरी देने का दावा किया गया लेकिन, उनके बच्चे आज भी बेरोजगार घूम रहे हैं।

बिदुखत्ता के शहीद जीवन चंद्र खोलिया की माता और पिता खेती करके अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। उनके पिता का कहना है कि उनके बेटा 2002 में सियाचिन एलसी सेक्टर में दुश्मनों से लडाई के दौरान शहीद हो गया था। सरकार ने उन्हें आश्वासन तो दिया, पर आज तक उनके बेटे के नाम पर न तो स्कूल बने न सड़क बनी। यहां तक की सौर्य दिवसः पर उनके इलाके में शहीदों के लिए कोई कार्यक्रम आयोजिन नहीं किये जाते। हम आज भी अपनी लड़ाई लड़ रहे है
तो वही आज उत्तराखण्ड ने शौर्य दिवस के रूप में विजय दिवस मनाया ओर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने कहा कि उत्तराखंड के स्कूलो में अब कारगिल युद्ध का पढ़ाया जयेगा इतिहास
कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाए जा रहे विजय दिवस पर पूरे देश में शहीदों को आज याद किया जा रहा है,वहीं उत्तराखंड देश का एक ऐसा राज्य है जो कारगिल विजय दिवस को शौर्य दिवस के रूप में मना रहा है । विजय दिवस को शौर्य दिवस के रूप में मनाए जाने को लेकर उत्तराखंड के सौनिकों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का धन्यवाद अदा किया है
पाकिस्तान की ओर से भारतीय सीमा में कई गयी घुसपेठ का भारत के जाबाज सौनिकों ने मुंह तोड़ जवाब दिया और 45 दिनों तक चले युद्ध को भारत ने 26 जुलाई 1999 को जीत लिया
उत्तराखंड के सौनिकों ने दिखाया था अदम्य साहस
उत्तराखंड को वीर भूमि कहा जाता है,और कारगिल युद्ध मे भी उत्तराखंड के सौनिकों ने अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मनो के दांतों तले चने दबाव दिए,कारगिल युद्ध मे उत्तराखंड के 75 सौनिकों ने अपने प्राणों को न्यौच्छावर कर दिया था,वही पूरे देश के 527 सैनिक कारगिल युद्ध मे शहीद हुए थे,जबकि 1000 से ज्यादा भारतीय सैनिक शहीद हुए थे,जबकि भरतीय सेना ने 4 गुना ज्यादा घुसबैठियो को मार गिराया था।
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर उत्तराखंड ने विजय दिवस को शौर्य दिवस के रूप में मनाने वाला पहला राज्य बना है,मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पूर्व सौनिकों की मांग पर इस दिन को शौर्य दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। शौर्य दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ग़ांधी पार्क स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सीएम ने शहीदों के परिजनों को सम्मानित भी किया। साथ ही सीएम ने कहा कि शौर्य दिवस पर स्कूलो में कारगिल युद्ध का इतिहास छात्रों पढ़ा जाएगा। इसको लेकर सरकार शासनादेश भी निकलेगी।

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