शहीद मेजर सर विभूति जी को मरणोपरांत शौर्य चक्र, शहीद चित्रेश सर जी को सेना मेडल का सम्मान बोल उत्तराखण्ड कुछ तो बोल : जय हिंद

बता दे कि पुलवामा हमले में शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल और शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट की वीरता को मरणोपरांत सम्मान मिला है। उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून निवासी दोनों युवा सैन्य अधिकारी फरवरी में देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे
ओर पूरा उत्तराखण्ड तब रो रहा था , इनके अमर होने के नारे लगा रहा था, जय हिंद
आपको बता दे कि शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल सर जी को शौर्य चक्र और शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट को सेना मेडल के लिए चुना गया। पूरा उत्तराखण्ड अपने दोनों जांबाज बेटों को मिले इस सम्मान के बहाने एक बार फिर पूरा राज्य उनकी गौरवगाथा को बयां कर रहा है ओर , उन्हें इतिहास में अमर कर दिया है। भारत माता की जय।

आपको बता दे कि मूलरूप से अल्मोड़ा जिले के रानीखेत तहसील के अंतर्गत पिपली गांव निवासी मेजर चित्रेश बिष्ट का परिवार पिछले कई सालो से देहरादून की ओल्ड नेहरू कॉलोनी में रहा रहा है।
इसी साल 16 फरवरी को राजौरी के नौसेरा सेक्टर में आतंकियों ने एलओसी पार कर यहां इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस लगा दिया। सूचना मिलने पर इंजीनियरिंग कोर में तैनात मेजर चित्रेश ने सैन्य टुकड़ी के साथ सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया।
वही आईईडी डिफ्यूज करने के दौरान विस्फोट होने से हमारे उत्तराखण्ड के मेजर चित्रेश शहीद हो गए।
उन्होंने साल 2010 में भारतीय सैन्य अकादमी से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे अफसर बने थे 28 साल के मेजर चित्रेश के पिता सुरेंद्र सिंह बिष्ट उत्तराखंड पुलिस से इंस्पेक्टर पद से रिटायर हैं।
बता दे कि उनके शहीद होने की खबर तब आई, जब उनकी शादी की तैयारियां चल रही थी। एक माह बाद उनकी शादी होनी थी, जिसके कार्ड भी बंट चुके थे।

हमारे मेजर चित्रेश की शहादत के दो दिन बाद देहरादून ने अपना एक और बेटा खो दिया था। 18 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में नेशविला रोड निवासी मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल शहीद हो गए थे।
बता दे कि 14 फरवरी को पुलवामा में आतंकवादियों ने सीआरपीएफ के काफिले पर फिदायीन हमला किया, जिसमें तीन दर्जन से अधिक जवान शहीद हो गए। तब सेना ने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाकर कार्रवाई की।
ओर इसी दौरान दो खूंखार आतंकियो को मार गिराने वाले मेजर विभूति भी शहीद हो गए थे 34 वर्षीय मेजर विभूति ढौंडियाल सेना के 55 आरआर (राष्ट्रीय रायफल) में तैनात थे।
वे तीन बहनों के इकलौते भाई थे विभूति की शादी पिछले ही साल कश्मीरी पंडित निकिता कौल से हुई थी। मूल रूप से पौड़ी के बैजरो ढौंड गांव निवासी मेजर विभूति के पिता स्व. ओमप्रकाश कंट्रोलर डिफेंस अकाउंट पद से सेवानिवृत्त हुए थे।



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