रंजना नेगी की रिपोर्ट

मेरे पहाड़ की माताओ, बहनो का जीवन भी पहाड़ जैसा है और पहाड़ जैसा है उनका दर्द ।इन्ही माताओ ओर बहनो की वजह से ही आज पहाड़ बचा हुवा है ।
सरकार कहती है पलायन मत करो पहाड़ो मे ही रहो , ओर आदि आदि बहुत कुछ कहती है सरकार।

आप सब जानते है कि सरकार क्या क्या कहती है और क्या करती है ।
पर जो कुछ नही कहते इस उम्मीद के साथ कि आज नही तो कल सब ठीक हो जायेगा वो है पहाड़ की मातृशक्ति जिन्हें मेरा सलाम ।
बोलता उत्तराखंड का सलाम ।


जरा सोचिए जो सुबह घर से जंगल मे घास लेने जाती है और घर वापस ही नही आती क्योकि ख़बर आती है कि पेड़ से गिर गयी कही मातृशक्ति की जान चली जाती है तो कही ज़िंदगी अगर बच जाए तो फिर उनके तो हाथ पैर काम नही करते वो लाचार हो जाती है क्योंकि कुछ कर नही पाती । ओर यही कहती है कि इससे अच्छा तो मर ही जाती तो ठीक था।


ये मातृशक्ति सुबह से स्याम तक खेतो मे काम करती है ओर फल या फसल लगने से पहले इनकी फसलो को बादर, लंगूर,जंगली सुवर बर्बाद कर देता है। सोचिये क्या बीतती होगी इन पर ।


ये पहाड़ की मात्र शक्ति जब गर्भावस्था के दौरान होती है ओर नवजात के जन्म के समय जब इनको गाड़ी ना मिले, तो सड़क पर ,या किसी पूल किनारे ही नवजात को जन्म दे देती है ।और जो अस्पताल तक जैसे तैसे पहुँच भी जाये तो डॉक्टर ही ना हो या ठीक से इलाज ना हो। कही मात्रशक्ति या तो दम तोड़ देती है या उनका नवजात जन्म लेते ही इस मतलबी दुनिया को अलविदा कह देता है जरा सोचो क्या गुजरती होगी उस मात्रशक्ति पर ।
जैसे तैसे अपने बच्चों की तरह ये पहाड़ो की मातृशक्ति अपने जानवरो को पालती है गाय, बकरी, बाछी, कुत्ता , भेड़, बैल, ओर जब इन्हें मालूम चलता है कक रात को या दिन में बाघ इनके बच्चे जैसे जानवर को उठा ले गया उसे मार दिया सोचो क्या गुजरती है इन पर ।
अरे साहब जानवर तो छोड़ो जब कोई बाघ आदमखोर बनकर किसी की माँ को उठा ले जाता है मार देता है ,या किसी के पिता जी , भाई जी , चाचा जी , बेटे , आदि आदि नाते रिश्तेदार को तो क्या गुजरती है इस मातृशक्ति पर जरा सोचिये साहब ।


