सांचे दरबार की जय..गुरू महाराज की जय, महंत देवेंद्र दास महाराज की जय, हो गई झंडे जी मेले की शुरुआत

देवभूमि उत्तराखंड की द्रोणनगरी में ऐतिहासिक झंडा जी मेले की शुरुआत हो गई है। लाखों श्रद्धालु झंडाजी आरोहण के अविस्मरणीय क्षण के गवाह बनें। दरबार साहिब परिसर के साथ ही श्री गुरु राम राय मिशन के स्कूल व शहर की तमाम धर्मशालाएं संगतों से पैक हैं। सुबह सबसे पहले श्री महंत देवेंद्र दास जी महाराज जी ने पूजा अर्चना कर गुरू महाराज जी को प्रणाम करते हुए लगभग आठ बजे अपनी आलोकिक वेशभूषा पहनकर झंडे साहब पर माथा टेक कर चबुतरे पर चढ़े।

फिर शुरू हुआ झंडे जी को उतारने की प्रक्रिया श्री महाराज जी के दिशा निर्देश पर झंडे जी को सुबह 9 बजे तक उतारा गया। इस बीच महाराज जी लाखों श्रद्दालुओं को आशीर्वाद दे रहे थे, तो दूसरी तरफ लाखों श्रद्दालु झंडे जी को दूध, दही, गंगाजल से स्नान कराने के बाद उन पर वस्त्र पहनाने के पुण्य काम में जुटे थे। जिसमें सादा गिलाफ, सलीन के गिलाफ और अंत में दर्शनी गिलाफ झंडे जी को पहनाया गया।

इस बार पंजाब, लुधियाना के सेवक अर्जुन सिंह जी को दर्शनी गिलाफ पहनाने का मौक़ा मिला। जिन्होंने 102 साल पहले बुकिंग कराई थी। झंडे साहब सजधज कर 3:15 बजे तैयार हो गये थे और श्री महाराज जी के निर्देश पर झंडे जी को चढ़ाने की प्रक्रिया 3 बजकर 30 मिनट से शुरू हुई और ठीक 4 बजे झंडे जी अपने स्थान पर विराजमान हो गये। बस फिर क्या हर तरफ गुरू महाराज जी के जयकारे और देवेंद्र दास जी महाराज के जयकारों से द्रोणनगरी गूंज उठी।

 

क्यों मनाया जाता है झंडा जी का मेला ?

श्री गुरूरामराय जी महाराज एक करामाती कर्ता पुरूष थे उन्होंने 16वीं सदी में देहरादून की धरती पर आकर इसे कर्मस्थली बनाया कहा जाता है कि जब श्री गुरूरामराय जी महाराज ने यहां डेरा जमाया था तब से ही यहां का नाम देहरादून पड़ा था आज तक गुरू कृपा की भक्ति में लोग गोते लगाते हैं प्रत्येक वर्ष होली के पांचवें दिन उनकी स्मृति में झंडे जी के मेले का आयोजन किया जाता है। ये मेला श्री गुरूरामराय जी की याद और सच्ची श्रद्धांजलि के तौर पर विश्वविख्यात है।  श्री गुरूरामराय जी के अनुयायियों में श्रद्धा और भक्ति की गंगा आज भी बह रही है। इसका प्रमाण हर साल होली के पांचवें दिन झण्डे जी के मेले में उमड़ती भीड़ से मिलता है। श्री गुरूरामराय जी महाराज ने सेवा की कई मिसालें पेश की हैं व उदासीन सम्प्रदाय के महान योगीह श्री गुरू राम राय जी महाराज ने जीवन में कई चमत्कार किए हैं और अपना सम्पूर्ण जीवन जनसेवा में लगा दिया। झण्डा मेला भारत के प्रमुख मेलों में शुमार है। श्री गुरू राम राय जी की कर्मस्थली दरबार साहब की पावन भूमि पर हर साल लोखों लाख श्रद्धालु एकत्र होते हैं ये झण्डे जी का मेला श्री गुरू राम  राय जी के अवतरण होने की खुशी में मनाया जाता है। श्री गुरूराम राय दरबार साहिब के 400 साल पुराने इतिहास में हर साल श्री गुरू राम राय जी की स्मृति में झण्डे जी के मेले में हमारी संस्कृति समाहित रहती है। दुधली जंगल से लाई जाने वाली झण्डे जी हर तीन साल बाद बदले जाते हैं जिनकी लंबाई 96 फुट से 108 फुट तक होती है। 10वें और वर्तमान श्री महंत देवेंद्र दास जी महाराज ने झण्डे मेले के आयोजन को सर्वोच्च वरीयता दी है। झण्डा आरोहण के समय का दृष्य बहुत आकर्षक और रमणीय होता है। लाखों लाख श्रद्धालु झण्डा साहिब के दर्शन के लिए एकत्रित रहते हैं कहीं पर भी पांव रखने की जगह तक नहीं मिलती।

 

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