मेरे सपनों का मुख्यमंत्री!

मेरे सपनो का मुख्यमंत्री
ना मुझे मुफ्त की सुई ना लेपटाप चाहिए।
मुझे सीड़ीनुमा खेत की नींव के पत्थर पर लिखे सवाल का जबाब चाहिए।
लाटू दादा के हाथों के छालों का हिसाब चाहिए।
पलायन कर गये बेटे की मां के आँसुओं का इलाज चाहिए।
बारह पकवान की थाल नहीं, दिल में सन्तोस हाथ में कोदे का डाट चाहिए।
चुनावी वादों की बरसात नहीं, रोट-अर्से की परात चाहिए।
न तेरा घर,मकान न पलाट चाहिए।
विरान पड़ा पहाड़ कोई तो दस्तक हो।
मुझे मेरा घराट चाहिए।
दीवार पर टंगी शहीद की तस्वीर पर विकास का हार चाहिए।
घुटने के बल चलने.वाले नौनीहाल के लिये
भविष्य का लिबास चाहिए।
मुझे माधो सिंह भण्डारी सा त्याग
और वीर चन्द्र सिंह गढवाली जैसी धाक चाहिए।
बन्दा कड़क हो पर बेदाग चाहिए।
चट्टान बड़ी सख्त है हथौड़ा भी फौलादी चाहिए।
बस मुझे ऐसा ही मुख्यमंत्री चाहिए।।.                            संजय  पंचभेया की कलम से …

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