कुछ साल बाद अब राजनेताओ को पहाड़ जाना ही पड़ेगा,वही रहना पड़ेगा

     नीतिन सेमावल की रिपोर्ट                                                                  राज्य की अस्थायी राजधानी देहारादून के हालत किसी से छुपे नही हैं अर्थ डे पर बोलता उत्तराखण्ड बता रहा हैं कि देहरादून में अर्थ का अनर्थ खूब हो रहा हैं ग्लोबल वार्मिंग का खतरा दूंन पर हैं ,नदिया सूख रही हैं ,दूंन के तापमान में लगातार व्रद्धि हो रही हैं कारण पेड़ घट रहै है और कंक्रीट के जंगल उग आए हैं स्वच्छ पानी की जगह अब सीवर ओर जहरिले पदार्थ ने पूरा सीन बदल डाला हैं रिस्पना हो या सुसवा या फिर बिंदाल की नदियां इनमें गंदगी के सिवा आज़ कुछ भी नही , वायु प्रदुषण भी अब 6 गुणा बड़ गया हैं और वो दिन दूर नही जब दूंन कि हवा में ज़हर पूरी तरह से घुल जायेगा बस अगर कुछ ना हुवा तो 2030 तक आप दूंन में सांस भी ना ले पाओगे क्योकि हवा सांस लेने लायक ना होगी यही नही दूंन का वाटर लेवल भी पिछले 8 सालों से लगातार गिर रहा हैं आज दूंन मैं ट्यूबवेल की गहराई 150 से बढ़कर 200 से ज्यादा हो गयी हैं राज्य में 200 से ज्यादा ओर दूंन जिले में लगभग 50 ओर शहर में लगभग 15 ट्यूबवेल सुख चुके हैं मौसम लगातार बदल रहा हैं दूंन कि आबादी लगातार बढ़ रही हैं वहानो कि सख्या भी आज उर्फ मत पूछो आसमान छू गयी हैं यही हाल रहै तो 10 साल बाद दूंन कि सड़कों पर कोई चल भी ना पायेगा ओर वाहन कछुए की रफ्तार से भी हल्के चलेगे भाई हरे जंगल गयाब हो रहे हैं ,प्रदुषण बढ़ रहा हैं ग्लेशियर लागतार पिघल रहे हैं हाल बेहाल हैं पर सियासत करने वाले दबाके सियासत ही कर रहे हैं अब वो दिन दूर नही जब हालत बेकाबू होंगे दूंन के ओर वो दिन भी दूर नही जब राजनेता फिर अपने स्वार्थ के लिए पहाड़ की राजधानी  पहाड़ ही ले जायगे अभी कोई माने या ना माने पर देखना सच यही हैं कि आगे आने वाले राजनेता अब अपने भले के लिए पहाड़ की राजधानी पहाड़ ही  बना कर दम लेगे क्योकि दूंन में आने वाले 10 सालो बाद हाल बेहाल होंगे हा यदि जनता ने सरकार ने विपक्ष ने ओर दूंन में रहने वाले लोगों ने अभी कुछ ना किया ये नही समझे  तो भगवान ही मालिक दूंन का मतलब दुसरी छोटी दिल्ली प्रदूषण के नाम पर…. उधर अब गढ़वाल में भी लोग सब जागरूक हो चुके हैं NTPC द्वारा पृथ्वी दिवस  (अर्थ डे) पर हिमालयन मैराथन का आयोजन जोशीमठ 520 मेघावाट जलविद्युत परियोजना एनटीपीसी में आज हिमालयी मैराथन दौड का आयोजन किया गया जिसमें भारतीय सेना के साथ सुनील itbp की प्रथम वाहनी के साथ राजस्व विभाग और ntpc अधिकारियों सहित सैकड़ो लोगों ने लिया हिस्सा
लिया

इस दौड के माध्यम से यह बताया कि हम अपनी पृथ्वी को किस प्रकार से सुरक्षित रखे साथ ही देश और समाज के प्रति हम कितने फीट है इस पर भी चर्चा की गई इसके अलावा हिमालय को साफ सुथरा रख हिमालय को बचाना भी मैराथन दौड का संकल्प था,दौड में जोशीमठ के उपजिलाधिकारी,आईटीबीपी के सीओ,गढवाल स्काउट के अधिकारी के साथ एनटीपीसी के समस्त कर्मचारी वर्ग शामिल हुये चलो अच्छा हैं एक प्रयास किया गया हैं लेकिन जो बोलता उत्तराखण्ड हैं वो बात यही हैं कि पहाड़ की राजधानी पहाड़ जरूर होगी वो इसलिए नही की लोग आंदोलन कर रहे हैं बल्कि इसलिए कि आने वाले समय में दूंन में जमे राजनेताओ को भी दूंन की फिज़ाओ में रहना मुश्किल हो जाएगा फिर भला क्यों ना बनेगी पहाड़ की राजधानी पहाड़ में  क्योंकि राज्य के राजनेताओ का  स्वास्थ्य आने वाले  10 साल बाद दूंन लगातार बिगाड़ देगा , तब संबको आएगी अपने पहाड़ की याद  फिलहाल ये सब भविस्य के गर्भ में छुपा हुवा हैं                          बोलता उत्तराखण्ड के लिए  नीतिन  सेमावल की रिपोर्ट

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