मेला शुरू, नगर प्रक्रिमा पूरी, संगते अपने घरों को, सीएम लापता !

आस्था का महामेला झंडे जी का मेला 6 मार्च से..सांचे दरबार की जय, गुरू महाराज की जय, महंत देवेंद्र दास महाराज के जयकारों के साथ झंडा आरोहण करते ही शुरू हो गया। इसी क्रम में दरबार साहिब में संगतों ने माथा टेक, श्री महंत देवेंद्र दास जी से गुरू मंत्र भी लिया। जिसके लिए लाखों श्रद्धालुओं को अपनी बारी का इंतज़ार करते देखा गया। दरबार साहिब श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। महंत देवेंद्र दास महाराज जी से आशीर्वाद, गुरू मंत्र पाकर श्रद्धालु काफी खुश हुए। श्री महाराज जी ने भी गुरू के बताये रास्ते पर चलने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं ऐसा संगतों को बोलते हुए उन्होंने जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति व मोक्ष के रहस्य का ज्ञान भी दिया। श्री महाराज जी ने कहा की श्रेष्ठ राष्ट्र निर्माण में सबको अपनी भूमिका सुनिश्चित करनी चाहिए।

इसके बाद बृहस्पतिवार को दरबार साहब से झंडे जी पर माथा टेक, श्री महंत देवेंद्र दास जी महाराज, संगतों के साथ नगर की प्रक्रिमा पर निकले। इस बीच महाराज जी के जयकारों से द्रोण नगरी गूंज रही थी। तो वहीं हर तरफ, हर जगह स्थानीय लोगों ने दूर दराज से ही संगतों के खानपान से लेकर प्रसाद की उचित व्यवस्था की गई थी। नगर प्रक्रिमा सहारनपुर चौक से कांवली रोड़ होते हुए, गुरू राम राय पब्लिक स्कूल बिंदाल पहुंची।

यहां संगत को चने, मुरमुरे व गुड़ का प्रसाद बांटा। इसके बाद हज़ारों की तादात में महाराज जी के जयकारों को लगाती संगते नगर प्रक्रिमा करती हुई तिलक रोड़ होते हुए घंटाघर से पलटन बाज़ार होते हुए लख्खीबाग स्थित ब्रह्मलीन श्री महंतो की समाधी स्थल पहुंचे।

सबसे बड़ी बात यह रही की श्री महाराज जी से अपील और निवेदन पुलिस अधिकारी अशोक कुमार ने की, कि महाराज जी पर्यावरण बचाने में आपका सहयोग चाहिए और दून को स्वच्छ और सुंदर रखना है तब श्री महंत देवेंद्रदास जी महाराज जी ने कहा- हे अशोक जी मैं चाहता हूं की गाड़ी चलाने वाले लोग, हफ्ते में एक बार साइकिल चलाए, बहुत लोग पैदल चलने का प्रयास करें। ट्रैफिक नियमों का पालन करें और आप अब समझ गये हैं न की मैंने नगर प्रक्रिमा के रोड़ मैप को छोटा किया है, छोटा करने की वजह यही है की हम दून को हम सब मिलकर सुंदर और स्वच्छ रखेंगे, साथ ही प्रदूषण मुक्त रखने का प्रयास करेंगे। मैं नहीं चाहता की दून भी दिल्ली की तर्ज पर प्रदूषण के नाम पर शामिल हो। ये दून गुरु महाराज जी का बसाया हुआ है और मैंने इसको प्रदूषण से बचाने की पहल की है। आप सब और जनता मेरी इस मुहीम में मेरा साथ दें। महाराज जी के ये शब्द सुनकर अशोक कुमार महाराज जी के आगे नतमस्तक हो गये और हो भीं क्यों ना, जब लाखों श्रद्धालु महाराज देवेंद्र दास जी के चरणों में शीष झुकाते हैं और उनकी मनोकामना पूर्ण होती है तो बाबा राम राय जी से महाराज जी के आदर्शों पर कौन नहीं चलना चाहेगा। पर अफसोस इस बात का रहा की सूबे के मुखिया त्रिवेंद्र रावत इस अदभुत और अनमोल पल के गवाह ना बन सके। जाने क्या कारण रहे होंगे पर सीएम को यहां होना चाहिए था, इस बात का मलाल लेखक को हमेशा रहेगा।

संपादक- रतन नेगी की क़लम से

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