मंत्री तो है पर पावर गुल है एक नही पूरे पांच!

डबल इज़न की सरकार में वो मंत्री काफी हद तक परेशान नजर आ रहे है जो काग्रेस से बीजेपी में आये चुनाव लड़े ओर फिर मंत्री बने हम बात कर रहे है यशपाल आर्य की , रेखा आर्य की , सुबोध उनियाल की , ओर हरक सिंह रावत की।                         जी हां आजकल खबर जोरो से फेल रही है कि राज्य के नोकरशाह इन मंत्रियो को लगता है मंत्री ही नही समझते अक्सर इन सभी मंत्रियो की शिकायत रहती है कि अब राज्य के अफसर ना इनकी सुन रहे है और ना ही इनके बताये जा रहे जनहित वाले काम हो रहे है कही बार तो इन मे से कुछ मंत्रियो का गुस्सा अधिकारी पर खूब उतरा भी पर उसके बाद भी अफसरों ने इन मंत्रियो की अनदेखी करना नही छोड़ा हर किसी पर भारी पड़ने वाले हरक सिंह रावत अब अंदर ही अंदर घूट रहे है क्योकी ठंडे बस्ते में मंत्री जी को डाल दिया गया है उनके विभाग वाले भी उनकी नही सुनते सीएम त्रिवेन्द्र रावत तक हरक सिंह अपनी पीड़ा बया कर चुके है पर लगता नही कुछ फर्क पढ़ने वाला है।                कभी अधिकारियों पर अपनी तूती चलाने वाले सुबोध उनियाल भी अब सर पकड़ कर बैठे है और चुप है , यशपाल आर्य के पास तो मानो जो विभाग है वो उनके है ही नही या सिर्फ नाम के मंत्री रह गए है क्योकि उनकी भी चल नही रही है                    हा रेखा आर्य थोड़ा बहुत सक्रिय दिखाई दे रही है वो पहले से ही बीजेपी परिवार की है और भगत दा का आशीष भी उनके सर पर है इसलिए ज्यादा कुछ खास तो नही पर थोड़ा बहुत वो भी अफसरों से  नाराज़  रहती है        सुना है सतपाल महाराज भी कही बार राज्य के अफसरों पर नारज हुए है उनको भी लगता है कि उनकी अनदेखी की जा रही है जो समय समय पर झलकता भी रहता है आप को एक बात बता दे कि इनमें से कोई भी मंत्री खुल कर अपनी नारजगी सार्वजनिक नही कर रहा है       क्योकि उनको मालूम है प्रचण्ड बहुमत का दम इसलिए सब चुप है क्योकि अगर ज्यादा कुछ इन मंत्रियो ने आवाज़ उठाई तो कही बीजेपी का हाईकमान कह देगा कि अगर आप से नही संभल रहा है विभाग ओर अधिकारी तो इस्तीफा दे दो हमारे पास बहुत काबिल नेता और बस यही वजह है कि काग्रेस से बीजेपी में आये नेता भले ही मंन्त्री बन जरूर गए पर इनकी हालत ज्यादा ठीक नही है पर इनमें से कोई भी अपनी बात आगे खुलकर रखने की हिमत नही जुटा पाता क्योकि प्रचण्ड बहुमत वाली सरकार के मंत्री है कुछ अगर बोला तो अपने साथ साथ सरकार की छवि भी खराब हो जाएगी इस बात का अंदाज़ा उन्हें अछी तरह से है इसलिए सब खामोश है बात जो भी हो पर ये सभी मंत्री उन दिनों को याद कर रहे है जब ये काग्रेस मे रहा करते थे जहां इनकी फूल चलती थी लेकिन भले ही अब ये डबल इज़न की सरकार के मंत्री जरूर है पर इनकी पावर गुल है तो उधर मुख्यमंत्री लगातार इस बात को लेकर काम कर रहे है चल रहे है कि ना खाउगा ना खाने दूँगा तो काग्रेस के नेता और विपक्ष भी अब उन पर कभी कभी हस देता है कि जो काग्रेस को छोड़कर गए वो सिर्फ नाम के मंत्री है वजह जो भी हो उसकी हकीकत तो ये सब मंत्री ही जाने पर अगर कोई फुल फ्रॉम मे है तो वो है छोटे कद के धन सिंह रावत जिनकी पूरी चल रही है हर तरफ उसके बाद प्रकाश पंत ओर फिर अरिवंद पांडेय अगर कहा जाए तो पूरी सरकार में सिर्फ इन्ही की तूती बोल रही है बाकी काग्रेस से बीजेपी मे आये सभी लोग दुखी नज़र आते है और ये दुख सिर्फ इनका ही नही बीजेपी के उन नेताओं का भी है जो सिर्फ विधायक बनकर ही रह गए है उनकी अगर सुने तो वो कहते है कि अगर ये लोग बीजेपी मे ना होते तो आज हम मंत्री होते बहराल सबका अपना अपना दर्द है सीएम को भी दुख इस बात का है कि जब से वो मुख्यमंन्त्री बने है ना जाने कोन कोन से लोग उन से बिना वजह परेशान है और अक्सर उनकी सीएम की कुर्सी के पीछे पड़े है उन्होंने कहा है कि इन बातों से आदमी डिस्टप होता है बाकी कुछ नही खेर सूत्र बोलते है कि भले ही प्रचण्ड बहुमत की सरकार है मुख्यमंत्री जीरो टालरेश के तहत काम कर रहे है पर पूरी सरकार से लेकर इस समय बीजेपी का सगठन ओर मंत्री की बात करे तो कही ना कही खटपट जरूर है जो आज नही तो आने वाले समय मैं खुल कर सामने आएगी अभी तो सिर्फ हवा चल रही है आगे तूफान आने के सकेत है

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