त्रिवेंद्र कैबिनेट का फैसाल है

यथावत रहेंगे हक हकूकधारियों के हक : त्रिवेंद्र सिंह रावत

बता दे कि मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को यह महत्वपूर्ण प्रावधान करते हुए उत्तराखंड चार धाम श्राइन प्रबंधन विधेयक के मसौदे में संशोधन को हरी झंडी दी है।
देवभूमि  उत्तराखंड के पवित्र धामों की बात करे तो भगवान बदरीनाथ, बाबा केदारनाथ, माँ गंगोत्री और माँ यमुनोत्री समेत 51 मंदिरों का प्रबंधन भले ही उत्तराखंड सरकार संभालेगी
लेकिन इनसे जुड़े पुजारियों, न्यासियों, तीर्थ पुरोहितों, पंडों और संबंधित हक हकूकधारियोंके मौजूदा अधिकारों और दस्तूर यथावत रहेंगे।
जी हां त्रिवेंद्र मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को यह महत्वपूर्ण प्रावधान करते हुए उत्तराखंड चार धाम श्राइन प्रबंधन विधेयक के मसौदे में संशोधन को हरी झंडी दिखा दी है
अब उम्मीद है कि सूत्रों के इस संशोधनों के बाद विधेयक को विधानसभा में पेश किया जा सकता है।
बता दे कि कल त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल की विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में हुई बैठक हुई और सूत्रों के अनुसार जो जानकारी मिली उसके अनुसार पांच बिंदुओं पर निर्णय लिए गए है हालाकि विधानसभा सत्र चलने की वजह से सरकार ने मंत्रिमंडल के फैसलों को ब्रीफ नहीं किया है।
जो सूत्रों बोल रहे है उनके अनुसार मंत्रिमंडल ने श्राइन बोर्ड के विधेयक के मसौदे में संशोधन कर धारा-चार (आठ) में पुजारी, न्यासी, तीर्थ पुरोहितों, पंडे और संबंधित हकहकूकधारियों को वर्तमान में प्रचलित देय दस्तूरात और अधिकार के मामले यथावत रखने का प्रावधान शामिल करने पर मुहर लगाई ।साथ ही इनमें परिवर्तन का अधिकार बोर्ड के पास रहेगा।
बोर्ड इस मामले में संबंधित समिति, पंचायत या थोक की सिफारिश को भी ध्यान में रखेगा। धारा-तीन (2)(दो) के जरिए यह संशोधन किया गया है कि बोर्ड का उपाध्यक्ष संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग का मंत्री होगा। यदि वह हिंदू नहीं है तो मुख्यमंत्री हिंदू धर्म मानने वाले मंत्रिपरिषद के किसी वरिष्ठ मंत्री को यह जिम्मा देगा। बशर्ते उक्त मंत्री बोर्ड के सदस्य के रूप में नियुक्ति की पात्रता रखता हो।  वही जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार विधेयक के मसौदे में अन्य अहम संशोधन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को लेकर किया गया है मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिंदू धर्म का अनुयायी अखिल भारतीय सेवा के उच्च समयमान वेतनमान में कार्यरत अधिकारी होना चाहिए। इसके लिए धारा-2(ग) में हिंदू धर्म को मानने वाले के स्थान पर अनुयायी शब्द रखा गया है। हकहकूकधारी और श्राइन की परिभाषा भी स्पष्ट की गई है।
बहराल मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पहले दिन से ही कह रहे है कि यथावत रहेंगे हक हकूकधारियों के हक ।
पुजारियों, न्यासियों, तीर्थ पुरोहितों, पंडों और संबंधित हक हकूकधारियोंके मौजूदा अधिकारों और दस्तूर यथावत रहेंगे : मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत आरम्भ से इसी बात को लगातार कह रहे थे।


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