जो हिमाचल प्रदेश से ना सीख पाए वो विदेशों मे जाकर राज्य का पैसा बर्बाद कर रहे है!

वाह रे मेरे राज्य के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक पूरा मैदानी इलाका ओर खुद वो हरिद्वार जिसकी सड़के आजकल पानी से भरी पड़ी है । उसका हल भी क्या विदेश में सिख रहे हो ? आज तक आपका ड्रेनज़ सिस्टम धरातल पर ना आ पाया ।क्या ये भी विदेश से सिख कर आओगे? मदन कोशिक लगातार हरिद्वार के विधायक बनते आ रहे है पर क्या कभी इन्होंने यहा रहकर कुछ किया जो विदेश से सीखने के बाद करेगे। राज्य की जनता ओर प्रदेश का आधे भाग मे बारिश ने जमकर कोहराम मचा रखा है और राज्य के ये मंन्त्री खुद तो गए ही साथ मे अन्य विधायकों को भी विदेश दौरा पर ले गए ।               इस समय इस दौर को लेकर कांग्रेस के प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष की चुपी ये इशारा कर रही है कि कभी हम कभी  तुम ये तो चलता ही रहता है विदेश दौरा छोड़ो । ओर फिर इस बार तो साथ मे कांग्रेस विधायक भी साथ मे विदेश गए है तो विपक्ष तो चुप रहेगा ही । अब चर्चा है कि इन विदेश दौरों पर हो रही किरकिरी की वजह से अब सफाई पेश करने का दौर शुरू हो गया है। पहले सीएम त्रिवेंद्र ने कहा कि ये रुटीन वर्क से जुड़ा दौरा है। तो पिछले दिनों अब खुद विदेश दौरे पर गए विधायक सोशल मीडिया पर अपनी मीटिंग के दौरान की तस्वीर साझा करके इस बात का सबूत दे रहे हैं कि वो सैर-सपाटा में नहीं बल्कि प्रदेश के विकास से जुड़े कार्य में व्यस्त हैं। अरे भाई फोटो दिखा कर ये क्या दिखाना चाहते है कि हम राज्य हित मे काम कर रहे है। ना जाने पिछले 17 सालों मे कितनी इस प्रकार की फ़ोटो ओर वीडियो बाहर आई होगी पर राज्य के करोड़ो रूपये फूंकने के बाद राज्य का भला ना कोई अफसर कर पाया ना समय समय के दौर मे गए नेता मंत्री विधायक जो विदेश दौरे पर खूब रहे। 
आपको बता दे के पहले ऋषिकेश विधायक प्रेम चंद अग्रवाल का लेह-लद्दाख दौरा खबरों में बना रहा, तो उनकी विधानसभा के लोग गौहरीमाफी में डूब रहे थे। ओर वहां के लोगो ने ये तक कह दिया था कि अगर प्रेम चंद अग्रवाल समय पर 5 लाख भी यहा लगाते तो ये हाल ना होता। फिर ये मामला थमा नही ओर इसके बाद सरकार का 11 सदस्यीय दल का विदेश दौरा चर्चाओं में आ गया। विधायकों की  सैर-सपाटे की खबरों ने लोगों के जख्मों में जैसे नमक। लगाने का काम किया। अब जनता सरकार के मंत्रियों के सैर-सपाटे के जवाब मांगने लगी। तो सीएम त्रिवेंद्र रावत को खुद सामने आकर बताना पड़ा की वो रुटीन वर्क के विदेश दौरे पर गए हैं। मतलब अब रूटीन वर्क हो गया है विदेश दौरा । 
इसके बाद हाल ही में विधायकों के इस दल की कुछ तस्वीर निकलकर आई कि ये दौरा मेट्रो और रोपवे के निर्माण के लिए है। वो विदेश में सैर-सपाटा नहीं बल्कि मीटिंग में व्यस्त हैं।  अरे भाई आप लोगो मे से पहाड़ के विधायक से अपने क्षेत्र में पुल नही बन पा रहे है।