एक मेजर की चिता की आग ठंडी भी नहीं हुई कि उत्तराखंड के एक और लाल मेजर ढौडियाल भी शहीद हो गये

उत्तराखंड ने फिर खोया अपना एक लाल, कल होगा अंतिम संस्कार

देहरादून। आपको बता दे कि सोमबार को एक ओर जहा राजौरी आईईडी धमाके में शहीद चित्रेश को आखिरी विदाई दी गई। वहीं दूसरी ओर देहरादून का एक और लाल सीमा पर आंतकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गया। आपको बता दे कि कश्मीर के पुलवामा जिले के पिंगलिन इलाके में रविवार को आधी रात को शुरू हुई मुठभेड़ में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के मेजर विभूति ढौंडियाल (34) शहीद हो गए हैं। उनका आवास देहरादून के नेश्विवला रोड के 36 डंगवाल मार्ग में है। शहीद मेजर का संबंध 55 राष्ट्रीय रायफल्स से है। पिताजी स्व. ओमप्रकाश ढौंडियाल सीडी एयरफोर्स में थे। 2012 में उनका निधन हो गया था। 2018 में शहीद का विवाह हुआ था। उनकी पत्नी नितिका कश्मीरी पंडित हैं। आपको बता दे कि तीन बहनों की इकलौते भाई थे मेजर शहीद मेजर । तीनों बहन उनके बड़ी हैं। घर में उनकी पत्नी, दादी और मां को मेजर डीएस ढौंडियाल की शहादत के बारे में नहीं बताया गया था। लेकिन बाद में सेना के अफसरों ने पत्नी को शहादत की खबर दे दी। उनके घर के बहार जनता जुटने लग गई है।
वही शहीद मेजर के बचपन के दोस्त मयंक खंडूरी ने बताया कि एक साल पहले ही उनकी शादी हुई थी। वह अपनी शादी से बेहद खुश थे। दो माह पहले ही शहीद ढौंडियाल छुट्टी पर घर आए थे। वे बेहद मिलनसार थे। रविवार रात से जारी इस मुठभेड़ में मेजर समेत 4 जवान शहीद हो गए जबकि 1 जवान घायल है। पूरे इलाके को घेरकर सेना द्वारा ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा है। 2 आतंकी मार गिराए गए है
वही शनिवार को नौसेरा सेक्टर में नेहरू कॉलोनी निवासी पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर एसएस बिष्ट के छोटे बेटे मेजर चित्रेश बिष्ट शहीद हो गए थे। आज हरिद्वार में उनका अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया।नेहरू कॉलोनी निवासी पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर एसएस बिष्ट के छोटे बेटे मेजर चित्रेश बिष्ट शनिवार को नौसेरा सेक्टर में शहीद हो गए थे। इससे पहले शहीद के नेहरू कॉलोनी आवास पर पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। जहां उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों भारी हुजूम उमड़ पड़ा। इस दौरान शहीद चित्रेश अमर रहे, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगते रहे। सोमवार को सुबह 8रू30 बजे शहीद का पार्थिव शरीर उनके आवास पर लाया गया। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, देहरादून के मेयर सुनील उनियाल गामा ने शहीद को श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी आवास पर पहुंच कर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। घर के करीब पांच सौ मीटर तक लोग हाथ में शहीद की तस्वीर लिए उनके सम्मान में नारे लगाते रहे। इस दौरान पुलिस और सेना के अधिकारियों ने भी शहीद को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। इस दौरान लगातार पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगते रहे। इसके बाद सेना के वाहन में उनकी अंतिम यात्रा शहर में निकली। अंतिम यात्रा में भारी संख्या में लोग मौजूद रहे। करीब साढ़े 11 बजे शहीद का पार्थिव शरीर हरिद्वार के खड़खड़ी घाट पहुंचा। जहां अंतिम संस्कार से पहले उनके भाई को शहीद की वर्दी और तिरंगा सौंपा गया। वहां मौजूद लोगों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी। इसके साथ पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। यहां शहीद के चाचा के बेटे हर्षित बिष्ट ने मुखाग्नि दी।
आपको बता दे कि चित्रेश की सात मार्च को शादी होनी थी, जिसके लिए उन्होंने पिता से 28 फरवरी को छुट्टी आने का वादा किया था। परिवार और रिश्तेदार के लोग अपनी अपनी पसंद के कपड़े और चीजें खरीदने में व्यस्त थे, मगर चित्रेश शादी में मां को अपनी पसंद की साड़ी में देखना चाहते थे।उन्होंने मां से कहा था, मां सरहद से लौटकर तुम्हारे लिए अपनी पसंद की साड़ी लेकर आऊंगा, वही साड़ी तुम मेरी शादी में पहनना। बेटे के शहीद होने की खबर के बाद मां रेखा बिष्ट अब उसके इस वादे को याद कर ही रो रही हैं। देश पर जान न्यौछावर करने वाले शहीद मेजर चित्रेश सिंह बिष्ट का पार्थिव शरीर रविवार को सुबह करीब 11रू30 बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचा। यहां से हेलीकॉप्टर से गढ़ी कैंट स्थित जीटीसी हैलीपैड लाया गया। पार्थिव शरीर को मिलिट्री हॉस्पिटल में रखा गया है। चित्रेश के बड़े भाई नीरज बिष्ट भी रविवार की शाम ब्रिटेन से दून पहुंच थे
