उत्तराखंड : ये अजब गजब हुवा दुःखद है परीक्षा के दौरान कक्षाओं में घुसी मधुमक्खियां, तीन शिक्षकों समेत 55 बच्चों को दिया काट अंग्रेजी की हो रही थी परीक्षा, रद्द करनी पड़ी।

उत्तराखंड के राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुंडा में अर्द्धवार्षिक परीक्षा दे रहे बच्चों पर शनिवार को मधुमक्खियों ने हमला बोल दिया। इस दौरान तीन शिक्षकों समेत लगभग 55 बच्चों को मधुमक्खियों ने काटा खाया। फिर चीख पुकार सुनकर राहगीरों ने धुआं कर बच्चों की जान बचाई , तो 108 एंबुलेंस ने ज्यादा घायल 11 बच्चों को सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई।
वही बच्चों के मधुमक्खी के काटने के कारण परीक्षा निरस्त कर दी गई है। ओर अब यह परीक्षा बाद में होगी।
बता दे कि जसपुर रोड स्थित राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुंडा एक ही परिसर में है। परिसर में सीरस के पेड़ पर मधुमक्खियों का छत्ता लगा हुआ है। शनिवार सुबह 10 बजे से राप्रावि में अंग्रेजी विषय की परीक्षा शुरू हुई। छात्र-छात्राएं कक्षा-कक्ष में परीक्षा देने के लिए बैठे ही रहे थे कि अचानक मधुमक्खियां उड़कर कक्षों में घुसकर बच्चों पर चिपटने लगी। इससे बच्चों में चीख पुकार मच गई। तब राइंका और राप्रावि के बच्चों में भगदड़ मच गई। कुछ बच्चे विद्यालय के नजदीक अपने घर भाग गए। चीखते बच्चों को देखकर राहगीरों ने कूड़े में आग लगाकर धुआं किया और बच्चों को विद्यालय के कक्षों में बैठाया। इस दौरान मुधमक्खियों ने शिक्षिका बीना, गीता और कौसर जबी सहित करीब 55 बच्चों को काट खाया। तो सूचना पर पहुंची 108 एंबुलेंस ने सहायक शिक्षिका कौसर जबी से साथ अधिक खराब होने पर कक्षा एक के छात्र अरमान , कक्षा पांच के इस्माइल , कक्षा 4 के मेहराज , कक्षा 4 की सुहानी , कक्षा एक के वसीम कक्षा 2 की सानिया , कक्षा 2 के मोहम्मद अनस , कक्षा 5 की इरम , कक्षा एक की रूबी कक्षा पांच के फैजान और कक्षा पांच के अनस को सरकारी अस्पताल पहुंचाया।

वहां प्राथमिक इलाज के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई। प्रधानाध्यापक महिपाल सिंह ने बताया कि बच्चों को मधुमक्खी के काटने के कारण परीक्षा निरस्त करनी पड़ी है, जिसकी उच्चाधिकारी को सूचना दे दी गई है। अभिभावकों ने बताया कि मधुमक्खियों ने राइंका के भी कुछ छात्र-छात्राओं को काटा है।
ख़बर है कि स्कूल में बच्चों पर मधुमक्खियों के हमले करने की सूचना पर ग्राम प्रधान मोहम्मद जावेद ग्रामीणों के साथ मिलकर विद्यालय पहुंचे। उन्होंने मधुमक्खियों के हमले से घायल इधर-उधर भागते बच्चों को देखकर विद्यालय में धुआं कराया। साथ ही कुछ बच्चों को अपने चाचा के क्लीनिक में ले जाकर मधुमक्खियों से बचाया। गांव वाले शीघ्र ही विद्यालय नहीं पहुंचते तो मधुमक्खियां बच्चों को भारी नुकसान पहुंचा सकती थीं।


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