ख़तरे मे है हमारी लोकभाषा , धाद का 30 साल से प्रयास जारी है , आप भी बचाओ अपनी बोली ओर भाषा

लोकभाषाओं का समाप्त होना सांस्कृतिक अपराध है।

देहरादून 30 जून। सामाजिक सरोकारों से जुड़ी धाद संस्था के लोकभाषा एकांश के द्वारा एक वृहद गढ़वाली कवि सम्मेलन का आयोजन स्थानीय प्रेस क्लब में हुआ। धाद विगत 30 वर्षों से उत्तराखण्ड की लोकभाषाओं के संरक्षण हेतु काम कर रही है। यूनेस्किो की 2005 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की अधिकांश लोकभाषाओं पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है और ये भाषाएं 50 से 100 वर्ष के काल खण्ड में पूरी तरह से समाप्त हो जायेंगी। चूंकि किसी भी भाषा का निर्माण हजारों वर्ष के कालक्रम में होता है। अतः ऐसी अमूल्य धरोहर का समाप्त होना भी एक प्रकार का सांस्कृतिक अपराध है। उल्लेखनीय है कि दुनिया की हर भाषा स्वयं में एक ज्ञान है, उसका अपना शब्दसौंदर्य, रचनात्मक सौन्दर्य और शब्द सामर्थ है। ग्लोब्लाइजेशन और बाजारवाद के प्रभाव से दुनिया की तमाम भाषाएं अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं। लेकिन हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि हमें इसे बचाये रखना है। इसमें धाद इस अभियान में जुटी हुई है।

धाद लोकभाषा एकांश की अध्यक्षा श्रीमती बीना कण्डारी ने सर्वप्रथम सभी मेहमानों आगुन्तकों एवं सभी श्रोताओं का अभिनन्दन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री रघुवीर सिंह बिष्ट, अध्यक्ष हिल डेवलपमेंट मिशन उत्तराखण्ड एवं सान्निध्य श्री लोकेश नवानी, संस्थापक धाद का रहा है। धाद लोकभाषा एकांश की सचिव श्रीमती प्रेमलता सजवाण ने सभी अतिथियों का अभिनन्दन किया एवं उन्हें दीप प्रज्ज्वलन के लिए निवेदन किया। तत्पश्चात श्री लोकेश नवानी जी, संस्थापक धाद ने अपने उदबोधन में कहा कि भाषा से ही संस्कृति का निर्माण होता है और सभी भाषाएं हमारी धरोहर हैं। इस कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध लोकगायिका श्रीमती कल्पना चैहान व लोकगायक श्री राजेन्द्र चैहान विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि श्री रघुवीर सिंह बिष्ट जी ने दर्शकों का आवाहन किया कि हमें अपनी दुधबोली को हर हाल में बचाना है। तत्पश्चात कवि सम्मेलन आरम्भ हुआ। इसमें रुद्रप्रयाग से श्री मुरली दीवान, अदालीखाल से पायल उनियाल, उफरैखाल से शिव दयाल ‘शैलज’, पौड़ी से वीरेन्द्र पंवार, कोटद्वार से राकेश मोहन ध्यानी एवं रिद्धि भट्ट, हरिद्वार से नरेन्द्र रयाल एवं मधुसूदन थपलियाल, ऋषिकेश से हेमवती नन्दन भट्ट ‘हेमू’ व स्थानीय कवियों में शान्ति प्रकाश, दिनेश डबराल, सुमित्रा जुगलान, बीना कण्डारी, प्रेमलता सजवाण आदि ने कविता पाठ किया। कवि सम्मेलन का संचालन वीरेन्द्र पंवार ने किया।  

कार्यक्रम में श्री हर्षमणि व्यास, तन्मय ममगाई, शोभा रतूड़ी, मंजू काला, कल्पना बहुगुणा, कैलाश कण्डवाल, सुदीप जुगलान, रविन्द्र, रीता भण्डारी, जयदीप सकलानी, कुलदीप कण्डारी, रमाकांत बेंजवाल, साकेत रावत, डा0 आशा रावत, वीरेश, रोशन धस्माना,कैलाश आदि उपस्थित रहे।

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