चलो आज मै जायदा दूर की बात नही करता अभी की ही बात करता हूँ कल तारीख 1 मार्च को पोड़ी गढ़वाल के अंतगर्त प्रातः 11:00 बजे श्रीमती सुशीला देवी पत्नी श्री सतेंद्र सिंह, ग्राम बैरगांव, विकासखंड- द्वारीखाल, पौड़ी गढ़वाल की दुःखद घटना है जहां ये चाची जंगल में घास लेने गई हुई थी ओर उसी दौरान उन पर अचानक वहां भालू ने हमला कर दिया ओर चाची सुशीला देवी भालू के प्रहार से बुरी तरह ओर गंभीर चोटिल हो गई । मै उनकी तस्वीरों को दिखा नही सकती क्योंकि उनका पूरा चेहरा भालू ने खा लिया या नस्ट कर दिया । उस समय
स्थानीय प्रधान एवं गांव वालों की मदद से चाची सुशीला देवी को जेस तैसे बचा कर उन्हें कोटद्वार प्राथमिक चिकित्सा के लिए ले गये किंतु महिला की गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें एम्स के लिए रेफर कर दिया जहा वे ज़िंदगी ओर मौत से लड़ रही है । कल वही के क्षेत्रीय विधायक एवं प्रदेश के पर्यटन सिंचाई कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने भी भालू के प्रहार के कारण गंभीर रूप से घायल सुशीला देवी की यथास्थिति को देखने के लिए एम्स पहुंचे थे और उन्होंने उनके स्वास्थ्य का हाल चाल जाना तथा चिकित्सकों से विमर्श किया उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए की श्रीमती सुशीला देवी का यथाशीघ्र उचित इलाज होना चाहिए उन्होंने जंगली भालू को पकड़ने के लिए वन विभाग को निर्देश दिए हैं गौरतलब है कि पहले भी कई बार भालू ने जंगल में जा रही महिलाओं को अपना शिकार बनाया है।
सुना आपने ये है पहाड़ की मातृशक्ति का दर्द जो वो बया नही करती सिर्फ सहती रहती है और खुद तड़पती रहती है इर इसी बीच कही मातृशक्ति दुनिया को अलविदा भी कह देती है ।ये सिर्फ एक चाची की बात नही है पूरे पहाड़ की मातृशक्ति पहाड़ में पहाड़ जैसी चुनोतियो के बीच पल पल डर ओर संघर्स के बीच ज़िन्दगी काट रही है।
अब आप ये मत कहना कि जो लोग पहाड़ में रहेंगे उनको तो इन सब चिजो से बातो से गुजरना पड़ेगा ही । ओर बात भी अगर मान ले आपकी एक पल के लिए की ठीक कह रहे हो ।


पर साहब।
जिनको चुन रहे है पिछले 17 सालों से जो बन रहे है विद्यायक , मंत्री, मुख्यमंत्री , क्या उनका फ़र्ज़ नही की वो पहाड़ की तकलीफ को कम करे । पहाड़ की मातृशक्ति को राहत दे । तामाम पेयजल की योजनाएं लटकी पड़ी है, पहाड़ स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से आज भी बीमार है, बादर , सुवरो ने खेती को ही बर्बाद कर डाला है और अब खेत बंजर हो रहे है । अछी मतलब गुडवत्ता भी
पहाड़ से कोसो दूर है। जंगली जानवरों को तो छोड़ो इंसान को भी बाघ या भालू मार रहा है ।


सरकार सिर्फ मुवाज़ा देकर बात खत्म कर देती है। वन मंत्री हरक सिंह रावत को सोचना नही करना होगा कि कैसे पहाड़ की महिलाओं के दर्द को दूर किया जा सके । सिर्फ गढ़वाली बोलने से काम नही चलेगा गढवाली यो के लिए कुछ नही बहुत कुछ करके दिखाना भी होगा ।
फिर बात चाहे सतपाल महाराज की हो या रमेश पोखरियाल निशंक की, दलीप रावत की , सुरेन्द्र नेगी की , ओर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत से तो पूरे पहाड़ की मात्र शक्ति को उम्मीद है कि आप हमको निराश नही करेंगे ।अभी तीन साल ओर है आपकी सरकार के आप पिछले सरकारों और मुख्यमंत्रीयो की तरह पहाड़ वासियो को निराशा नही करेंगे ख़ास कर पौड़ी गढ़वाल को।क्या नही दिया पोड़ी गढ़वाल ने उत्तराखंड को देश को एक से बढ़े एक नेता दिये ।पर किसी ने भी ठीक से ओर पूरी इच्छा शक्ति से पौड़ी गढ़वाल का विकास सिर्फ खाना पूर्ति टाइप से किया।है खेरासेंड के लाल आपकी सरकार से उम्मीद है और आप से ख़ास कर मातृशक्ति को की आप केंद्र सरकार के सहयोग से पहाड़ की मात्र शक्ति के दुःख दर्द को काफी हद तक कम करेगे।



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