आपको बता दे उत्तराखंड की पौडीं गढवाल लोकसभा का पूरा क्षेत्र जहा के सांसद है तीरथ सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत की कोटद्वार विधनसभा।
व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी का क्षेत्र कोटद्वार विधानसभा तक
का रोना भी लगभग वही है जो अन्य पहाड़ी जिलो का रोना है । मतलब स्वास्थ सेवाओ की कमी का रोना। कड़वा सच है कि पूरे पौड़ी गढ़वाल से लेकर गढ़वाल के द्वार यानी कोटद्वार तक डॉक्टर की कमी और अस्पताल मे स्टाफ की कमी को सभी जानते है।
भले ही पूरे प्रदेश के अंदर स्वास्थ्य सेवाओं मे इजाफा ओर हर जिले तक डॉक्टर को पहुँचाने के लिए त्रिवेन्द्र सरकार प्रयासरत हो पर अभी कह सकते है कि पूरी तरह स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार पहाड़ मैं ना के बराबर है । डॉक्टर पहाड़ जाने को तैयार नही, मशीन तो है पर चलाने वाला नही, आदि आदि
खैर हम स्वास्थ्य सुविधाओं पूरा ना होने का रोना तो रोते रहेगे ओर सरकार भी लगातार प्रयासरत रहेगी ही। देवभूमि के देवी देवताओं का ये आशीष ही है कि हमारी मात्र शक्ति को कभी कठिन हालतों मै कभी पुल के पास तो कभी सड़क किनारे नवजात को जन्म देना पड़ता है।और उस कठिन दौर मै ऊपर वाले के आशीष से सब ठीक हो जाता है।
पर हम सिस्टम मै सुधार के लिए लिखते रहेगे।
अब अभी की बात ले लो कोटद्वार मै बेस अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर एक नवजात ने ऑटो में ही जन्म ले लिया ।ओर जच्चा ओर बच्चा दोनों ही स्वस्थ है। जी हां ऐसा वाक्या कोटद्वार में देखने को मिला।

जब
मंगलवार को एक गर्भवती को दर्द होने पर उनके परिजन शक्तिचौड़ क्षेत्र से उन्हें ऑटो रिक्शा में राजकीय बेस अस्पताल कोटद्वार के लिए ला रहे थे । उनका मानना था कि अभी गर्भवती की डिलीवरी होने में समय है। लेकिन अस्पताल की इमरजेंसी तक पहुंचते पहुचते ही गेट के बाहर ऑटो में ही महिला को प्रसव हो गया। ऑटो में जब डिलीवरी होने की बात वहा खड़े लोगो को मालूम चली तो लोगों में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति नाराजगी भी देखने को मिली।
लेकिन कुछ देर बाद जब हकीकत जानी तो पता लगा कि परिजनों द्वारा स्वयं ही गर्भवती को ऑटो में लाया गया। जहां उसने हास्पीटल के गेट तक पहुंचते-पहुंचते ही नवजात को जन्म दे दिया। अब भला इसमे अस्पताल का क्या दोष ? तो कभी कभी बिना कारण भी कही कही सरकारी सिस्टम ओर अस्पताल पर बेवजह आरोप लग जाते है और खबरी ख़बर बनाकर स्वास्थ्य महकमे पर चढ़ जाते है। जो कि गलत है।
वही महिला चिकित्सक संगीता नेगी ने बताया कि बलदेवपुर गली नंबर तीन गुड़गांव हरियाणा निवासी 24 वर्षीय बबली पत्नी प्रमोद डिलीवरी होने के लिए अपने मायके शक्तिचौड़ आई थी। मंगलवार सुबह करीब पौने आठ बजे परिजन उसे लेकर ऑटो में आये, लेकिन बबली ने ऑटो में ही जन्म दे दिया। उन्होंने बताया कि सूचना मिलते ही गायनी वार्ड से कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर बबली और बच्चे को जच्चा-बच्चा वार्ड में भर्ती कराया। उन्होंने बताया कि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ है।
बहराल बोलता उत्तराखंड कहता है कि जहा सिस्टम लाचार है , व्यवस्था खराब है, कोई सुनने वाला नही वहा के खिलाफ आवाज़ उठनी चाइये।
पर हर जगह व्यवस्था पर सरकार पर बिना सच जाने चोट करना भी ठीक नही।



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