क्या माना जाए सीएम को मंत्रीयो ने अकेला छोड़ दिया ! या सीएम ने कहा शांत रहो !

बोलता है उत्तराखण्ड राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत अभी तक उतरा पंत बहुगुणा विवाद से निकले भी नही है कि एक के बाद एक खुलासे होने लगे है लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि राज्य के मंत्रीयो ने क्या सीएम त्रिवेन्द्र रावत को गलत माना है जो एक बार भी अभी तक सीएम के पक्ष मे बयान देते नजर नही आये सिर्फ प्रकास पंत को छोड़ा जाए और अरविंद पांडेय को तो ना सतपाल महाराज का कोई बयान आया ,ना यशपाल आर्य का , ना सुबोध उनियाल का , ना धन सिंह रावत का , ना रेखा आर्य का , ओर ना  हरक सिंह रावत का आखिर बात क्या है ? राज्य के मुख्यमंत्री और मंत्रियों के कप्तान के पीछे उतरा पंत बहुगुणा प्रकरण का साया अभी तक चिपका है लेकिन किसी भी मंत्री ने अपने आका का बचाव नही किया क्या माना जाए कि सरकार में सब ठीक नही चल रहा है या सब इस समय त्रिवेन्द्र रावत के पक्ष मे बोलने को तैयार नही या फिर ये माना जाए कि मुख्य्मंत्री ने ही सबको शांत रहने के लिए अभी बोला है पर सवाल ये है की फिर बीजेपी का सगठन ओर प्रवक्ता ही अपने दम पर सीएम के खिलाफ उठने वाली आवाज़ का जवाब दे रहे पूरी काग्रेस उतरा पंत के इसांफ के लिये मैदान मे उतर चुकी है पूरी सरकार को सड़क से लेकर चोक चोरहे पर , मीडिया पर सोशल मीडिया पर लपेट लपेट कर शब्दो से पीटा जा रहा है पर राज्य के मंत्री चुप है ये खामोश रहने वाली कोन सी नीति है ये बात राजनीत के दिग्जो को भी समझ नही आ रही है कोई कहता है कि सीएम ने ही अब सब को शांत रहने के लिए बोला है तो कोई कह रहा है कि मंत्री अपनी लोकप्रयिता खराब नही करना चाह रहे है इस पूरे  मामले  मै बोलकर इसलिए नही बोल रहे है तो कोई कहता है कि सीएम से खार खाने वालो के लिए इससे अच्छा मौका कोई नही इसलिए सब चुप चाप देख रहे है तमासा खेर जो भी हो ये सच तो राज्य के मुख्य्मंत्री ही जाने क्यों कोई भी मंत्री इस पूरे प्रकरण पर सीएम का साथ देता नज़र नह आया या फिर वो सब सीएम के आदेश का पालन कर रहे है खाँमोश रहकर लेकिन राज्य की जनता के अंदर ये हलचल जरूर है कि सीएम की आफत आगयी ओर उनके मन्त्री गायब हो गए क्यो ये सवाल जनता के मन से लेकर पान वाले कि दुकान , चाय वाले कि दुकान , कड़ी चावल खाने की दुकान पर खूब उठ रहा है

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