मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में डेरी विभाग की समीक्षा करते हुए निर्देश दिये कि दुग्ध उत्पादों की वैल्यू एडिशन पर ध्यान दिया जाय। किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि के लिए उत्पादों की ब्रांडिंग पर भी फोकस किया जाय।

दुधारू पशु जो क्रय किये जा रहे हैं, बाहरी राज्यों से हो। इससे राज्य कि दुग्ध उत्पादकता बढ़ेगी। दुग्ध और उसके संबधित उत्पादों के जो ग्रोथ सेंटर बनाये जा रहे हैं, सभी ग्रोथ सेंटरों का डिजाइन एक जैसा हो। दुग्ध एवं उससे संबधित उत्पादों के लिए राज्य में समृद्धि ग्रोथ सेंटर बनाये जा रहे हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य के 10 पर्वतीय जनपदों में दुग्ध एवं उससे संबधित उत्पादों पर आधारित 30 ग्रोथ सेंटर खोले जा रहे हैं। इस वर्ष के अन्त तक 2500 दुधारू पशु क्रय करने का लक्ष्य रखा गया है।
सहकारिता विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि किसानों को 3 लाख रूपये तक का जो ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहे है, इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाय। लाभार्थियों को ऋण लेने में असुविधा न हो इसके लिए बैंकर्स से लगातार संपर्क स्थापित किया जाए। पात्र लोगों को इस योजना का लाभ मिले। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये धान एवं गेंहू क्रय केन्द्रों के माध्यम से किसानों के भुगतान में विलम्ब न हो। उधम सिंह नगर में कुछ छोटे किसानों को धान विक्रय करने में समस्या की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित हो कि धान क्रय केन्द्रों में किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो। उन्होंने कहा कि गंगा गाय महिला डेरी योजना के तहत जो दुधारू गायें दी जा रही हैं, इस योजना से लोगों को कितना फायदा हो रहा है, दुग्ध उत्पादन में कितनी वृद्धि हो रही है और इन लोगों की कोई समस्या तो नहीं है। लाभार्थियों से बातचीत कर इसका फीडबैक भी लिया जाय। पशुओं के लिए आहार के लिए साईलेज की पर्याप्त व्यवस्था हो, इसके कुछ मॉडल ब्लॉक का चयन किया जाय। साइलेज उत्पादन किसानो की आर्थिकी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस अवसर पर सहकारिता राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, मुख्य सचिव ओम प्रकाश, सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुन्दरम, निदेशक डेरी जीवन सिंह नगन्याल एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।


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