भर जाएंगी सबकी झोलियां कोई न जाएगा ख़ाली, 6 मार्च को उमड़ेगा आस्था का महासैलाब

अनेकता में एकता का प्रतीक श्री झंडे जी का मेला की शुरूआत 6 मार्च से होने जा रही है। 

आइए आपको सबसे बताते हैं मार्च 2018 में होने वाले झण्डे मेले का कार्यक्रम-

सबसे पहले नवमी को पंजाब की पैदल संगत के लिए बिहलौलपुर के महंत वियन्त दास के नाम का हुकुमनामा श्री महाराज जी के हस्ताक्षर करवा कर श्री सुबोध उनियाल दरबार प्रतिनिधि के द्वारा बड़ा गांव ले जाया गया। इसके बाद एकादशी को श्री महंत जी सज्जादा नशीन दरबार साहिब पैदल संगत स्वागत हेतु अराईयांवाला हरियाणा जाते हैं तथा अराईंयांवाला में झंडा रोहण किया जायेगा। वहां पर स्थानीय व यमुनानगर के निवासी आते हैं वह लोग झंडे जी पर भेंट सामाग्री चढ़ाकर पूजा अर्चना कर भंडारा करते हैं। श्री महाराज जी जाते समय रापुर व तिमली रूकते हैं। इसबीच प्रसाद का वितरण भी होता है श्री महाराज जी झंडा रोहण के बाद ताजेवाला बगीचे में रूकते हैं संगत को प्रसाद और आशीर्वाद देकर 26 फरवरी को फिर दरबार साहिब पहुंचेंगे 27 फरवरी को श्री महाराज जी पैदल संगत का स्वागत हेतु श्री गुरूरामराय इंटर कॉलेज सहसपुर जाएंगे। जहां भजन कीर्तन के साथ साथ प्रसाद वितरण हो रहा होता है। तो महाराज जी तमाम हजारों श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते नजर आते हैं जिसके बाद महाराज जी फिर दरबार साहिब पहुंच जाते हैं इसी बीच पैदल संगत पैदल चलते चलते 28 फरवरी को कांवली गांव प्राइमरी स्कूल पहुंचेगी। श्री महाराज जी पैदल संगत का स्वागत करने स्कूल पहुंचेंगे और पैदल संगत के साथ श्री महाराज जी दर्शनी द्वार से दरबार साहिब में प्रवेश करेंगे। बस इसी दिन से संगत का दरबार साहिब में आना प्रारंभ हो जाएगा। तीन और चार मार्च को संगतों द्वारा गिलाफ की सिलाई का कार्य शुरू हो जाएगा। संगतें अपनी मन्नतों के अनुसार गिलाफ सिलवाते हैं। 5 मार्च तक दरबार परिसर व आसपास का क्षेत्र विभिन्न जिलों से आई संगतों से भर जाएगा जो दरबार साहिब और झंडा साहिब में माथा टेकेंगे व शाम को पूर्वी संगत के मसंदो को श्री महाराज जी द्वारा पगड़ी प्रसाद तावीज और आशीर्वाद दिया जाएगा।

पंचमी के दिन सुबह 8 बजे से 9 बजे तक श्री झण्डा जी को उतारने का कार्यक्रम चलेगा जिसमें झण्डे जी के सेवकों द्वारा दूध दही घी और गंगा जल से झंडे जी का स्नान करवाया जाएगा। जिसके बाद तकरीबन 10 बजे से सादे गिलाफ चढ़ाने का कार्यक्रम चलेगा तकरीबन 1 बजे सनील का गलेफ चढाया जाता है। इस दौरान श्री महाराज जी झंडा जी परिवार के सेवकों को आशीर्वाद देंगे । तथा सेवक उनके गले में फूल माला आदि चढ़ाएंगे । झंण्डे जी के उपर अंत में दर्शनी गलेफ चढ़ाया जाएगा जो इस साल श्री अर्जुन सिंह पुत्र श्री साधु सिंह लुधियाना पंजाब द्वारा चढ़ाया जाएगा तकरीबन 5 बजे महाराज जी के दिशा निर्देश के बाद झंण्डा आरोहण कर दिया जाएगा। झण्डा आरोहरण के बाद पूरे दरबार परिसर में खुशी का प्रसाद वितरण हो रहा होगा। तो श्री महाराज जी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते नजर आएंगे।