अभी मोहन लाल रतूड़ी की चिता की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि विगत दिवस शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट का शव देहरादून पहुंचा और आज सुबह उसकी अंतिम यात्रा हरिद्वार के लिए रवाना हुई। ओर वे पंचतत्व मै विलीन हो गए तभी ही दुःखद खबर आई कि एक और उत्तराखंड का लाल मेजर विभूति शहीद हो गया।
मेजर विभूति की आज सुबह खबर आई कि वह पुलवामा आतंकी हमले में एनकाउंटर में वीरगति को प्राप्त हो गया। मेजर विभूति की तीन बहने हैं जिनमे से दो बहनों की शादी हो गयी। भाई बहनों में सबसे छोटा था शहीद मेजर। शहीद मेजर की आयु लगभग 34 वर्ष की बताई जा रही है तथा पिछले वर्ष ही अप्रैल में शादी हुई थी।डंगवाल मार्ग नैशविल्ला रोड, पर 1950 से रह रहा परिवार सभी से घुलमिलकर रहता है। शहीद मेजर विभूति के पड़ोसियों ने दुखी मन से बताया कि विभु हर तरह से सामाजिक दृष्टि से एक्टिव रहता था । शहीद मेजर के बड़े बहनोई पूजा के पति बीकानेर में सेना में हैं तथा छोटे बहनोई अमेरिका में धस्माना जी आई टी कंपनी में हैं। पिछले वर्ष अप्रैल में शादी हुई थी। पत्नी दिल्ली में सर्विस करती है उनके दोस्तों घुलमिलकर खुश मिजाज विभू को याद करते हुए और आस पास के पडोसी उसे वेधडक पन की बातें याद कर बिलख पड़े उनेह यकीन नही हो रहा कि ऐसा भी हुआ होगा।
वह 34 वर्ष के थे। गत वर्ष अप्रैल में ही मेजर विभूति का विवाह फरीदाबाद निवासी निकिता कौल से हुआ था। निकिता कश्मीर विस्थापित परिवार से ताल्लुक रखती हैं। मेजर विभूति जनवरी के पहले सप्ताह में अप्रैल में शादी की पहली सालगिरह पर देहरादून आने का वादा कर ड्यूटी पर गए थे।
तीन बहनों की इकलौते भाई
सोमवार को सुबह उनकी शहादत की खबर पत्नी निकिता कौल के फोन पर आई। निकिता उस समय दिल्ली जा रही थी। खबर सुनकर किसी तरह उन्होंने मेजर विभूति की मां सरोज ढौंडियाल को फोन पर उनके पैर में गोली लगने और अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी। वह दिल की मरीज हैं, इसलिए देर शाम तक भी उन्हें शहादत की खबर नहीं दी थी।
शाम करीब 5.30 बजे शहीद का पार्थिव शरीर सेना के विमान से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पहुंच गया। जहां से सेना के वाहन में पार्थिव शरीर को मिलिट्री हॉस्पिटल ले जाया गया। मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर घर पर लाया जाएगा। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। देर शाम, शहीद मेजर की पत्नी निकिता और उनके परिजन भी देहरादून पहुंच गए। वह तीन बहनों के इकलौते भाई थे। पिता का 2012 में निधन हो चुका है। पत्नी दिल्ली की एक कंपनी में नौकरी करती हैं।
दादा, पिता थे सीडीए एयरफोर्स में
शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल के दादा स्व. केशवानंद ढौंडियाल और पिता
स्व. ओमप्रकाश ढौंडियाल रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक(वायुसेना) देहरादून में ऑडिटर के पद पर तैनात थे।
घर के बाहर जुटी रही भीड़
मौसम खराब होने के बावजूद जिसने भी मेजर विभूति की शहादत की खबर सुनी, वह उनके घर की और दौड़ पड़ा। मां के दिल की मरीज होने की वजह से किसी को भी घर के भीतर तो नहीं जाने दिया गया लेकिन दिनभर लोग डंगवाल मार्ग पर जुटे रहे।
शहीद मेजर तीन बहनों के इकलौते भाई थे। तीनों बहनें उनसे बड़ी हैं। घर में उनकी पत्नी, दादी और मां को मेजर डीएस ढौंडियाल की शहादत के बारे में नहीं बताया गया था। लेकिन बाद में सेना के अफसरों ने पत्नी को शहादत की खबर दे दी। वह कश्मीर विस्थापित परिवार से हैं। उनका परिवार दिल्ली में रहता है। पत्नी निकिता आज सुबह ही ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। शहीद की मां सरोज दिल की मरीज हैं। उन्हें अभी तक जानकारी नहीं दी गई है।


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