जिन्होंने छोड़ा था अकेला अब वो भी माला लेकर पीछे पीछे भागे !

वो कहते है ना इस राजनीति मे सब जायज़ है और यहा उसी को माना जाता है ,उसके आगे पीछे ही लोगो का सैलाब उमडता है जो कुर्सी पर मौजूद रहता है बात सत्य है जब राज्य मे विधान सभा के चुनाव का परिणाम आया तो आधे से जायदा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से लेकर नेताओ ने हरीश रावत को पूछना तो दूर मिलना भी मुनासिब नही समझा और समझते भी क्यो हरीश रावत के हाथ खाली जो हो गए थे।।         राज्य मे कांग्रेस की कमान प्रीतम सिंह के पास ओर ओर नेता प्रतिपक्ष का रोल इंदिरा ह्रदयेश के पास जो है फिर भला कोई हरीश रावत को क्यो पूछता
पिछले 15 महीनों मे हरीश रावत को उन कांग्रेस के नेताओ ने ओर उन कार्यकर्ताओ ने याद तक नही किया जिनका मतलब निकल गया ,या मान लो जिनको ये लगा कि अब इनके पास जाकर कोई फायदा नही ये डूबता जहाज़ है। इनको छोड़ो ओर अब किसी ओर के पीछे लग जाओ,          अगर गिनती की जाए तो कुछ ही वो लोग है थे और है जो हरीश रावत के साथ लगातार जुड़े रहे पर ये हरीश रावत ही था जो इन पिछले 15 महीनों मे लगातार सक्रिय रहे और तमाम अपने विरोधी की बातों को नज़र अंदाज़ कर लगातार राजनीति मे सक्रिय रहे त्रिवेन्द्र रावत ने जब मुख्यमंत्री की शपथ ली वो तब भी परेड मैदान मे मौजूद रहे ,फिर अगर मौका 15 अगस्त का आया तब भी आजदी के इस जसन मे वो परेड मैदान मे मौजूद रहे और उसके बाद लगातार हरीश रावत जनता के बीच जाते रहे सिर्फ तब गिनती के महज 8 से  12 लोग ही थे जिन्होंने हरीश रावत को अकेला नही छोड़ा बाकी सब कनी काट चुके थे पिछले 15 महीनों में हरीश रावत फेसबुक ,ट्वीटर, ओर शोसल मीडिया मे लगतार सक्रिय रहे वो पूरी रात रात कागज पर लिखते ओर अगले दिन वही सब कुछ उनके फेसबुक पेज पर या शोशल मीडिया पर मौजूद होता   
इस बीच उनके कांग्रेस परिवार के कुछ लोगो ने तो ये तक चाहा कि हरीश रावत कांग्रेस भवन भी ना आये पर ये हरीश रावत था जो सब कुछ जान कर भी मुस्कुरा कर आगे चल रहे थे फिर हरीश रावत ने राज्य के मंदिर मंदिर जा कर कीर्तन भजन मे हिसा लिया तो अपनी हार के कारण भी तलाशे इस बीच भी 
हरीश रावत राज्य की बीजेपी की सरकार और पीएम मोदी पर अपने शब्दो से प्रहार कर देते थे और वही सब कुछ खबरी चैनल की हेडलाइंस तो अखबारों की सुर्खियां बन जाती थी हरीश रावत राज्य की किसी भी दुकान मे खड़ा होकर कभी चाय पी लेते तो कभी चाट खा लेते , तो कही जनता के बीच जाकर बात चीत करते उनके इस काम को देख कर बीजेपी से लेकर खुद कांग्रेस के नेताओ ने हरीश रावत को खाली बता डाला और कहा कि हरीश रावत के पास कुछ काम वाम तो है नही इसलिए ये सब हरकते कर रहे है पर इससे कुछ ना होगा पर हरीश रावत उन नेताओं की बात को नज़र अंदाज़ कर लगातार जनता के साथ नज़र आये ओर पूरे राज्य मे जनता से सवाद करते रहे।        वो समय भी आया जब हरीश रावत को किराए पर पूरे देहरादून मे मकान तक नही मिला जिसका दर्द हर दा ने खुद बया किया कही बार हरीश रावत के लिए मकान तलाशने के नाम पर उनके कांग्रेस के लोगो ने ही कनी काट ली पर जैसे तैसे 3 महीने आखिर हर दा को ठिकाना मिल ही गया था वो भी दून से 12 किलोमीटर दूर।          
