उत्तराखण्ड की लड़की उसका मोबाइल गेम ओर नौ शहर आज के माता पिता जरूर पढ़ें पूरा मामला।

आपको बता दे कि आज से लगभग 18 दिन पहले उत्तराखण्ड के पंतनगर थाना क्षेत्र से एक लापता किशोरी मोबाइल पर टैक्सी ड्राइवर गेम-2 से इतना प्रभावित हो गई कि वे घर से ही चली गई थी। ख़बर है कि पुलिस पूछताछ में किशोरी ने इस बात का खुलासा किया ,
आपको बता दें कि जानकारी अनुसार एक जुलाई को पंतनगर थाना क्षेत्र स्थित झा कॉलोनी निवासी एक किशोरी रहस्यमय ढंग से लापता हो गई थी। ओर फिर 18 दिनों की तलाश के बाद पंतनगर थाना पुलिस ने किशोरी को दिल्ली से बरामद कर लिया।
वही पूछताछ में किशोरी ने बताया कि उसने अपने मोबाइल में एक गेम एप डाऊनलोड किया था, जिसमें वह काफी दिनों से टैक्सी ड्राइवर-2 गेम खेल रही थी। गेम खेलते-खेलते वह इससे इतना प्रभावित हुई कि उसके मन में देश घूमने की इच्छा जागी और उसने घर छोड़ दिया।
यही नही घर से निकलने के बाद वह किच्छा से बरेली होते हुए लखनऊ, जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, पूना, दिल्ली आदि शहरों में घूमती रही। इसके लिए वहअपने घर से नकदी भी ले गई थी। फिलहाल मिली जानकारी अनुसार पुलिस ने किशोरी को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया है
वही किशोरी को बरामद करने वाली टीम में पंतनगर थाना प्रभारी अशोक कुमार, एसआई विपुल जोशी, बिशन लाल आगरी, कांस्टेबल मनोज कुमार, दीपक मेहरा, सुरेंद्र सामंत, किशोरी फर्तयाल, भोलानाथ स्वामी थे।
मीडिया को एसओ अशोक कुमार ने बताया कि दिल्ली के कमलानगर में बुधवार देर रात छात्रा रिक्शा पर अकेली जा रही थी। इस दौरान पुलिस ने उसे रोका। पूछताछ में उसने बताया कि वह घर में बिना बताए आई है। इसके बाद पंतनगर पुलिस से हेलो संपर्क किया गया और पूरे मामले की जानकारी दी गई
तो छात्रा ने भी बताया कि वह 18 दिनों में कहीं भी रुकी नहीं। लगातार एक से दूसरी गाड़ी में सफर करती रही। यह सफर उसने अलग-अलग बसों में पूरा किया। वह बस में ही सफर करते-करते सोती थी। जहां बस रुकती वहां खाना खा लेती थी। फिर तय शहर में पहुंचकर फिर अगले शहर के लिए बस से निकल पड़ती थी।
बहराल आप मतलब अभिभावक रहे सावधान
अपने लाड़ले ,लाडलियों , को वीडियो गेम हो या मोबाइल गेम से उनका ध्यान जितना हो सके हटाये साथ ही उन पर नज़र भी रखे तो उनके साथ अधिक से अधिक बिताने की पूरी कोशिश करे। याद रहे आप इनके लिये ही कमा रहे है महेनत कर रहे है ऐसे मे इनको आपके अनमोल समय की जरूरत भी है।
इसके साथ ही छोटी उम्र से ही अपने बच्चों के हाथ में मोबाइल फोन न दें। हा अपने बच्चों के हेल्दी मनोरंजन पर खास ध्यान दें। बच्चों की समय समय पर काउंसलिंग भी करवाएं।
ओर उनकी उम्र के लिहाज से उनके दिल मैं वो जगह बना दे कि वे आप से अपने दिल की बात कहते डरे ना, जो उनके दिमाग मैं चल रहा है वे भी वो आपको बता दे। क्योंकि फेंडली माहौल अपने लाडली या लाडले को देना आज के दौर मैं जरूरी है।
याद रखे हम तो पराए है पर आपके वो अपने है इसलिए जागरूकता ही समस्या का समाधान है।



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