कही पुतले जले ,कही दिल ,कही चमकी सियासत ,तो कोई मागे माफी ओर हर तरफ सिर्फ सीएम की बात

भले ही ख़बर है कि राज्य के शिक्षा मंत्री अरबिंद पांडेय ने महिला टीचर से फोन पर बात कर पहले माफी मांगी फिर कहा कि मैं 3 तारीख को आप से मिलकर पूरी बात करुगा ओर आपका ट्रांसफर भी हो जाएगा सब ये बात अभी बढ़ते विवाद को शांत कराने के लिए है या सच मे सरकार बैकफुट पर आगयी है ये तो कुछ घण्टो मैं साफ हो जाएगा लेकिन जो मुदा विपक्ष ने पकड़ लिया है वो अब शांत नही होने वाला क्योंकि उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष प्रीतम सिंह के आह्रवान पर शनिवार को कांग्रेसजनों ने प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों में सड़कों पर उतर कर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत एवं राज्य सरकार के विरूद्ध जबर्दस्त प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया। राजधानी देहरादून में स्वयं प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अगुवाई करते हुए प्रदर्शन का नेतृत्व किया। महिला टीचर के समर्थन में व नारी शक्ति के समर्थन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जबर्दस्त नारेबाजी की व मुख्यमंत्री तथा राज्य सरकार के विरोध में प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के पुतले का दाह किया।.                                              इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत एवं राज्य की भाजपा सरकार पर हमला करते हुए कहा कि भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों के परिजनों एवं रिस्तेदारों के लिए अलग नियम हैं तथा राज्य की आम जनता के लिए अलग नियम कानून हैं। इसीलिए 25 साल से                    
उत्तरकाशी के दुर्गम इलाकों में प्राथमिक शिक्षा में योगदान देने वाली उत्तरा पंत बहुगुणा जो एक विधवा हैं, उनके लिए मुख्यमंत्री द्वारा जिला कैडर का हवाला देते हुए देहरादून स्थानान्तरण में असमर्थता ही नहीं जताई बल्कि महिला द्वारा अपने पक्ष में तर्क रखे जाने पर पहले मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें निलम्बित करने व बाद में उनको बाहर कर गिरफ्तार करने के आदेश दिये गये। इसी के विपरीत स्वयं मुख्यमंत्री की धर्म पत्नी जिनकी मूल नियुक्ति पौड़ी जनपद के एक प्राथमिक विद्यालय में साल1992 में हुई थी, वे केवल चार वर्ष पौड़ी जनपद में सेवा देने के पश्चात देहरादून स्थानान्तरित कर दी गई और पिछले 22 वर्षों से देहरादून के एक ही विद्यालय में सेवा दे रही हैं। इसी प्रकार से राज्य के अनेक मंत्रियों, सत्ताधारी दल के नेताओं एवं प्रभावषाली लोगों के परिजन सुगम स्थानों में सरकार की कृपा से बने हुए हैं। प्रीतम सिंह ने कहा कि उत्तरा पंत बहुगुणा के साथ जिस प्रकार का दुव्र्यवहार किया गया और उसके बाद उनका निलम्बन किया गया यह पूरे राज्य की नारीशक्ति का अपमान है। उन्होंने कहा उत्तराखण्ड राज्य निर्माण में राज्य की नारी शक्ति का महत्वपूर्ण योगदान है और राज्य में विकास की धुरी हमारी मात्रशक्ति है। किसी भी राजनेता को सत्ता का इतना गुरूर नहीं होना चाहिए कि वो मातृशक्ति का अपमान करे। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राज्य की सरकार तत्काल उत्तरा पंत का निलम्बन वापस ले व मुख्यमंत्री अपने कृत्य के लिए क्षमा याचना करें अन्यथा कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता सरकार के विरूद्ध अपना आन्दोलन जारी रखेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्रवान किया कि 1 जुलाई को भारी संख्या में
सरकार के इस दोहरे मापदण्ड और मुख्यमंत्री के कृत्य के खिलाफ गांधी पार्क मे होने वाले धरने को सफल करें।                                        प्रदर्शन में उत्तराखण्ड विधानमण्डल दल के उप नेता करण महरा, विधायक हरीष धामी, प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकान्त धस्माना, महिला अध्यक्षा सरिता आर्य, पूर्व विधायक गणेश गोदियाल, राजकुमार, डाॅ0 संजय पालीवाल, मुख्य कार्यक्रम समन्वयक राजेन्द्र शाह, उपपध्यक्ष सुरेश बाल्मीकि, गोदावरी थापली, प्रमोद कुमार सिह, सुरेन्द्र रांगड़, जिलाध्यक्ष यामीन अंसारी, पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचन्द शर्मा, महेष जोशी, प्रवक्ता डाॅ0 आर.पी. रतूड़ी, गरिमा दसौनी, प्रभुलाल बहुगुणा, जिलाध्यक्ष जयेन्द्र रमोला, इन्दु मान, राजेश चमोली, आजाद अली, संजय भट्ट, देवेन्द्र सती, एस.पी. सिंह, अजय नेगी, ताहिर अली, नीनू सहगल, दीवान सिंह तोमर, बिमला जोशी, आनन्द बहुगुणा, दीप बोहरा, धर्म सिंह पंवार, प्रणीता बडोनी, नवीन पयाल, कै0 बलवीर सिंह रावत, अमरजीत सिंह, देवेन्द्र बुटोला, जिला पंचायत सदस्य मेघ सिंह, अभिनव थापर, आशा टम्टा, सुन्दरी देवी, सुनील जायसवाल, सुनित राठौर, टीटू त्यागी, जगदीश धीमान, कमलेश रमन, चन्द्रकला नेगी, अनुराधा तिवारी, ताबी खान, कंचन रांगड़, पंकज मेसोन, सुनित राठौर,प्रमुख सुरेन्द्र रावत, गोपाल दादर, राजवीर खत्री, डाॅ0 विजेन्द्र पाल, अनूप कपूर, अष्वनी बहुगुणा, नवीन रमोला, नेमचन्द, सुधीर सुनेहरा, मंजू त्रिपाठी, नागेष रतूड़ी, पूनम कण्डारी, मोहन काला, हरविन्दर सिंह रतन, मालती देवी, अनिल गुप्ता, बसन्त पन्त, भगत सिंह चौहान, आसीम देसाई, सोनू, आदि सैकडों कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित थे।.                                        मतलब साफ है अब चाहे सरकार बैकफुट पर  आती है तब भी विपक्ष सरकार को नही छोड़ने वाला ओर अगर सरकार अपने फैसले पर क़याम रहती है तो फिर विपक्ष के अंदर ओर एनर्जी आ जाएगी बस अब देखना ये है कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत कैसे इस उलझे मसले को शांत करते है क्योंकि यहां पर कोई पुतला फूंक रहा है उनका कोई उनकी पत्नी सुनीता रावत की शिक्षा पर ही सवाल खड़ा कर रहा है तो कोई आगे होने वाले चुनाव मे बीजेपी को नुकसान होने की समीकरण बता रहा है तो कोई उनकी कुर्सी पर नज़र गड़ाए बैठा है अब बस सबकी नजर सरकार पर है कि वो कैसे इस मसले को सुलझाने का काम करेगे

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