इसके बाद 8 मार्च को पूराने दून नगर की परिक्रमा सेवकों द्वारा की जाएगी इस परिक्रमा में हजारों की तादात में सेवक श्री महाराज जी पर फूल बरसाते बाबा के जयकारे के नारे लगाते सहारनपुर चैक से कांवली रोड़ होते गुरूरामराय पब्लिक स्कूल बिंदाल पहुंचकर कुछ देर यहंा पर भजन कीर्तन में रूककर तिलक रोड़ घंटाघर पल्टन बाजार से रीठा मंडी होते हुए श्री गुरूरामराय पब्लिक स्कूल भण्डारी बाग पहुंचेंगे जहां भजन कीर्तन में फिर आधा घंटा रूककर संगतें भण्डारी बाग होकर महंतों के समाधी स्थल लख्खीबाग पहुंच कर प्रसाद वितरण करेंगे जिसके बाद तकरीबन 2 बजे फिर दरबार साहिब में ये परिक्रमा समाप्त हो जाएगी। इसी दिन पैदल सगत एवं पंजाब के श्री महंतों एवं मसंदो को श्री महाराज जी पगड़ी एवं प्रसाद वितरण कर खुशी का प्रसाद देते हुए तमाम श्रद्धालुओं को विदाई देंगे।

क्यों मनाया जाता है झंडा जी का मेला ?

श्री गुरूरामराय जी महाराज एक करामाती कर्ता पुरूष थे उन्होंने 16वीं सदी में देहरादून की धरती पर आकर इसे कर्मस्थली बनाया कहा जाता है कि जब श्री गुरूरामराय जी महाराज ने यहां डेरा जमाया था तब से ही यहां का नाम देहरादून पड़ा था आज तक गुरू कृपा की भक्ति में लोग गोते लगाते हैं प्रत्येक वर्ष होली के पांचवें दिन उनकी स्मृति में झंडे जी के मेले का आयोजन किया जाता है। ये मेला श्री गुरूरामराय जी की याद और सच्ची श्रद्धांजलि के तौर पर विश्वविख्यात है।  श्री गुरूरामराय जी के अनुयायियों में श्रद्धा और भक्ति की गंगा आज भी बह रही है। इसका प्रमाण हर साल होली के पांचवें दिन झण्डे जी के मेले में उमड़ती भीड़ से मिलता है। श्री गुरूरामराय जी महाराज ने सेवा की कई मिसालें पेश की हैं व उदासीन सम्प्रदाय के महान योगीह श्री गुरू राम राय जी महाराज ने जीवन में कई चमत्कार किए हैं और अपना सम्पूर्ण जीवन जनसेवा में लगा दिया। झण्डा मेला भारत के प्रमुख मेलों में शुमार है। श्री गुरू राम राय जी की कर्मस्थली दरबार साहब की पावन भूमि पर हर साल लोखों लाख श्रद्धालु एकत्र होते हैं ये झण्डे जी का मेला श्री गुरू राम  राय जी के अवतरण होने की खुशी में मनाया जाता है। श्री गुरूराम राय दरबार साहिब के 400 साल पुराने इतिहास में हर साल श्री गुरू राम राय जी की स्मृति में झण्डे जी के मेले में हमारी संस्कृति समाहित रहती है। दुधली जंगल से लाई जाने वाली झण्डे जी हर तीन साल बाद बदले जाते हैं जिनकी लंबाई 96 फुट से 108 फुट तक होती है। 10वें और वर्तमान श्री महंत देवेंद्र दास जी महाराज ने झण्डे मेले के आयोजन को सर्वोच्च वरीयता दी है। झण्डा आरोहण के समय का दृष्य बहुत आकर्षक और रमणीय होता है। लाखों लाख श्रद्धालु झण्डा साहिब के दर्शन के लिए एकत्रित रहते हैं कहीं पर भी पांव रखने की जगह तक नहीं मिलती।

झण्डे मेला अनेकता में एकता का भी उत्कृष्ट परिचय देता है। देश के कोने कोने से भक्तजन यहां आते हैं और बिना भेदभाव के यहां एकसाथ रहते है और गुरू राम राय जी की भक्ति में रमे रहते हैं जो अपने आप में गुरू राम राय के प्रति आस्था का सबसे बड़ा सैलाब दिखाता है। झण्डे जी के मेले के दौरान श्री महंत देवेंद्र दास जी महाराज जी के दिशा निर्देश का पालन करते हुए दरबार साहब सेवक और मैनेजमेंट दरबार साहब के लोग स्वास्थ खानपान और रहन सहन के साथ साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए रहते हैं बस हर कोई जो भी यहां आता है। यही कहता है। कि बाबा आपके दर पर आकर हमारी सभी मनोकामना पूर्ण हुई आप अपनी कृपा बनाए रखना अगले वर्ष फिर आएंगे आपके द्वार।

इसके साथ ही गुरू महाराज जी के जयकारों और देवेंद्र दास जी महाराज जी के जयकारे लगाते हुए श्रद्धालु अपने घरों को चलते वक्त महाराज जी से प्रसाद लेकर विदाई लेते हैं।

– संपादक रतन नेगी की क़लम से

 

 


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