लोगो की ज़िन्दगी ट्रॉलियों के सहारे जान हथेली पर रखकर वो जी रहे है। कहा चलाओगे वो मेट्रो ओर कहा बनेंगे वो रोपवे। एक अच्छे पुल बनाने के लिए तो बजट निकलता नही इस कंगाल प्रदेश के खजाने से वो तो भला हो केंद्र सरकार का जो राज्य को चलाने के लिए आर्थिक मदद रूपी समय समय पर निवाला देती रहती है। आपको बता दे कि सब जानते है कि विदेश जाने का बहाना या ये दौरा मेट्रो से जुड़े कार्य के लिए है। पर सवाल तब उठे जब राज्य की इस त्राहिमाम की स्थिति के दौरान क्या ये दौरा इतना जरूरी था? एक तरफ राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी संसद मे माग कर रहे है कि उत्तराखंड को राहत पैकेज दिया जाए। और ये राज्य के नेता मंत्री विदेश दौरे पर कुछ सीखने गए है।अच्छा होता कि राज्य के सभी विधायक पक्ष विपक्ष मिलकर केंद्र सरकारे से मांग करते या सांसद अनिल बलूनी के साथ खड़े होते पर कहा या तो जलन है जलन भले ही इस जलन मे राज्य ओर गड्ढे मे क्यो ना गिर जाए पर साथ नही देगे उस नेता का जो राज्य हित मे लगातार आवाज़ उठा रहा है। सवाल करता है बोलता उत्तराखंड़ की क्यो नही इस मॉनसून सीजन खत्म होने तक के लिए ये विदेश दौरा टाला नहीं गया?       जानकारी के मुताबिक इस दौरे में कुछ ऐसे विधायकों को भी विदेश भेजा गया हैं, जिनका ना तो मेट्रो से कोई लेना देना है और ना ही रोपवे से। इतना ही नहीं स्विटजरलैंड की यात्रा पर निकले विधायक अपनी पत्नियों को भी साथ ले गए हैं। अब उनकी पत्नियां क्या सिख रही होगी राज्य हित मे ये तो वो आकर ही बता पायेगे।
आपको बता दे कि विधायक, मंत्री और अधिकारियों का 11 सदस्यी दल तीन देशों की यात्रा पर है। इस दौरे में शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, केदारनाथ विधायक मनोज रावत, सल्ट विधायक सुरेंद्र सिंह जीना, हरिद्वार से रानीपुर विधायक आदेश चौहान, लोहाघाट विधायक पूरन सिंह फर्त्याल, बागेश्वर विधायक चंदन राम दास और 5 अधिकारी गए हैं।
यह दल पहले स्विट्जरलैंड और उसके बाद जर्मनी जाकर मेट्रो और रोप-वे की तकनीकों के बारे में जान रहा है, जिससे उस तरह के निर्माण राज्य में भी हो सके। लेकिन इससे पहले के विदेश दौरों पर गए मंत्रियों ने वहां जाकर क्या सीखा और उसका इंप्लीमेंट राज्य में कब, कहां और कितना हुआ यह किसी से छुपा नहीं है।   क्यो जब बात निकली है तो दूर तक तो जायेगी ही ।
विकास के आधुनिक तरीके और मेट्रो का कार्य की जानकारी लेने के लिए विधायकों का दल विदेश यात्रा पर तो है।पर जब प्रदेश में बाढ़ जैसे हालात हो और संसद मे बलूनी आवाज़ उठा रहे हो तब इन विधायकों का ये दौरा कितना जायज है इसपर सवाल जनता उठा रही है और विपक्षी खाँमोश है क्योंकि विधायक उनका भी साथ ले गए मंत्री मदन कौशिक फिर भला कैसे कुछ बोले ये कांगेसी।
आपको बता दें कि उत्तराखंड सरकार पर लगातार कर्ज़ बढ़ता ही जा रहा है इस समय लगभग 36 हजार करोड़ से जायदा कर्जा चढ़ा हुवा है । मतलब आप ये समझ ले कि राज्य का प्रत्येक राज्यवासी इस समय लगभग         5 000 रुपए के कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। ओर ऐसे में सरकार के मंत्रियों और विधायकों का यह सैर-सपाटा कितना वाजिब है।  सवाल इस बात का भी है कि इन 17 सालो मे जब जब किसी मंत्री या अफ़सरो ने बिदेश दौरे किये तब से लेकर अब तक इन विदेश के दौरों पर करोड़ो खर्च हो गए पर राज्य को आज तक क्या लाभ मिला ये किसी छुपा है क्या मे यो ये कहता हूँ कि जो हिमाचल राज्य से कुछ ना सीख पाया( हर लिहाज मे )वो कही और से क्या खाक सिख कर आयेगा ।

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