हरीश रावत ने फिर उत्तराखंड़ के पहाड़ी उत्पादतो को बढ़वा देने के लिए छोटी छोटी दवातो का सील सिला आरम्भ किया जिसमे काफल से लेकर मड़वे की रोटी ,चेसू, चौलाई की खीर, पहाड़ी मुग़री, पहाड़ी अरबी की चाट, पहाड़ी आलू, गोथ की दाल, से लेकर माल्टा, ओर आम की पार्टी से लेकर कीड़ा जड़ी की चाय तक लोगो को पिलाई पर ये भी उनके विरोधी को पच ना पाया
ओर              दूसरा हरीश रावत का लगातार राजनीति मे सक्रिय रहना कुछ कांग्रेस के नेताओ को मंजूर ना था हा ये बात सच है कि भले ही बीजेपी के नेता राजनीति के हिसांब से हरीश रावत को कोसते रहते है पर वो जानते थे कि हरीश रावत ही उनके लिए राज्य मे सबसे बड़ा खतरा है                 और वो पर्दे पीछे हरीश रावत की राजनीति को मानते भी होगे खेर ये सब तो पिछले 15 महीनों की बात है पर सब अगर आज की बात करे तो जब ये ऐलान हुवा की हरीश रावत पर राहुल गाधी का विस्वास क़याम है और वो राहुल की टीम का हिसा है तो बस फिर क्या दिल मिले या ना मिले अब फिर सब हरीश रावत जिंदाबाद कहते हुए उनके पीछे लग दिये है 
ओर अब क्यो ना कहेगे हरीश रावत जिंदाबाद भाई अब फिर हरीश रावत महत्वपूर्ण पद पर जो आ गए है
हरीश रावत राष्ट्रीय महासचिव अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ,सदस्य कांग्रेस कार्यसमिति व प्रभारी असम का      सोमबार को देहारादून आतेे ही  जाली ग्रांट एयर पोर्ट से लेकर जगह जगह भानियावाला, डोईवाला, हरावाला, रिस्पना पुल ,ओर जगह जगह कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से लेकर नेताओ ने हरीश रावत का जोर  दार स्वागत किया             पूरा कांग्रेस मुख्यालय हरीश रावत जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा मानो सोमबार को ये लग रहा था जैसे कांगेस मे नयी जान आ गयी हो और उन्होंने कोई आज चुनाव जीत लिया हो हर किसी को हरीश रावत को माला पहनाने के लिए बेताब देखा जा रहा था तो कोई अपनी बारी का इंतजार करता नज़र आया प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भी हरीश रावत का जोर दार स्वागत करते हुए कहा कि वो राहुल गांधी का धन्यवाद करते है कि उन्होंने हरीश रावत जी को अपनी टीम का महत्वपूर्ण हिसा बनाया और उम्मीद जताई कि हम सब मिलकर कांगेस को ओर मजबूत करेगे ओर हरीश रावत जी का अनुभव काम आएगा तो हरीश रावत ने कहा कि हम संबको मिलकर राहुल गाधी जी को पीएम बनाना है               जिसके लिए उत्तराखंण्ड से उनको सबकी शक़्ति चईये ओर महिलाएं को अब पीएम मोदी की जनविरोधी नीतियों से लड़ने के दुर्गा का अवतार लेना होगा कुल मिलाकर 3 घण्टे से अधिक चले हरीश रावत के स्वागत ने ये तो एहसास करा दिया है कि अब भी सबकी चाहत हरीश रावत ही है वो बात अलग है कि रही होगी कुछ मजबूरिया …… खेर रावत के आगे अब चुनोतियो बहुत है और समय कम है बस देखना ये है कि रावत अब  इस नई पारी मे क्या कुछ ख़ास करते है 

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