मासूमो की जान जोखिम मे! अगस्त से नही जायेगे स्कूल पढ़े पूरी ख़बर

 

अब बोलेगा उत्तराखंड़

बोलता उत्तराखंड़ मतलब आप सब की बात और आपके मुद्दे ओर आपकी आवाज । बोलता उत्तराखंड़ आज आपको उस स्कूल की तस्वीर दिखा रहा है जो खुद तो अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है साथ मे 27 छोटे छोटे बच्चों के परिवार को भी डरता है जो यहा पड़ रहे थे जी हा हम बात कर रहे है राजकीय प्राथमिक विद्यालय कांडा रिखणीखाल … की क्योंकि ये विद्यालय भवन आज भी बदहाल . है और इसका इतिहास बहुत पुराना पूरी ख़बर को विस्तार से आप जाने 

दरसल सन् १९६४ में स्थापित ओर सन् १९६८ में निर्मित रिखणीखाल प्रखंड के ग्रामसभा कांडा के प्राथमिक विद्यालय का भवन अब बेहाल है आपको बता दे कि इसका मूल भवन जिसे ग्रामीणों ने श्रमदान कर स्वयं किसी समय बनाया वह आज अंदर से तो ढहा ही है ,और लगातार ओर एकतरफ ढह भी गया है.. जानकारी अनुसार इस विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या २७ है जिसमें से 2 बच्चे दुसरे गाँव से यहां शिक्षा लेने आते है           क्योकि यहा का शिक्षक उन सबको अच्छा पढ़ाते है। आपको बता दे कि इस विद्यालय के अतिरिक्त कक्ष में आंगनबाड़ी केंद्र भी चल रहा है जिसको भी अब खतरा है ओर ये डर इतना बड़ा की अब ..नोनिहालों का ग्रामीणों ने आंगनबाड़ी मे भेजना ही बंद कर दिया है। क्योकि वहां उनको डर लगता है कि कब क्या हादास ना हो जाये आपको बता दे कि सितंबर माह सन् २०१० की तबाही के दौरान इस भवन में जंगल से बरसाती पानी के साथ पूरी तरह मलबा घुस चुका था तबसे जीर्ण हुये इस भवन के हालात बिगड़ते गए पर कोई सुध लेने को तैयार नही हुवा जिसके बाद यहा से चंद कदम पर दो कमरों मे कुछ दिनों से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है पर दर्द भरी बात ये है कि ये दोनों कमरे भी टप टप हो रहे है तो आंगनबाड़ी भी यही से संचालित होती है और इन कमरों के हाल भी ठीक नही गुरु जन बोलते है की भवन पर किसी तरह कक्षा संचालन का कार्य चल रहा है ..बिद्यालय के संचालक श्री दिनेश बिष्ट जी बताते है कि अनेकों बार bdo, cdo व क्षेत्रीय विधायक को सूचित करने के बाद भी कोई संज्ञान नही लिया गया।।        लगभग पांच नाली के भूभाग पर फैले परिसर में यद्यपि आपदा के बाद कक्ष बने लेकिन वह भी जैसे तैसे दुकान की तरह दो कमरे बने जिनकी छत से पानी व सीमेंट टपकते रहते हैं व बच्चों के सिर पर लगता है ..यही हाल अतिरिक्त कक्ष का है जिसमें आंगनबाड़ी चल रही है और वन विभाग द्वारा प्रदत्त भवन भी कब ढह जाये भगवान भरोसे है ..एसएमसी अध्यक्ष जसोदा देवी का कहना है कि कई बार बैठकों के माध्यम से प्रस्ताव बनाकर दिये लेकिन  कोई सुनने को राजी नहीं ..         .बच्चों को ऐसी जगह भेजना जान जोखिम में डालने वाला है बेहतर है कि हम या तो आंदोलन की राह पर जायें या तीन किमी.दूर प्रावि.दियोड़ के लिये बच्चे भेजने को मजबूर होंगे …प्रधानाध्यापक दिनेश बिष्ट का कहना है कि किसी तरह बच्चों व स्वयं की सुरक्षा को देखते हुये कक्षा का संचालन हो रहा ..२०१० की आपदा के बाद से लगातार स्थानीय विधायक ,जिलाधिकारी व विभाग को प्रस्ताव दे देकर थक चुके लेकिन धरातल पर कुछ भी संभव न हुआ ..ग्रामीणों ने आखरी प्रस्ताव बनाया है विभाग के लिए अगर अब काम न हुआ तो कोई अनहोनी घटना हो इस से पहले स्कूल पर ताला लगाने की बात हो चुकी है ओर जानकारी अनुसार ये ताला स्कूल पर अगस्त के पहले हफ्ते मे कभी भी लग सकता है । अब बोलता है उत्तराखण्ड़ की जहा छात्रों की सख्या है ही नही वहां टीचर भी फूल और स्कूल भी मस्त शानदार बिल्डिंग है पर जहा कुछ बच्चे है भी वहां मूल भूत सुविधाओं के नाम पर कुछ नही! शर्म उनको आये जो इस विधानसभा के विधायक है जिनकी डबल इज़न की सरकार है और नाम दलीप रावत है जो कहते तो है कि सब ठीक हो जाएगा बन जायेंगे कमरे पर बनते नही स्याद इन विधायक जी की भी कोई अधिकारी सुनने को तैयार नही तभी इनकी विधानसभा की जनता सड़क , पानी , बिजली , ओर डॉक्टर और अस्पताल के लिए आज भी जूझ रही है शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय जी विधायक जी से तो कुछ हो नही रहा है आप ही देखे की क्या हो सकता है उचित से उचित ताकि इन छात्रों को मिल सके वो स्कूल जहा इनको खतरा कम पढ़ाई ज्यादा अच्छी लगे

देवेश आदमी
सामाजिक कार्यकर्ता रिखणीखाल

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