खंडूड़ी अब नही जरूरी! पौड़ी से पत्र आया है आप भी पढ़े

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खंडूड़ी को पहाड़ याद कर रहा है अपनी बात बया कर रहा है क्योकि उनको लगता है कि उनके सासंद ने पौड़ी लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद पौड़ी गढ़वाल तक का हाल चाल नही जाना भले ही आज पौड़ी गढ़वाल को मालूम है कि जरनल का स्वास्थ्य ठीक नही है पर वो तो पिछले पूर्व साढे 4 साल की बात कर रहे है उनकी पीड़ा उनकी जुबानी 

लापता ब्यक्ति की तालाश हो रही है समूचे पौड़ी लोकसभा क्षेत्र में। मामला 5 साल पुराना है इस लिए तस्वीर नही है उस व्यक्ति की किसी के पास होगी तो पोस्ट करें। हुलिया हम बता रहे है। व्यक्ति 5 फुट 11 इंच है चेहरे पर बड़ी बड़ी मूंछे है कहते है व्यक्ति आर्मी के किसी ऊंचे पद से सेवानिवृत्त है। पहाड़ों के व्यक्ति है और चुनाव लड़ के गायब हो जाते है। इस बार पौड़ी से चुनाव लड़ा और तब से गायब ही है। 5 साल बीत चुके है जनता खोज रही है अपने प्रिय अभिनेता जी को जो अभिनय कर के वोट तो मांग लेते है मगर अभिब्यक्ति नही दे सकते है। लोग उन की कुशलता की कामना कर रहे है। उन को सन्देश भेज रहे है कि आप ब्यौबृद्ध है हम कामना करते है विकास की। हम कामना करते है आप के स्वस्थ जीवन की आप काम न किया करो दिल्ली आवास में लेटे रहना। 

आप हमारे पौड़ी के अभिनेताओं में से एक हो क्यों कि नेता वो होते है जो नेतृत्व करते है। और नेतृत्व आप ने कभी किया नही आप सिर्फ चुनाव के मौसम में फुदक कर आओगे और चोपड़ा साहब के फिल्मों की तरह सीनरी दिखा कर निकल जाओगे फिर हम जीवन का टिकट लेकर खड़े रहेंगे मौत की खिड़की पर वोट तो मैंने भी इन को दिया था मगर भूल गया कि क्या बोल कर इन्हों ने वोट मांगा था मगर आज यह याद है कि सिर्फ झूठ बोल कर वोट मांग था।

आप देश के सर्वोच्च नागरिक नही होंगे हमें कोई मतलब नही है मगर आप हमारे क्षेत्र के सर्वोच्च व्यक्ति हो क्यों कि हम ने आप के हाथ में नेतृत्व दिया है और नेतृत्व विहीन सामाज अगर आप को देखना है तो जम्मू कश्मीर झारखण्ड छत्तीसगढ़ जाकर देखो।आप का श्रेष्ठ नेतृत्व कहता है कि नाली से गैस बनाओ पकौड़ी तलो रोज़गार के साधन खुलेंगे आप भी कुछ इस तरह के जुमले फेंको हमारे पास पहाड़ों में गौबर चाय पतीले सब कुछ है।
बहुत हुआ अकड़ बकड बम्बे बो अब कुछ काम करो।साहब आप के क्षेत्र की जानकारी हम आप को देते है। उत्तराखंड 9 नवम्बर 2000 को अस्तित्व में आया और उतराखंड प्रदेश के पांच लोकसभा क्षेत्रों में से एक पौड़ी गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र सन 1957 में अस्तित्व में आया था, इस लोकसभा क्षेत्र में पांच जिलों जिनमें जनपद चमोली, जनपद पौड़ी गढ़वाल, जनपद रूद्रप्रयाग तथा जनपद नैनीताल और टिहरी गढ़वाल के कुल 14 (चौदह) विधानसभा क्षेत्र शामिल है जो निम्नानुसार हैं।
जिला चमोली – बद्रीनाथ, कर्णप्रयाग, थराली,
जिला पौड़ी गढ़वाल चौबट्टाखाल, कोटद्वार, लेंसडाउन, पौड़ी, श्रीनगर, यमकेश्वर
जिला रूद्रप्रयाग केदारनाथ, रूद्रप्रयाग
जिला नैनीताल रामनगर
जिला टिहरी गढ़वाल देवप्रयाग, नरेन्द्र नगर
यह है आप का सम्पूर्ण क्षेत्र जो करीब 213km में फैला है जिस की सीमा उत्तरप्रदेश से लगती है। आये दिन बस दुर्घटना व छेड़छाड़ के मामले आते है। पलायन तो यहा की निशानी है । आप के क्षेत्र में बिगत 5 साल में 48 बस दुर्घटना हुई उन में से आप कहीं नही दिखाई दिए। माना आप का स्वास्थ्य सही नही है मगर क्या जरूरत है फिर कुर्सी पकड़ कर हमारे भविष्य से खिलवाड़ करने की।
संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व
2004 से 2007 – श्री भुवन चंद खंडूरी (बीजेपी)
2007 से 2009 – श्री तेज़ पाल सिंह रावत (बीजेपी)
2009 से 2014 – श्री सतपाल महाराज (कांग्रेस)
2014 से वर्तमान में श्री भुवन चंद खंडूरी (बीजेपी)
श्रीमान आप की प्रतीक्षा में लोग है कि आप कब आओगे लोगों की सुनोगे आप से बहुत उम्मीदें थी इस लिए आप से विनती है क्षेत्र के लोगों को ना उम्मीदी न दें, अभी आप के क्षेत्र धुमाकोट रामनगर नैनीडांडा रिखणीखाल यमकेस्वर एकेश्वर जयहरीखाल दुगड्डा से घूम कर आरहा हूँ 90% लोगो को नही पता कि हमारा सांसद कौन है। आप का नाम सुना है मगर आप किस क्षेत्र के सांसद हो किसी को नही पता,,,,दुर्भाग्य आप का नही हमारा है
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देवेश आदमी
बहराल ये सब कुछ सोशल मीडिया फेसबुक पर वारयल हो रहा है फिर क्या माना जाए अब खंडूड़ी जरूरी नही। ओर जरूरी पौड़ी लोकसभा से हर वो वयक्ति भी नही जो वोट पौड़ी की जनता से मागे ओर जीत जाने के बाद पौड़ी लोकसभा की तरफ़ मूड कर भी ना देख पाए बहराल इस बार इन पत्रों ने ये तो जाहिर कर दिया है कि इस बार पौड़ी लोकसभा में घमासना मचना तय है और वहां की जनता किसी युवा को अपना नेता बनाना चाहती है जो उनको स्वरोजगार से जुड़े, जो उनके पहाड़ के लिए विकास की योजनाएं लाये जो पौड़ी को विकसित करें और जो निवेशकों को पौड़ी  लेकर आये ताकि पूरे गढ़वाल जो आज तक  उपेक्षा  का    शिकार हो रखा था उस पर विराम लगे ।

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