काश कोई होता जो मेरे पहाड़ का दुःख दर्द कम करता अब तो घरों मे ही कैद है लोग!

पहाड़ो मे लगातार हो रही बरसात की वजह से जगह जगह भूस्खलन हो रहे है जिससे गाँव गाँव को बाज़र ओर स्कूल से जोड़ने वाले रास्ते अलग थलग हो गए है गाँव वाले गाँव मे ही कैद हो गए ये हालत पहाड़ी जिलो के कही गाँव के देखने को मिल रहे है और इन्हीं मे से एक गाँव है अंधियारी गांव जहा के लोगो अब अपने घरो मे ही कैद हो रखे है  
आपको बता दे कि
टिहरी जनपद के तहसील कण्डीसौड़ के अन्तर्गत सरोट -चापड़ा मोटरमार्ग पर चापड़ा गांव के पास लगातार हो रहे भूस्खलन से अंधियारी गांव सहित आधा दर्जन गांव का सम्पर्क मुख्य मोटरमार्ग से पूरी तरह कट चुका है लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण मोटरमार्ग को खोलने का कार्य शुरू नही हो पा रहा है । जिससे कई स्कूली छात्र छात्राएँ स्कूल नही जा पा रहे है वही कुछ छात्र छात्राएँ खड़ी पहाड़ी के रास्ते जान जोखिम में डाल कई मील दूर पैदल चलकर स्कूल पहुंच रहे हैं                  ग्रामीणों का कहना है कि गाँव जाने के लिए अन्य कोई और वेकल्पिक रास्ता नही बचा है जिससे ग्रामीण अपनी रोजमर्रा की जरूरी चीजों के लिए बाजार नही जा पा रहे है । मोटरमार्ग मार्ग की यह समस्या आज कोई नई नही है ।इस मार्ग पर यह स्लाइडिगं पिछले कई वर्षो से सक्रिय है जो जरा सी बरसात होने पर ओर सक्रिय हो जाता है जिसके बारे में ग्रामीण कई मर्तबा तहसील दिवस पर , बी डी सी के माध्यम से शिकायत भी कर चुके है लेकिन इसके उपचार के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नही उठाये गये साथ ही बताया गया है कि पिछले चार दिनों से दो व्यक्ति मोहनलाल, लाखीराम बीमार है रास्ता न होने से परिजन उन्हें अस्पताल नही ले जा पा रहे है ।ओर ये दर्द तकलीफ इस समय किसी एक गाँव का ही बल्कि उन सभी गाँव के लोगो का बना हुआ है जो लगातार भूस्खलन की चपेट में है ।                   दुःख दर्द के इस पहाड़ का कास कोई सुनने वाला होता । कोई जल्द राहत पहुचाने वाला होता पाहड़ के लिए कोई अलग और मजबूत नीतियां बनाने वाला होता तो ये दिन मेरे पहाड़ के लोगो को आपके पहाड़ के लोगों को ना देखने पड़ते बहराल उम्मीद करो कि अब डबल इज़न के आगे की तीन साल मे कुछ धरातल पर दिखाई दे ।

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